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कार्वी ब्रोकिंग ऐसे कामों में थी लिप्त, जिसकी नहीं थी अनुमति: सेबी

Wed, 27 Nov 2019 05:25 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 27 Nov 2019 05:25 PM IST
सार

  • 2,000 करोड़ के घोटाले का आरोप है कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग पर
  • कंपनी ने ग्राहकों के शेयर बेच कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर किए 1,096 करोड़ 

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karvy stock brocking was involved in such activities which was not allowed, says sebi
- फोटो : PTI

विस्तार

कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग मामला सामने आने के बाद पूंजी बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने बुधवार को कहा कि यह ब्रोकरेज कंपनी उन गतिविधियों से शामिल पाई गई, जिनकी कभी अनुमति नहीं थी। उन्होंने कहा कि जून में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक सर्कुलर जारी कर इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी और कहा था कि किसी भी इकाई को ऐसी गतिविधियों में लिप्त नहीं होना चाहिए। इससे पहले की भी ऐसी गतिविधियों में संलिप्तता स्वीकार नहीं होगी। 

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त्यागी ने कंपनी संचालन पर आयोजित आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) की एशियाई बैठक से अलग कहा, ‘बुनियादी तौर पर जिसकी कभी अनुमति नहीं थी, वह काम हो रहा था। ऐसा नहीं है कि इसके लिए जून में ही मना किया गया है। चाहे इस मामले में स्पष्ट तौर पर पहले कुछ भी नहीं कहा गया था, फिर भी आप अपने स्तर पर ग्राहकों के शेयरों का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं और ऐसा करने की अनुमति किसी को नहीं है।’ उन्होंने दोहराया यह बुनियादी मुद्दा है, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। 

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एनएसई ने भेजी थी प्राथमिक रिपोर्ट

दरअसल, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने इस मामले में सेबी को प्राथमिक रिपोर्ट भेजी थी, जिसके बाद सेबी ने यह कदम उठाया। बाजार नियामक ने एक आदेश में कहा कि एक्सचेंज की शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद ही कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के खिलाफ 19 अगस्त को सीमित जांच की गई। इसमें एक जनवरी के बाद के सौदों की जांच की गई। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत बरुआ की 12 पन्ने के अंतरिम आदेश में कहा गया है कि मामले में ग्राहकों के शेयरों का आगे दुरुपयोग रोकने के लिए तुरंत नियामकीय हस्तक्षेप की जरूरत है। ब्रोकरेज कंपनी पर नए ग्राहक जोड़ने पर प्रतिबंध लगाने के अलावा नियामक ने एनएसडीएल और सीडीएसएल को निर्देश दिया है कि वे ग्राहकों की पावर ऑफ अटॉर्नी के अनुसरण में कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के किसी भी निर्देशों का पालन न करें। 

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यह है मामला : ग्राहकों के शेयरों का दुरुपयोग

ब्रोकरेज कंपनी पर 2,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा इक्विटी ब्रोकर घोटाला है। सेबी के मुताबिक, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड ने अपने ग्राहकों के खातों में रखे शेयर बेचकर अप्रैल, 2016 से दिसंबर, 2019 के बीच 1,096 करोड़ रुपये अपनी समूह की कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर किए हैं। मामला सामने आने के बाद सेबी ने तुरंत प्रभाव से कंपनी को शेयर ब्रोकिंग गतिविधियों के लिए नए ग्राहकों जोड़ने पर रोक लगा दी है। 

अपने शेयरों को ब्रोकरों की धोखाधड़ी से ऐसे बचाएं

  • अपने ब्रोकर और डिपॉजिटरी प्रतिभागी के साथ अपनी ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर अपडेट रखें ताकि कोई ट्रेडिंग होने या प्रतिभूति ट्रांसफर होने पर आपको अलर्ट मिल सके। 
  • ट्रेडिंग के बाद अगर ब्रोकर आपको 90 दिन में भुगतान नहीं करता है या फिर स्टॉक स्टेटमेंट की जानकारी नहीं देता है तो सतर्क हो जाएं। ब्रोकर से इसकी नियमित जानकारी देने को कहें।
  • आप डीमैट खाते के जरिए अपने शेयरों की जानकारी रख सकते हैं और बाजार गतिविधियों के हिसाब से अपने शेयरों में उतार-चढ़ाव पर भी नजर रखें।
  • एनएसडीएल या सीडीएसएल पर खुद को रजिस्टर करें। इसके बाद आप यहां से अपने शेयर संबंधी सभी जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं।
  • ब्रोकर को पावर ऑफ अटॉर्नी देते समय सावधानी बरतें और जरूरत पड़ने पर ब्रोकर को भी बदलें। 
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