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पतली हुई जेट एयरवेज की हालत, लोन डिफॉल्ट से घटी रेटिंग, 8 हजार करोड़ की उधारी
Thu, 03 Jan 2019 11:52 AM IST
kapil sharma
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: kapil sharma
Updated Thu, 03 Jan 2019 11:52 AM IST
सार
- जेट एयरवेज की हालत और पतली हो गई है।
- पहली बार कंपनी दिसंबर में अपनी लोन की उधारी को नहीं चुका पाई।
- फिलहाल 8 हजार करोड़ से ज्यादा की उधारी है।
- इकरा ने कंपनी की रेटिंग को घटाकर के 'डी' से 'सी' कर दिया है।
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विस्तार
देश की प्रमुख एयरलाइन में शुमार जेट एयरवेज की हालत और पतली हो गई है। कंपनी जहां एक बार फिर कर्मचारियों को सैलरी देने में देरी कर रही है। वहीं इसके चलते कई उड़ानों को भी रद्द करना पड़ा है। वहीं पहली बार कंपनी दिसंबर में अपनी लोन की उधारी को नहीं चुका पाई, जिसके चलते उसकी रेटिंग भी घटा दी गई है।
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सितंबर तक कंपनी को लगातार दो तिमाही में नुकसान हुआ था। कंपनी में संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एतिहाद की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी को चालू वर्ष की मार्च तिमाही में 1,036 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जो जून तिमाही में बढ़कर 1,300 करोड़ रुपये पहुंच गया।
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8 हजार करोड़ से ज्यादा की उधारी
नरेश गोयल के स्वामित्व वाली कंपनी पर फिलहाल 8 हजार करोड़ से ज्यादा की उधारी है। कंपनी को अगले दो साल में 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक चुकाने हैं। रेटिंग एजेंसी इकरा के मुताबिक मार्च तक कंपनी को 1700 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2019-20 में 2444.5 करोड़ रुपये और 2020-21 में 2167.9 करोड़ रुपये की देनदारी बैंकों को चुकानी होगी।
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इकरा ने घटाई रेटिंग
इकरा ने कंपनी की रेटिंग को घटाकर के 'डी' से 'सी' कर दिया है। एजेंसी ने कहा है कि जेट लगातार कर्मचारियों को सैलरी भी देरी से दे रही है। वित्तीय संकट से जूझ रही इस निजी एयरलाइन कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई है। यह एक संपूर्ण सेवा विमानन कंपनी है। इसका शेयर दो जुलाई के बाद से 12 प्रतिशत टूट चुका है।
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सितंबर तक कंपनी को लगातार दो तिमाही में नुकसान हुआ था। कंपनी में संयुक्त अरब अमीरात की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एतिहाद की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी को चालू वर्ष की मार्च तिमाही में 1,036 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जो जून तिमाही में बढ़कर 1,300 करोड़ रुपये पहुंच गया।
बिकने के लिए है तैयार
जेट एयरवेज बिकने के लिए तैयार है, लेकिन फिलहाल इसको कोई खरीददार नहीं मिल रहा है। टाटा संस के अलावा नरेश गोयल ने एनआरआई अरबपति एम ए यूसुफाली से आग्रह किया था कि वो इस एयरलाइन को खरीद लें।
इसके साथ ही गोयल ने आबू धाबी की प्रमुख एयरलाइन कंपनी एतिहाद एयरवेज, जो कि दूसरी सबसे बड़ी शेयर होल्डर है, उसको भी अपना शेयर 24 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने को कहा था। अभी गोयल और उनकी पत्नी अनिता की जेट एयरवेज में 51 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसको बेचने के लिए उनको शेयर बाजार में राइट इश्यू लाना पड़ेगा।
इसके साथ ही गोयल ने आबू धाबी की प्रमुख एयरलाइन कंपनी एतिहाद एयरवेज, जो कि दूसरी सबसे बड़ी शेयर होल्डर है, उसको भी अपना शेयर 24 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने को कहा था। अभी गोयल और उनकी पत्नी अनिता की जेट एयरवेज में 51 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसको बेचने के लिए उनको शेयर बाजार में राइट इश्यू लाना पड़ेगा।