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रेमंड विवादः बेटे को कंपनी से बेदखल करने की तैयारी में विजयपत सिंघानिया

Wed, 02 Jan 2019 03:52 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 02 Jan 2019 03:52 PM IST
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raymond founder vijaypat singhania planning to oust son from company
विजयपत और गौतम सिंघानिया

देश की जानी मानी टेक्सटाइल कंपनी रेमंड के संस्थापक और जेके ग्रुप से ताल्लुक रखने वाले विजयपत सिंघानिया अब अपने बेटे गौतम सिंघानिया को कंपनी व संपत्ति से बेदखल करने जा रहे हैं। एएफपी के मुताबिक विजय सिंघानिया फिलहाल कोर्ट द्वारा 2007 में दिए गए एक फैसले को आधार बनाते हुए ऐसा करने जा रहे हैं।

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इस फैसले के अनुसार अगर माता-पिता ने अपनी संतान को कोई प्रॉपर्टी उपहार में दी है, लेकिन संतान अपने माता-पिता की देखभाल नहीं कर रही है तो फिर वो उपहार में दी गई प्रॉपर्टी वापस ले जा सकती है। 

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कंपनी ने किया था चेयरमैन पद से बर्खास्त

विजयपत सिंघानिया ने 1925 में रेमंड जैसे ब्रांड की स्थापना की थी उनको ही कंपनी ने चेयरमैन पद से बर्खास्त कर दिया था। रेमंड के  चेयरमैन रहे विजयपत सिंहानिया को इस बात की जानकारी कंपनी के द्वारा मिले एक पत्र के जरिए हुई। 

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दो साल से चल रहा है विवाद

विजयपत सिंहानिया और उनके बेटे गौरव सिंहानिया के बीच संपत्ति को लेकर के करीब दो सालों से विवाद चल रहा है। यह विवाद उच्च न्यायालय तक पहुंच गया। हालांकि न्यायालय ने बाप-बेटों से बातचीत के जरिए मामला सुलझाने के लिए कहा था।

कंपनी को लिखे थे पत्र

raymond founder vijaypat singhania planning to oust son from company

इससे पहले बेटे के खिलाफ विजयपत सिंहानिया ने कई पत्र कंपनी के बोर्ड को लिखे थे। इन पत्रों में विजयपत ने शिकायत की थी, कि उन्हें बोर्ड की बैठक के बारे में सूचना नहीं दी जा रही है। कंपनी के सीए और निदेशक थॉमस  फर्नाडिज की तरफ से 7 सितंबर को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि विजयपत ने अपने पत्र में काफी अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया था।

परिवार में जो विवाद चल रहा है, उसका कंपनी से कोई लेना-देना नहीं है। उनके गलत आचरण और व्यवहार के कारण कंपनी ने आजीवन चेयरमैन बने रहने के पद से बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। 

गौतम सिंहानिया ने किया बचाव

गौतम सिंहानिया ने अपने पिता के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके पिता को भूलने की बीमारी हो गई है। उनको याद नहीं रहता है कि वो किससे कब और क्या बोले हैं। मैं अभी भी सारे विवाद बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता हूं लेकिन कंपनी के मामले वो राय नहीं दे सकते हैं। उनको हटाने का फैसला बोर्ड ने लिया है और मेरी इसमें किसी तरह की कोई भूमिका नहीं है। 

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