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इंफोसिस को झटका, कर चोरी करने पर चुकाना होगा 5.6 करोड़ का जुर्माना

Wed, 18 Dec 2019 01:39 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 18 Dec 2019 01:39 PM IST
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infosys to pay california 8 lakh dollars over tax fraud, workers visa

देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस को अमेरिका के कैलिफोर्निया में कर चोरी के आरोप में आठ लाख डॉलर (5.6 करोड़ रुपये) चुकाने होंगे। कंपनी पर आरोप है कि उसने 2006 से 2017 के बीच 500 कर्मचारियों को गलत वीजा पर रखा था, जिससे उसने टैक्स बचाया था। कंपनी सेटलमेंट करने के लिए यह जुर्माना चुकाएगी। 

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बी-1 वीजा पर काम कर रहे थे कर्मचारी

कंपनी के 500 कर्मचारी एच-1बी वीजा के बजाए बी-1 वीजा पर कैलिफोर्निया में कार्य कर रहे थे। इनमें बेरोजगारी बीमा, अक्षमता बीमा और रोजगार प्रशिक्षण कर शामिल हैं। अटॉर्नी जनरल बेसरा ने कहा कि इन्फोसिस के सेटलमेंट के फैसले से पता चलता है कि कैलिफोर्निया के कानून से बचने की कोशिश नाकाम रही।

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कम भुगतान करने और टैक्स बचाने के लिए कंपनी गलत वीजा पर कर्मचारियों को लाई। हालांकि, इंफोसिस ने आरोपों से इनकार किया है। उसका कहना है कि 13 साल पुराने इस मामले में समय-पैसा बचाने और लंबी मुकदमेबाजी टालने के लिए सेटलमेंट का फैसला किया।
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शेयरधारकों के अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाने वाली लॉस एंजिल्स की कंपनी शॉल लॉ फर्म ने वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में इंफोसिस के खिलाफ क्लास एक्शन सूट दाखिल करने की घोषणा की है। क्लास एक्शन सूट में कई लोगों के समूह का प्रतिनिधित्व किया जाता है।

कंपनी ने राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया

शिकायत के मुताबिक, इंफोसिस ने अल्प कालिक मुनाफा बढ़ाने के लिए बाजार में गलत और गुमराह करने वाले बयान जारी किए। साथ ही अनुचित रूप से राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। लगभग एक महीने पहले एक व्हिसलब्लोअर ने इंफोसिस और उसके सीईओ सलिल पारेख के खिलाफ शिकायत करके ऐसे ही कई आरोप लगाए थे। हालांकि कंपनी ने सभी आरोप खारिज करते हुए कहा था कि उसे जांच में कोई सबूत नहीं मिले।

लॉ फर्म ने दिया बयान

अमेरिका में हुई शिकायत में कहा गया कि सीईओ पारेख ने खातों की जांच से बचने के लिए बड़े सौदों की मानक समीक्षा से परहेज किया। वास्तव में कंपनी के वित्त विभाग पर इन सौदों और लेखा परीक्षकों व कंपनी के बोर्ड के निदेशकों से संबंधित अन्य मुद्दों से जुड़ा विवरण छिपाने के लिए दबाव बनाया गया था। लॉ फर्म ने एक बयान में कहा, ‘इन तथ्यों के आधार पर कंपनी के सार्वजनिक बयान गलत थे और गुमराह करने वाले थे। जब तक बाजार को हकीकत के बारे में पता चलता निवेशकों को खासा नुकसान हो चुका था।’

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