AGR मामला: एयरटेल ने जमा किए 10,000 करोड़, वोडा-आइडिया के प्रस्ताव को SC ने ठुकराया
- एयरटेल ने सोमवार को एजीआर में से सरकार को 10,000 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं।
- उच्चतम न्यायालय ने वोडाफोन आइडिया के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
- पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को फटकार लगाई थी।
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विस्तार
भारती एयरटेल ने सोमवार को समायोजित सकल आय (एजीआर) में से सरकार को 10,000 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं। टेलीकॉम ऑपरेटर्स भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज सोमवार को एजीआर का बकाया भुगतान करना था। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने वोडाफोन आइडिया के सोमवार को 2,500 करोड़ रुपये, शुक्रवार तक 1,000 करोड़ रुपये चुकाने और उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई ना किए जाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
एयरटेल ने दिया बयान
एयरटेल ने पहले कहा था कि वह 20 फरवरी तक 10,000 करोड़ रुपये जमा करेगी और बकाया राशि का पूरा भुगतान 17 मार्च 2020 तक कर दिया जाएगा। अब कंपनी पर 25,586 करोड़ रुपये का बकाया है। अब कंपनी ने बयान में कहा है कि भारती एयरटेल, भारती हेक्साकॉम और टेलीनॉर की तरफ से कुल 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। आगे कंपनी ने कहा कि हम स्वआकलन की प्रक्रिया में हैं और उच्चतम न्यायालय की अगली सुनवाई से पहले हम इस प्रक्रिया को पूरा करके बचे बकाया का भी भुगतान करेंगे।वोडाफोन आइडिया ने रखा था प्रस्ताव
उच्चतम न्यायालय ने वोडाफोन आइडिया के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। वोडाफोन आइडिया ने एक बयान में एजीआर का सांविधिक बकाया चुकाने का प्रस्ताव रखा था। वोडाफोन आइडिया ने कहा था कि कारोबार का भविष्य सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में संशोधन के लिए दायर याचिका के परिणाम पर निर्भर करेगा।Airtel Bharti Limited pays Rs 10,000 Crores to the Telecom Department towards AGR (adjusted gross revenue) dues. pic.twitter.com/5maqJkUDqJ
— ANI (@ANI) February 17, 2020
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तल्ख लहजे में कहा, क्या इस देश में कानून नाम की चीज बची है? क्या हम सुप्रीम कोर्ट बंद कर दें? जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने यह कहते हुए वोडाफोन-आइडिया, एयरटेल समेत सभी दूरसंचार कंपनियों के एमडी व सीएमडी के खिलाफ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए?
पीठ ने इन दूरसंचार कंपनियों के सीएमडी और एमडी को तलब करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा, आपके पास अदालती आदेश का पालन करने का आखिरी मौका होगा और अगर वे इसमें असफल रहे तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। पीठ ने कहा, हर हालत में सभी तरह का भ्रष्टाचार रुकना चाहिए। यह आखिरी मौका है और आखिरी चेतावनी भी। पीठ ने कहा टेलीकॉम कंपनियों ने शीर्ष अदालत के आदेश का जरा भी सम्मान नहीं किया है।
कंपनियों और विभाग के बीच छिड़ सकती है जंग
एजीआर को लेकर टेलीकॉम कंपनियों और दूरसंचार विभाग के बीच नई जंग छिड़ सकती है। वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल ने एजीआर बकाय के बारे में अनुमान लगा रही है। उनके अनुसार, यह आंकड़ा 50 फीसदी कम हो सकता है।
लगभग 50 फीसदी कम हो सकता है एयरटेल का अनुमान
इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि भारती एयरटेल एजीआर की रकम की गणना कर रही है। उन्होंने बताया कि शुरुआती गणना के अनुसार, एजीआर का बकाया 15,000 करोड़ रुपये से 18,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। वहीं दूरसंचार विभाग ने 35,500 करोड़ रुपये के बकाये का आंकड़ा दिया था।
वोडाफोन आइडिया ने भी जताया अनुमान
वोडाफोन आइडिया का बात करें, तो कंपनी के अनुसार एजीआर के बकाय का यह अनुमान 18,000 करोड़ रुपये से 23,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। वहीं टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने इस पर 53,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया होने की बात कही थी।
इसलिए आया अंतर
सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 24 अक्तूबर वाले आदेश के अनुसार एजीआर की गणना करने पर भी दूरसंचार विभाग की परिभाषा के अनुसार कुछ आइटम्स का डुप्लिकेशन हुई है। इसलिए कंपनियों और विभाग के आंकड़ों में अंतर आ रहा है। अगर मूल बकाया ही कम हो जाएगा, तो ब्याज और जुर्माने के आंकड़े में भी गिरावट आ जाएगी।
बता दें कि टेलीकॉम विभाग ने इन दोनों कंपनियों पर 89,000 करोड़ रुपये के बकाये का जो आंकड़ा दिया है, उसमें कुल रकम का लगभग 75 फीसदी हिस्सा ब्याज और जुर्माने का है।
आसान नहीं है प्रक्रिया
एजीआर की रकम का अनुमान लगाना आसान नहीं है। इसके लिए कंपनियों को पिछले 16 वर्षों के अपने रिकॉर्ड्स खोलने पड़ रहे हैं। पिछले 16 सालों के आइटम्स को जोड़कर कंपनियों को उन पर ब्याज और जुर्माने की गणना करनी पड़ रही है।
क्या है एजीआर ?
दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का तीन फीसदी स्पेक्ट्रम फीस और आठ फीसदी लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है। कंपनियां एजीआर की गणना दूरसंचार ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर करती थीं। ट्रिब्यूनल ने उस वक्त कहा था कि किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे गैर प्रमुख स्रोतों से हासिल राजस्व को छोड़कर बाकी प्राप्तियां एजीआर में शामिल होंगी। जबकि दूरसंचार विभाग किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त रकम को भी एजीआर में मानता है। इसी आधार पर वह कंपनियों से बकाया शुल्क की मांग कर रहा है।
किस कंपनी पर कितना बकाया?
पिछले साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों को 90 दिनों के भीतर बकाया 92,000 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। कंपनियों पर एजीआर और ब्याद की रकम मिलाकर करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया है। गत 16 जनवरी को कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को खारीज कर दिया था।
वोडाफोन आइडिया- 53,038 करोड़ रुपये
रिलायंस जियो- 45,000 करोड़ रुपये
भारती एयरटेल- 25,586 करोड़ रुपये
टाटा टेलीकॉम- 13,823 करोड़ रुपये