इस नई तरकीब से जनता को राहत देने जा रही है मोदी सरकार?
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अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के दबाव के कारण मोदी सरकार जल्द खर्चों में भारी कटौती कर सकती है। दरअसल नोटबंदी के बाद जनता को राहत देने के लिए सरकार को खजाने में कैश की जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए स्रोतों के सीमित होने के कारण सरकार को खर्चों में कटौती की जरूरत महसूस हो रही है।
सरकार ने आमदनी बढ़ाने के हर विकल्प को तलाशना शुरू कर दिया है। वित्त सचिव अशोक लवासा के बताया कि सरकार मार्च से पहले खर्च के तौर-तरीकों के नियमों में बड़े सुधार करने का जा रही है।
खर्च नियंत्रण करने के लिए मॉडर्न मैनेजमेंट के तरीके अपनाए जाएंगे।
नई भर्तियों पर लग सकती है रोक
सूत्रों के अनुसार सबसे पहले अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर लगाम लगाने की तैयारी है। साथ ही प्रेस कांफ्रेंस के बटत में भी कटौती की जा सकती है ताकि खर्च कम हों। इसकी भरपायी के लिए डिजिटल मोड अपनाते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसके अलावा अधिकारियों के वाहनों पर होने वाले खर्च को भी आंका जा रहा है ताकि पेट्रोल और डीजल पर होने वाले खर्चों में कटौती की जाए। साथ ही नई भर्तियां न करते हुए विभागों में लोगों की कमीको अन्य विभागों में कार्य कर रहे ज्यादा लोगों को ट्रांसफर करके पूरी करने की भी तैयारी चल रही है और तब भी काम नहीं बनता है तो कार्य को आउटसोर्स कर दिया जाएगा।
इस लिहाज से कांट्रेक्ट स्टाफ को परमानेंट करने का फैसला भी टल सकता है और जो लोग इस आस में बैठे हैं कि जल्द वो परमानेंट हो जाएगें और सरकारी सुख सुविधा का लाभ उठा सकेंगे उन्हें झटका लग सकता है। वहीं इस कटौती पर आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांता दास का कहना है कि हम उतनी ही राहत दे सकते हैं, जितने वित्तीय संसाधन उसके पास हैं। ज्यादा राहत देने के लिए ज्यादा वित्तीय संसाधन बढ़ाने होंगे।