सोलर बिजली के प्रोत्साहन के लिए 5000 करोड़ रुपये की मंजूरी
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सोलर बिजली से जुड़ी ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप परियोजनाओं के लिए बुधवार को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने 5000 करोड़ रुपये के प्रावधान को अपनी मंजूरी दे दी।
पहले सरकार ने रूफटॉप परियोजनाओं के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था जिसे बढ़ाकर 5000 करोड़ रुपये किया गया है। अगले पांच साल में 4200 मेगावाट की ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर प्रणाली को विकसित करने के मद में इन राशियों का इस्तेमाल किया जाएगा।
स्वच्छ ऊर्जा के विकास में सरकार सबसे अधिक सोलर बिजली की क्षमता के विस्तार पर फोकस कर रही है। वर्ष 2022 तक सोलर क्षमता में एक लाख मेगावाट के विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।
कैबिनेट कमेटी के फैसले के मुताबिक केंद्र सरकार की तरफ से रूफटॉप सोलर परियोजना लगाने के लिए सामान्य श्रेणी के राज्यों को 30 फीसदी की पूंजी सब्सिडी दी जाएगी वहीं विशेष श्रेणी के राज्यों को 70 फीसदी की पूंजी सब्सिडी दी जाएगी।
6.5 रुपए प्रति यूनिट होगी दर
विशेष श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर समेत पूर्वोत्तर के राज्य शामिल हैं। सरकार के फैसले के मुताबिक सिर्फ आवासीय, सरकारी, सामाजिक, संस्थागत क्षेत्र की छतों पर लगाई जाने वाली सोलर परियोजनाओं को ही सब्सिडी दी जाएगी।
व्यावसायिक व औद्योगिक भवनों की छतों पर लगने वाली सोलर परियोजनाओं को सरकारी सब्सिडी नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि सरकार की इस मदद से सोलर के बाजार का सृजन होगा और उपभोक्ताओं में विश्वास आएगा।
सरकार के मुताबिक वर्ष 2022 तक एक लाख मेगावाट सोलर बिजली के क्षमता विस्तार में 40,000 मेगावाट क्षमता ग्रिड कनेक्टेड रूफटॉप सोलर की होगी।
सरकार के मुताबिक छतों पर लगाई जाने वाली सोलर परियोजनाओं के उत्पादित बिजली की दर 6.5 रुपये प्रति यूनिट के आसपास होगी जो डीजल से चलने वाले जेनरेटर से उत्पादित बिजली की दरों के मुकाबले काफी सस्ती होगी।