24 फीसदी बढ़त के साथ इंफोसिस को हुआ 4,466 करोड़ का मुनाफा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश की दूसरी बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनी इंफोसिस ने दिसंबर, 2019 में समाप्त तिमाही के दौरान 23.7 फीसदी बढ़त के साथ 4,466 करोड़ रुपये का समेकित मुनाफा दर्ज किया। वहीं एक साल पहले समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा 3,610 करोड़ रुपये रहा था।
बीएसई में कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, अक्तूबर-दिसंबर, 2019 तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व 7.9 फीसदी बढ़कर 23,092 करोड़ रुपये हो गया, जबकि बीते साल समान अवधि में यह 21,400 करोड़ रुपये रहा था।
बंगलूरू मुख्यालय वाली इस कंपनी ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए स्थिर मुद्रा पर अपना राजस्व आउटलुक बढ़ाकर 10-10.5 फीसदी कर दिया, जबकि अक्तूबर में यह 9-10 फीसदी दिया था। इंफोसिस के सीईओ और एमडी सलिल पारेख ने कहा, ‘तिमाही नतीजों से जाहिर होता है कि हम टिकाऊ ग्राहकों के आगे के सफल के लिए प्रासंगिक बने हुए हैं और डिजिटल बदलाव के इस दौर में हमारा ग्राहकों के साथ जुड़ाव मजबूत होता जा रहा है।’ उन्होंने कहा कि राजस्व गाइडैंस में सुधार के सात ही परिचालन मार्जिन में बढ़ोतरी के दम पर कंपनी दहाई अंकों में वृद्धि दर्ज करने में कामयाब रही है।
इंफोसिस के सीओओ प्रवीण राव ने कहा कि इस साल अभी तक बड़े सौदों में 56 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, ‘कंपनी ने एक बार फिर पलायन में कमी दर्ज की गई है।’ दिसंबर तिमाही के दौरान डॉलर में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 24.8 फीसदी की बढ़त के साथ 62.7 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि राजस्व 8.6 फीसदी बढ़कर 3.24 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। दिसंबर, 2019 में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 2,43,454 रही और इस महीने में कंपनी ने 6,968 लोग जोड़े, वहीं पलायन दर 19.6 फीसदी रही।
वित्तीय अनियमितताओं के नहीं मिले प्रमाण
इंफोसिस ने कहा कि ऑडिट समिति ने अज्ञात व्हिसिलब्लोअर के आरोपों की जांच पूरी कर ली है और उसे वित्तीय अनिमितता और अधिकारी द्वारा दुराचरण के कोई प्रमाण नहीं मिले। कंपनी की ऑडिट समिति के चेयरपर्सन डी सुंदरम ने कहा, ‘ऑडिट समिति ने शिकायत को गंभीरता से लिया और स्वतंत्र कानूनी सलाहकार की सहायता से जांच कराई गई। समिति ने पाया कि इसमें वित्तीय अनियमितता और कार्यकारी के दुराचरण के कोई प्रमाण नहीं मिले।’