उद्योगों को आंशिक छूट मिलने से बेरोजगारी पांच सप्ताह में सबसे कम
- सीएमआईई का दावा- फसल कटाई सीजन में ढील से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा
- भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने का समय : एसोचैम
- शहरी क्षेत्रों में आएगा और सुधार
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विस्तार
लॉकडाउन के बीच 20 अप्रैल से उद्योगों को आंशिक छूट मिलते ही अर्थव्यवस्था का पहिया भी चल पड़ा है। इससे महज एक सप्ताह में ही बेरोजगारी की दर में 5% से ज्यादा की गिरावट आई है। रोजगार पर निगाह रखने वाली सरकारी संस्था सेंटर फॉर मानिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) ने बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह दावा किया है।
सीएमआईई ने कहा, फसल कटाई सीजन में लॉकडाउन में ढील से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है। इससे भारत की बेरोजगारी दर 26 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 5 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गई है।
आंशिक छूट के बाद ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों की बेरोजगारी दर नीचे आई है। 19 अप्रैल को खत्म सप्ताह में बेरोजगारी दर 26.19% थी, जो महज 7 दिनों में घटकर 21.05% पर आ गई। सबसे ज्यादा श्रम भागीदारी वाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बेरोजगारी दर भी 19 अप्रैल के 26.69% से घटकर 26 अप्रैल को 20.88% रह गई।
15 मार्च को बेरोजगारी दर 6.75% थी, जो 19 अप्रैल तक बढ़कर 26.19% पहुंच गई। जानकारों का कहना है कि वैसे तो ये आंकड़े अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे नहीं कहे जा सकते, लेकिन मौजूदा हालत में यह काफी राहत देने वाले हैं।
शहरी क्षेत्रों में आएगा और सुधार
शहरी क्षेत्रों के लिए भी बेरोजगारी दर में गिरावट देखने को मिली है। 26 अप्रैल को यहां बेरोजगारी दर घटकर 21.45% पर आ गई, जो 5 अप्रैल को 30.93% और 19 अप्रैल को 25.05% थी। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कुछ राज्य लाखों प्रवासी मजदूरों को वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं और इसका असर जरूर दिखेगा। इससे आगे शहरी क्षेत्र की स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिलेगा। श्रम अर्थशास्त्री केआर श्यामसुंदर का कहना है कि सरकारों ने अगर बेहतर योजना नहीं बनाई तो आश्रय केंद्रों में फंसे श्रमिकों के निकलने के बाद स्थिति दोबारा चिंताजनक बन सकती है।
भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने का समय : एसोचैम
भारतीय उद्योग संगठन एसोचैम का कहना है कि कोरोना संकट के समय सही नीति और निवेश योजना से भारत को वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनाया जा सकता है। एसोचैम के महासचिव दीपक सूद ने कहा कि चीन से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के बाद वैश्विक आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। अगर भारत कोरोना के प्रभाव को सीमित कर दे तो इलेक्ट्रॉनिक, कंप्यूटर हार्डवेयर, फार्मा, चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोबाइल और अन्य इंजीनीयरिंग उत्पादों के निर्माण के लिए दुनिया का हब बन सकता है। एसोचैम से बातचीत में उद्योग क्षेत्र ने भी विनिर्माण पर जोर दिया और कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति भारत से निकल सकती है। कच्चे तेल की कीमतें अभी नरम बनी रहेंगी, जिसका लाभ भारतीय उद्योग और अर्थव्यवस्था को मिलेगा।