बजट 2020: दिवालिया हो चुकी कंपनियों को सरकार दे कराधान से जुड़े मामलों में राहत

बजट डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Thu, 23 Jan 2020 12:54 PM IST
बजट 2020
बजट 2020 - फोटो : SELF
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दिवालिया हो चुकी कंपनियों को सरकार कर से जुड़े मामलों में राहत दे ताकि उन पर अलग से और आर्थिक बोझ न पड़े। इसके साथ ही सुपर रिच पर लगने वाले टैक्स सरचार्ज को कम किया जाए। अमर उजाला से खास बातचीत में एनए शाह एसोसिएट्स के पार्टनर अशोक शाह ने उम्मीद जताई कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट में इस तरह की घोषणा करेंगी, जिसका लाभ इन कंपनियों को मिलेगा।
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शाह ने कहा कि दिवालिया कानून के तहत सरकार ने मिनिमम अलटर्नेट टैक्स तो कम कर दिया है, लेकिन अभी भी ऐसी कंपनियों को संपत्ति नीलाम करने टैक्स में किसी तरह की छूट नहीं मिलती है। आईबीसी कानून के सेक्शन 50सी और 56(2)(X) के तहत फिलहाल ऐसा प्रावधान है। शाह ने उम्मीद जताई कि वित्त मंत्री इस सेक्शन में संशोधन के लिए घोषणा करें, जिसका लाभ दिवालिया हुई कंपनियों को मिले। 

सुपर रिच देते हैं कमाई का 42.74 फीसदी कर

शाह ने कहा कि पिछली बार के बजट में सुपर रिच पर लगने वाले सरचार्ज की वजह से ऐसे लोगों पर व्यक्तिगत आयकर की दर 35.88 फीसदी से बढ़कर के 42.74 फीसदी हो गई है। ऐसे में टैक्स बढ़ने से संग्रह कम होने की उम्मीद है। इसलिए वित्त मंत्री से अपील है कि वो सरचार्ज को कम करे, ताकि संग्रह में इजाफा हो। 

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट पर मिले लीगल क्लेम

शाह ने कहा कि आयकर कानून में कई ऐेसे प्रावधान है, जिसके कारण आईटीआर और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट पेश करने पर क्लेम नहीं मिलता है। इनमें कई तरह के खर्च शामिल हैं, जिनमें ईपीएफ जमा करने में देरी का डिस्कलोजर, क्लब फीस का डिस्कलोजर, कैपिटल एक्सपेंडिचर का डिस्कलोजर। इन पर ऑडिटर को किसी तरह का क्लेम नहीं मिलता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी आयकर के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट द्वारा केवल रिपोर्टिंग के द्वारा एडजस्टमेंट देना होता है। इससे करदाताओं को समय व धन का काफी नुकसान होता है। 

इसलिए सरकार से उम्मीद है कि वो आयकर फॉर्म व टैक्स ऑडिट रिपोर्ट के नियमों में बदलाव करे ताकि कानूनी तौर पर करदाताओं के वैध क्लेम को दे सके। इसका सीपीसी मूल्यांकन करें, जिससे कानूनी तौर पर किसी तरह का विवाद न हो। 

बैंकिंग, एनबीएफसी सेक्टर में करने होंगे रिफॉर्म

बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर में सरकार को कई बड़े रिफॉर्म करने होंगे और इसके लिए बजट में घोषणा हो सकती है। सरकार को उन सारे सेक्टर से निकल कर के आना होगा, जहां से उसे किसी तरह का कोई लाभ नहीं हो रहा है। इसके लिए विनिवेश कार्यक्रम को आगे ले जाना होगा। वहीं विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाने होंगे। 

अगर सरकार करों में बढ़ोतरी की घोषणा करती है तो फिर इसका अर्थव्यवस्था पर लंबे समय में बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए उम्मीद है कि बजट में सरकार किसी तरह के नए कर का एलान नहीं करेगी।

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