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ऋण संकट से जूझ रही DHFL, कर्जदाताओं ने पीरामल एंटरप्राइजेज की बोली को चुना
Sat, 16 Jan 2021 09:30 AM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Sat, 16 Jan 2021 09:30 AM IST
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- फोटो : Amar ujala
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ऋण संकट से जूझ रही डीएचएफएल के लिए पीरामल एंटरप्राइजेज की बोली को कर्जदाताओं द्वारा मतदान की प्रक्रिया खत्म होने के साथ सबसे अधिक वोट मिले। सूत्रों ने बताया कि पीरामल की बोली को 94 फीसदी वोट मिले, जबकि अमेरिका स्थित कंपनी ओकट्री की बोली को 45 फीसदी वोट प्राप्त हुए। मतदान गुणात्मक और मात्रात्मक सहित विभिन्न मानदंड़ों पर किया गया।
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35 से 37 हजार करोड़ के बीच लगाई गई बोली
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) इस बारे में अंतिम निर्णय लेने के लिए एक बार बैठेगी और अपनी सिफारिशों को एनसीएलटी के पास भेजेगी। पिछले महीने बोली की प्रक्रिया के पांचवें और अंतिम दौर की समाप्ति के बाद पीरामल एंटरप्राइजेज और ओकट्री, दोनों ने दावा किया था कि उनकी बोली सबसे ऊंची है। सूत्रों के मुताबिक बोलीदाताओं ने 35,000 से 37,000 करोड़ रुपये के बीच बोली लगाई है।
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डीएचएफएल पर कितना बकाया?
जुलाई 2019 में कंपनी पर बैंकों का 83,873 करोड़ रुपये का बकाया था। मार्च 2020 में कंपनी की परिसंपत्तियां (दिए गए कर्ज के बकाए) 79,800 करोड़ रुपये थी। इसमें से 63 फीसदी एनपीए (अवरुद्ध) हो चुकी थीं। इसमें 10,083 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा बकाया भारतीय स्टेट बैंक का है। इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया के 4,125 करोड़ रुपये, केनारा बैंक के 2,681 करोड़ रुपये, एनएचबी 2,434 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक के 2,378 करोड़ रुपये, सिंडीकेट बैंक के 2,229 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा के 2,075 करोड़, इंडियन बैंक के 1,552 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक के 1,389 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक के 999 करोड़ रुपये और एचडीएफसी बैंक के 361 करोड़ रुपये बकाया हैं।
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बीते दिनों पिरामल एंटरप्राइजेज ने यह दावा किया था कि डीएचएफएल के लिए उसकी पेशकश 55 हजार से अधिक खुदरा एफडी धारकों के लिए अमेरिका की कंपनी ओकट्री कैपिटल की तुलना में बेहतर है। ओकट्री ने डीएचएफएल के लिए अंतिम दौर की बोली में पिरामल के जैसी ही पेशकश की है। हालांकि ओकट्री ने दावा किया है कि वह पिरामल के 150 करोड़ रुपये की तुलना में एफडी धारकों को 300 करोड़ रुपये अतिरिक्त देगी।