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राजनीतिक दलों को चंदा सीएसआर के दायरे में नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 05 Mar 2014 02:05 PM IST
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नए कंपनी कानून के तहत जारी नियमों में यह प्रावधान किया गया है। आम चुनाव के ठीक पहले कंपनी मामलों के मंत्रालय का यह कदम राजनीतिक पार्टियों के लिए एक बड़ा झटका है।
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कंपनी कानून 2013 के तहत कंपनियों को अपने शुद्ध लाभ का दो फीसदी हिस्सा सीएसआर पर खर्च करना होगा। इसे कंपनी की पिछले तीन साल की कमाई के औसत पर तय किया जाएगा। नए सीएसआर नियम 1 अप्रैल 2014 से लागू होंगे।
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मंत्रालय ने सीएसआर संबंधी नियमों को बृहस्पतिवार को अधिसूचित कर दिया है। इसमें प्रावधान किया गया है कि राजनीतिक पार्टियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से दिया गया चंदा सीएसआर खर्च नहीं माना जाएगा।
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नए नियम खास तौर पर तब महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जबकि कंपनी कानून में ही इलेक्टोरल ट्रस्ट बनाकर राजनीतिक चंदा देने का विकल्प कॉरपोरेट को दिया गया है। इसमें उन्हें कर छूट का भी लाभ देने का प्रावधान है।
नए नियमों के तहत यह प्रावधान किया गया है कि कंपनियों को अपनी एक सीएसआर नीति बनानी होगी। इसके संबंध में हर साल 31 मार्च 2013 तक कंपनियों को सूचना देनी होगी। इसके लिए कंपनियों को एक सीएसआर समिति बनानी होगी, जो कि सरकार द्वारा तय किए गए क्षेत्रों के अलावा अपने स्तर पर भी सीएसआर के लिए क्षेत्रों का चुनाव कर सकेगी।
हालांकि इसके तहत ऐसे प्रोजेक्ट को नहीं शामिल किया जाएगा, जो कि केवल कंपनी के कर्मचारी और उसके परिवार को फायदा पहुंचाते हैं।
यदि किसी कंपनी की कोई इकाई या शाखा भारत के बाहर काम कर रही है, तो उसे भारत में हुई कमाई के साथ नहीं जोड़ा जाएगा।
विदेशी कंपनियों को भी भारत में कमाई पर ही दो फीसदी सीएसआर राशि खर्च करनी होगी। कंपनियों को अपनी सीएसआर नीति को वेबसाइट पर डालना अनिवार्य होगा। इस कवायद से अकेले वित्त वर्ष 2014-15 में 20 हजार करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च होने की उम्मीद है।
कौन सी कंपनियां आएंगी दायरे में: जिनका टर्नओवर सालाना एक हजार करोड़ रुपये या ज्यादा है। इसके अलावा कंपनी का नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये या फिर उनका शुद्ध लाभ पांच करोड़ रुपये और उससे ज्यादा है भी इसमें शामिल।