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सिक्का, मुंजाल पाते हैं कर्मचारियों से 237 गुना सैलरी ज्यादा

Fri, 24 Feb 2017 02:38 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 24 Feb 2017 02:38 PM IST
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sikka, munjal tops the chart in getting more average salary than employees
शेयर मार्केट में लिस्टेड टॉप 50 कंपनियों के सीईओ की सैलरी 13 करोड़ रुपये है जो कि इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की औसत सैलरी से 237 गुना अधिक है। सीईओ की सैलरी में जितना इजाफा हर साल होता है, उसके मुकाबले कर्मचारियों की सैलरी काफी कम बढ़ती है। 
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इनफोसिस विवाद के बाद कंपनियों के उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों की सैलरी सुर्खियों में आ गई है। कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का को जो पैकेज मिला है वो उनके यहां काम करने वाले एक औसत कर्मचारी की सैलरी के मुकाबले 935 फीसदी ज्यादा है। 
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आईटी सेक्टर के सीईओ को मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी

निफ्टी में सूचित 50 कंपनियों में टॉप 10 में शुमार कंपनियों में पहले चार पर आईटी कंपनियां हैं, जिनके सीईओ को सबसे ज्यादा सैलरी मिलती है। हालांकि सिक्का को जो सैलरी मिलती है वो इनके सेक्टर में सबसे ज्यादा है।
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लेकिन सिक्का तब भी हीरो मोटोकॉर्प के एमडी पवन मुंजाल से काफी पीछे हैं। जहां सिक्का को हर साल 48.7 करोड़ रुपये का पैकेज मिलता है, वहीं मुंजाल का सालाना पैकेज 57.4 करोड़ रुपये रहा था। 
 

क्यों होती है सीईओ की सैलरी सबसे ज्यादा

sikka, munjal tops the chart in getting more average salary than employees
कंपनियों के सीईओ की सैलरी अक्सर ज्यादा क्यों रहती है, इस पर शुरू से विवाद हुआ है। जानकारों के मुताबिक हर कंपनी अपने सीईओ की सैलरी को ज्यादा रखता है, क्योंकि उसके ऊपर कंपनी को चलाने का सबसे ज्यादा दारोमदार रहता है।

सीईओ मार्केट के हिसाब से निर्णय लेता है, जिसका असर सभी कर्मचारियों पर पड़ता है। इसके अलावा कंपनी को मुनाफे में चलाना, कंपनी की मार्केट में स्थिरता रखना और अच्छा काम करना एक सीईओ का काम होता है।

जानकारों का कहना है कि सीईओ कंपनी बोर्ड के प्रति जवाबदेह होता है।इसलिए कंपनी एजीएम या फिर अन्य मीटिंग के जरिए सीईओ की सैलरी को तय करती है, जिसकी सूचना स्टॉक एक्सचेंज को भी दी जाती है। 

इन कंपनियों ने नहीं दी है जानकारी

स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होने के बावजूद कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जो अपने कर्मचारियों की औसत सैलरी का जिक्र नहीं करती हैं। इनमें बजाज ऑटो, रिलायंस इंडस्ट्री, मारुति सूजुकी और बॉश शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों की औसत सैलरी का जिक्र नहीं करते हैं। 
 
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