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इंडिगो एयरलाइंस के बोर्ड की अहम बैठक, सरकार भी रखेगी निगाह

Fri, 19 Jul 2019 10:23 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 19 Jul 2019 10:23 AM IST
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indigo airlines board meeting today, government too keep its eye on it

इंडिगो एयरलाइंस को चलाने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के बोर्ड की आज अहम बैठक होने जा रही है। बोर्ड की इस बैठक पर सरकार भी निगाह बनाए रखेगी। गौरतलब है कि कंपनी के प्रमोटर राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच मतभेद सार्वजनिक तौर पर लोगों के बीच आ चुके हैं। 

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मंत्रालय ने मांगा स्पष्टीकरण

कंपनी मामलों के मंत्रालय ने भी कंपनी से 10 दिनों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की चूक के मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार ने कंपनी कानून-2013 की धारा 206(चार) के तहत स्पष्टीकरण मांगा है।गंगवाल ने इसके बारे में पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड से शिकायत की थी। उन्होंने इस शिकायत की प्रतियां मंत्रालय और कंपनी मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण तथा अन्य को भी भेजी थी।

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पान की दुकान कहने से बढ़ा विवाद

सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो के प्रवर्तकों में बढ़ते विवाद के बीच कॉर्पोरेट मंत्रालय और बाजार नियामक सेबी ने कंपनी संचालन की खामियों व अन्य उल्लंघन के आरोपों की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तकों में एक राकेश गंगवाल ने संचालन खामियों का आरोप लगा सेबी से दखल देने की मांग की थी। गंगवाल ने कहा था इससे बढ़िया तो पान की दुकान चल सकती है। हालांकि बाद में भाटिया ने कहा था पान की दुकान (इंडिगो) काफी अच्छी चल रही है। 

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कंपनी संचालन में खामी, निष्पक्ष व्यवसाय के नियमों और भेदिया कारोबार रोधी नियमों के उल्लंघन के आरोपों का सामना कर रही है। लिहाजा कंपनी प्रवर्तकों से जुड़ी इकाईयों और निदेशक मंडल के सदस्यों से जुड़ी हरेक इकाईयों की जांच की जा रही है।

मंत्रालय इस बात की जांच करेगा कि ज्ञापन, लेख, समझौते और समाधान कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप हैं या नहीं। यदि कंपनी अधिनियम का उल्लंघन किया गया होगा तो उसे कड़ी नियामकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इसमें मौजूदा समझौतों को समाप्त कर नई व्यवस्था देना भी शामिल है। फिलहाल मंत्रालय और सेबी ने 19 जुलाई तक जवाब मांगा है।

गंगवाल ने कारोबार बेचने का प्रयास किया : भाटिया

कंपनी के दूसरे प्रवर्तक राहुल भाटिया समूह का कहना है कि राकेश गंगवाल ने अपने वित्तीय जोखिमों को सीमित कर दिया था। साथ ही कंपनी संचालन में अप्रत्याशित विवाद पैदा करने के लिए कपट का सहारा लिया। जब भी कंपनी को जरूरत थी, वह उपलब्ध नहीं हुए और उन्होंने कारोबार को बेचने का भी प्रयास किया। बता दें कि इंडिगो में 37 फीसदी हिस्सेदारी राकेश गंगवाल की है जबकि राहुल भाटिया समूह की 38 फीसदी हिस्सेदारी है। 

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