टाटा का आरोप, कंपनी को हड़पना चाहते थे सायरस मिस्त्री
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टाटा ग्रुप में रतन टाटा और सायरस मिस्त्री की जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। टाटा संस की ओर से एक चिट्ठी लिखकर ये साबित करने की कोशिश की गयी है कि क्यों सायरस मिस्त्री को हटाना जरूरी था।
इससे पूर्व टाटा ग्रुप ने अपनी कंपनियों से सायरस मिस्त्री को हटाने की कवायद शुरू कर दी है। टीसीएस के चेयरमैन पद से सायरस मिस्त्री को हटाकर इशात हुसैन को इसका चेयरमैन बनाया गया।
सूत्रों के अनुसार इंडियन होटल से भी सायरस मिस्त्री को हटाने के लिए टाटा संस की ओर से ईजीएम बुलाई गयी है।
टाटा संस की नई चिट्ठी में लिखा गया है कि सायरस मिस्त्री को काम करने के लिए 4 साल का वक्त मिला। सायरस मिस्त्री के काम को टीसीएस की आय से
अलग करना होगा। टीसीएस में सायरस मिस्त्री का कोई खास योगदान नहीं रहा है।
टीसीएस ने टाटा संस से ग्रोथ के लिए कभी भी कोई पूंजी नहीं ली। साथ ही सायरस मिस्त्री के कार्यकाल में 40 टाटा ग्रुप कंपनियों का डिविडेंड 1000 रुपये से घटकर 780 करोड़ रुपये हो गया। 780 करोड़ रुपये की रकम में 100
करोड़ रुपये तो अंतरिम डिविडेंड था।
डिविडेंट घटने के साथ-साथ खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। कर्मचारियों पर खर्च 84 करोड़ रुपये से बढ़कर 180 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। दूसरे खर्चे 220 करोड़ रुपये से बढ़कर 290 करोड़ रुपये हुए।
सायरस मिस्त्री की हिस्सा बेचने की रणनीति विफल रही और विनिवेश से कोई मुनाफा नहीं हुआ है। इम्पेयरमेंट खर्चों के लिए प्रोविजनिंग 200 करोड़ रुपये से बढ़कर 2400 करोड़ हुई। टीसीएस को छोड़ 3 साल से टाटा संस को घाटा ही हो रहा था जो चिंता की बात थी। 3 साल से टाटा संस को घाटा ही हो रहा था जो चिंता का प्रमुख कारण था।