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विदेशी कोयला खनन कंपनियों को भारत सरकार दे सकती है 10 फीसदी की छूट

Tue, 19 Nov 2019 01:07 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Tue, 19 Nov 2019 01:07 PM IST
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India may relax norms to attract global coal miners

भारत सरकार कोयला खनन क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा विदेशी कंपनियों को लुभाने के लिए नियमों को लचीला बनाने पर विचार कर रही है। इस क्रम में सरकार कोयला क्षेत्र में पहली बार विदेशी कंपनियों को अग्रिम भुगतान में कमी और बड़े खनन ब्लॉक की पेशकश कर सकती है। हालांकि उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि दिग्गज वैश्विक कंपनियों को लुभाने के  लिए यह पर्याप्त नहीं होगा। 

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इससे पहले अगस्त में ऐसी खबरें आई थीं कि सरकार की 2019 के अंत तक कोयला खनन ब्लॉक के लिए पहली बार वैश्विक निविदा जारी किए जाने की योजना है, जिससे इस ईंधन पर कोल इंडिया का एकाधिकार खत्म हो सकता है। देश के कोयला आयात में कमी लाने के उद्देश्य जारी होने वाली निविदाओं में ग्लेनकोर पीएलसी, बीएचपी ग्रुप, एंग्लो इंडियन अमेरिकन पीएलसी और पीबॉडी एनर्जी कॉर्प जैसी वैश्विक खनन कंपनियां भाग ले सकती हैं।
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कोयला मंत्रालय में अवर सचिव विनोद कुमार तिवारी ने बताया कि सरकार आवंटित किए जाने वाले ब्लॉकों के अनुमानित मूल्य की तुलना में अग्रिम भुगतान में लगभग 10 फीसदी की कमी कर सकती है। तिवारी ने कहा, ‘हम इसमें कमी लाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इसमें कितनी कमी होगी, इसके बारे में पक्के तौर पर कछ नहीं कहा जा सकता है।’
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कोयला मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि नीलामी की तारीख अभी तय नहीं हुई है और शीर्ष सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक के बाद ही अंतिम रोडमैप तैयार किया जाएगा। कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने अक्तूबर में कहा था कि सरकार बोलीदाताओं के लिए कोयला ब्लॉकों को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए निवेश पर भी विचार कर रही है और कोयला उद्योग में निवेशकों को लुभाने के लिए नीति तैयार कर रही है। 

अक्तूबर में 27 में से छह ब्लॉक ही हुए थे नीलाम

अक्तूबर में हुई कोयला खदानों की नीलामी में घरेलू कंपनियों की तरफ से सुस्त प्रतिक्रिया मिली थी, जिनमें 27 में से 21 ब्लॉक ऐसे रहे जिनके लिए जरूरी न्यूनतम तीन बोलियां भी नहीं मिल सकी थीं। इसलिए सिर्फ छह कोयला ब्लॉकों का ही आवंटन हो सका था। उन्होंने कहा, ‘लोग ज्यादा लचीली व्यवस्था की उम्मीद कर रहे थे, इसलिए भागीदारी कम रही। यदि आप भविष्य में कुछ अच्छी पेशकश कर रहे हैं तो लोग इंतजार करेंगे।’ 

अभी तक किसी विदेशी कंपनी ने नहीं दिखाई दिलचस्पी

फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (फिमी) के संयुक्त सचिव बी के भाटिया ने कहा कि अभी तक किसी भी विदेशी कंपनी ने आगामी नीलामी में भाग लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। फिमी देश का सबसे बड़ा माइनिंग लॉबी ग्रुप है, रिओ टिंटो और वेल एसए जैसी विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयां भी इसकी सदस्य हैं। एक बड़ी खनन कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘आप जब तक भारत से बाहर कोयला बेचने की छूट नहीं देते हैं, तब तक बड़ी कंपनियां इसमें दिलचस्पी नहीं लेंगी।’ उन्होंने कहा कि यह निविदाओं पर निर्भर करता है। यदि वे जिद्दी बने रहते हैं, तो बिना मार्जिन मिले कोई भी विदेशी कंपनी काम नहीं करना चाहेगी।

रूस और पोलैंड की कंपनियों के लिए अच्छा मौका

हालांकि रूसी या पॉलिश कंपनियों को यहां पर बढ़त मिल सकती हैं, क्योंकि उन्हें ज्यादा ऐश वाली भूमिगत खदानों में काम करने का खासा अनुभव है। तिवारी ने कहा, ‘रूसी कंपनियां पहले ही भारत में कारोबार के लिए खासी दिलचस्पी दिखा चुकी हैं।’ हालांकि उन्होंने इस निविदा में भारतीय दिग्गज कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के भाग लेने की उम्मीद भी जाहिर की।

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