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फ्यूचर-रिलायंस डील: अमेजन द्वारा दायर याचिका पर सिंगापुर मध्यस्थता केंद्र की सुनवाई पूरी
Sat, 17 Jul 2021 03:59 PM IST
डिंपल अलावाधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Sat, 17 Jul 2021 03:59 PM IST
सार
एसआईएसी ने फ्यूचर समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच सौदे के खिलाफ ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन द्वारा दायर याचिका पर अंतिम सुनवाई पूरी कर ली है।
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रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर रिटेल लिमिटेड
- फोटो : twitter: @CCI_India
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विस्तार
सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (एसआईएसी) ने फ्यूचर समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज के बीच 24,713 करोड़ रुपये के सौदे के खिलाफ ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन द्वारा दायर याचिका पर अंतिम सुनवाई पूरी कर ली है। एसआईएसी ने इस मामले में अपनी अंतिम सुनवाई 12 जुलाई को शुरू की थी।
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हरीश साल्वे और गोपाल सुब्रमण्यम ने रखा कंपनियों का पक्ष
इस मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार एसआईएसी में गठित न्यायाधिकरण ने इस मामले में अपनी पांच दिन चली अंतिम सुनवाई का समापन कर दिया है। किशोर बियानी के नेतृत्व वाले फ्यूचर समूह का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने किया। अमेजन की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने कंपनी का पक्ष रखा।
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एक महीने बाद फैसला संभव
सूत्रों ने बताया कि इस मामले एक महीने बाद फैसला सुनाया जा सकता है। इससे पहले इसी साल के शुरू में इस मामले पर अंतिम सुनवाई के लिए एसआईएसी ने तीन सदस्यीय मध्यस्था मंच का गठन गिया था जिसमें सिंगापुर के बैरिस्टर माइकल हवांग, अलबर्ट वान डेन बर्ग ओर जान पाउलसन को रखा गया है।
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क्या है मामला?
यह विवाद अगस्त 2020 में फ्यूचर समूह द्वारा करीब 24,000 करोड़ रुपये में अपने खुदरा, भंडारण और लॉजिस्टिक कारोबार को रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचने के समझौते की घोषणा के साथ शुरू हुआ था। फ्यूचर समूह की कंपनी फ्यूचर कूपंस लिमिटेड में निवेश करने वाली ई-कामर्स कंपनी अमेजन ने कहा कि वह इस हिस्सेदारी के नाते फ्यूचर रिटेल की भी हिस्सेदार है। फ्यूचर कूपंस की फ्यूचर रिटेल में 7.3 फीसदी हिस्सेदारी है। अमेजन ने इस सौदे को एसआईएसी में अक्तूबर में चुनौती दी। उसकी अर्जी पर मध्यस्था अदालत ने रिलायंस-फ्यूचर सौदे पर अंतरिम रोक लगा दी।
रिलायंस ने बढ़ाई करार को पुरा करने के लिए प्रतीक्षा की अवधि
फ्यूचर समूह ने एसआईएसी के फोरम के अंतरिम निर्णय को दिल्ली उच्च न्यायालय में मध्यस्था न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र और कुछ अन्य आधारों पर चुनौती दी थी। वहां से मामला उच्चतम न्यायालय तक चला गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस करार को पुरा करने के लिए प्रतीक्षा की अवधि बढ़ाकर 30 सितंबर 2021 तक कर दी है।