फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Corporate ›   il&fs top brass done foreign trips to give loan to brass

शीर्ष अधिकारियों ने शौक पूरे करने के लिए ऐसे लगाई आईएलएंडएफएस को चपत

Fri, 07 Jun 2019 08:50 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 07 Jun 2019 08:50 PM IST
विज्ञापन
il&fs top brass done foreign trips to give loan to brass

आईएलएंडएफएस डिफाल्ट मामले की जांच कर रहे गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसआईएफओ) ने बताया है कि कंपनी के पूर्व शीर्ष अधिकारियों ने शौक पूरे करने के लिए फर्जीवाड़े को बढ़ावा दिया। इन अधिकारियों ने विदेश यात्रा, निजी जेट में सफर, हेलीकॉप्टर में घूमने और विदेशी सामानों से घर को सजाने के बदले नियम विरुद्ध कर्ज बांटे। कई ई-मेल की जांच में खुलासा हुआ है कि शीर्ष अधिकारियों की निजी कंपनियों को कर्ज दिलाने में बड़ी भूमिका रही है, जिन्होंने बाद में कर्ज का भुगतान नहीं किया।

विज्ञापन

आईएफआईएन का मामला 'ऊंट के मुंह में जीरे' जैसा 

अधिकारियों ने कहा कि आईएलएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज लि. (आईएफआईएन) का मामला तो समूह के पूरे महाघोटाले के आगे 'ऊंट के मुंह में जीरे' जैसा है। समूह में कुल 90,000 करोड़ रुपये के कर्ज की चूक हुई।  एसएफआईओ के पहले आरोपपत्र में सिर्फ एक इकाई आईएफआईएन का जिक्र है। समूह की मूल कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लि.(आईएलएंडएफएस) और अन्य अनुषंगियों की जांच चल रही है। 

विज्ञापन

नौ सदस्यों ने किया घोटाला

अपने पहले आरोपपत्र में एसएफआईओ ने आईएफआईएन में वित्तीय धोखाधड़ी के पीछे नौ सदस्यों के गिरोह का उल्लेख किया है। एसफआईओ ने धोखाधड़ी में शामिल चौकड़ी के रूप में में रवि पार्थसारथी, हरि शंकरण, अरूण साहा, रमेश बावा, विभव कपूर तथा के रामचंद की पहचान की गयी है। ये सभी आईएलएंडएफएस की विभिन्न कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन में थे। इन लोगों ने कंपनी के ऑडिटरों तथा कुछ स्वतंत्र निदेशकों के साथ मिलकर कंपनी के साथ धोखाधड़ी की और उसे अपनी जागीर की तरह चलाया।

विज्ञापन
विज्ञापन


आईएलएंडएफएस की अनुषंगी आईएफआईएन के मामले की गहन जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया। इसी प्रकार की जांच अन्य समूह की इकाइयों की जांच जारी है।
एसएफआईओ ने कहा कि उसने यह पाया कि आरबीआई ने 2015 के बाद की अपनी जांच रिपोर्ट में आईएफआईएन में समूह कर्ज नियमों का अनुपालन नहीं होने को बार-बार रेखांकित किया। साथ ही अपने स्वामित्व वाले शुद्ध कोष का गलत आकलन किया गया। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का नियमन केंद्रीय बैंक करता है।

होनी चाहिए आंतरिक जांच

हालांकि इस दौरान आईएफआईएन पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया तथा उसे बिना सुधारात्मक कार्रवाई के काम करने दिया गया। एसएफआईओ ने सिफारिश की है कि आरबीआई को मामले में देरी के कारणों का पता लगाने तथा उपयुक्त कार्रवाई के लिये आंतरिक जांच करनी चाहिए। केंद्रीय बैंक से भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिये जरूरी नीतिगत उपाय करने को कहा गया है।

ऑडिटरों के बारे में अपनी सिफारिश में जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) तथा भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) को उपयुक्त प्रावधानों के तहत संबंधित ऑडिटरों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

आईएलएंडएफएस तथा उसकी अनुषंगी इकाइयों द्वारा नकदी की समस्या के कारण बांड के पुनर्भुगतान में चूक के बाद इस बड़े घोटाले का पता पिछले साल चला। मार्च 2018 की स्थिति के अनुसार कंपनी के ऊपर बैंकों तथा अन्य कर्जदाताओं के 90,000 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में आईएल एंड एफएस के निदेशक मंडल को हटाकर नया निदेशक मंडल नियुक्त किया। उदय कोटक इसके कार्यकारी चेयरमैन हैं।



पिछले शुक्रवार को मुंबई में विशेष अदालत के समक्ष दायर आरोपपत्र में एसएफआईओ ने 30 इकाइयों / व्यक्तियों के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी समेत विभिन्न नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाये। इनमें से कुछ लोग पहले से न्यायिक हिरासत में हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed