रेमंड विवादः बेटे को कंपनी से बेदखल करने की तैयारी में विजयपत सिंघानिया
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देश की जानी मानी टेक्सटाइल कंपनी रेमंड के संस्थापक और जेके ग्रुप से ताल्लुक रखने वाले विजयपत सिंघानिया अब अपने बेटे गौतम सिंघानिया को कंपनी व संपत्ति से बेदखल करने जा रहे हैं। एएफपी के मुताबिक विजय सिंघानिया फिलहाल कोर्ट द्वारा 2007 में दिए गए एक फैसले को आधार बनाते हुए ऐसा करने जा रहे हैं।
इस फैसले के अनुसार अगर माता-पिता ने अपनी संतान को कोई प्रॉपर्टी उपहार में दी है, लेकिन संतान अपने माता-पिता की देखभाल नहीं कर रही है तो फिर वो उपहार में दी गई प्रॉपर्टी वापस ले जा सकती है।
कंपनी ने किया था चेयरमैन पद से बर्खास्त
विजयपत सिंघानिया ने 1925 में रेमंड जैसे ब्रांड की स्थापना की थी उनको ही कंपनी ने चेयरमैन पद से बर्खास्त कर दिया था। रेमंड के चेयरमैन रहे विजयपत सिंहानिया को इस बात की जानकारी कंपनी के द्वारा मिले एक पत्र के जरिए हुई।
दो साल से चल रहा है विवाद
विजयपत सिंहानिया और उनके बेटे गौरव सिंहानिया के बीच संपत्ति को लेकर के करीब दो सालों से विवाद चल रहा है। यह विवाद उच्च न्यायालय तक पहुंच गया। हालांकि न्यायालय ने बाप-बेटों से बातचीत के जरिए मामला सुलझाने के लिए कहा था।
कंपनी को लिखे थे पत्र
इससे पहले बेटे के खिलाफ विजयपत सिंहानिया ने कई पत्र कंपनी के बोर्ड को लिखे थे। इन पत्रों में विजयपत ने शिकायत की थी, कि उन्हें बोर्ड की बैठक के बारे में सूचना नहीं दी जा रही है। कंपनी के सीए और निदेशक थॉमस फर्नाडिज की तरफ से 7 सितंबर को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि विजयपत ने अपने पत्र में काफी अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया था।
परिवार में जो विवाद चल रहा है, उसका कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है। उनके गलत आचरण और व्यवहार के कारण कंपनी ने आजीवन चेयरमैन बने रहने के पद से बर्खास्त करने का निर्णय लिया है।
गौतम सिंहानिया ने किया बचाव
गौतम सिंहानिया ने अपने पिता के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके पिता को भूलने की बीमारी हो गई है। उनको याद नहीं रहता है कि वो किससे कब और क्या बोले हैं। मैं अभी भी सारे विवाद बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता हूं लेकिन कंपनी के मामले वो राय नहीं दे सकते हैं। उनको हटाने का फैसला बोर्ड ने लिया है और मेरी इसमें किसी तरह की कोई भूमिका नहीं है।