फिर से शुरू होगी एयर इंडिया की बिक्री के लिए निविदा प्रक्रिया, जीओएम ने दी मंजूरी
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कर्ज में आकंठ डूबी सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को बेचने के लिए गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई वाले मंत्री समूह (जीओएम) ने मंगलवार को सहमति दे दी। मंत्री समूह ने विनिवेश की बोली लगाने के लिए रुचि पत्र (ईओआई) और शेयर खरीद-बिक्री समझौते को भी मंजूरी प्रदान की।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एयर इंडिया के निजीकरण के लिए रुचि पत्र और शेयर खरीद-बिक्री समझौते को इसी महीने जारी कर दिया जाएगा। एयर इंडिया की बिक्री के लिए गठित मंत्रियों के समूह की यह दूसरी बैठक थी। पहली बैठक बीते साल सितंबर में हो चुकी है।
इस दौरान कंपनी के शत प्रतिशत शेयर बेचने के लिए एयर इंडिया स्पेसिफिक अल्टरनेटिव मैकेनिज्म या मंत्रियों के समूह ने प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी। इसमें एयर इंडिया के साथ ही एयर इंडिया एक्सप्रेस और इसके संयुक्त उपक्रम एआई सेट्स में हिस्सेदारी की मंजूरी भी शामिल थी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि मार्च, 2020 तक यह विनिवेश पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
करीब 58 हजार करोड़ के कर्ज में दबी एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2018-19 में 8,400 करोड़ रुपये का जबरदस्त घाटा हुआ है। एयर इंडिया को ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट और विदेशी मुद्रा में घाटे के चलते भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
इन हालातों में एयर इंडिया तेल कंपनियों को ईंधन का बकाया नहीं दे पा रही है। हाल ही में तेल कंपनियों ने ईंधन सप्लाई रोकने की भी धमकी दी थी। लेकिन फिर सरकार के हस्तक्षेप से ईंधन की सप्लाई को दोबारा शुरू कर दिया गया था। केंद्र सरकार, एयर इंडिया में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी को बेचने जा रही है।
पहले से है इतना घाटा
तीन सालों के दौरान एयर इंडिया का घाटा सबसे शीर्ष पर रहा। कंपनी की नेटवर्थ माइनस में 24,893 करोड़ रुपये रही, वहीं नुकसान 53,914 करोड़ रुपये का रहा। भारी उद्योग मंत्री अरविंद गणपत सावंत ने कहा कि पीएसयू विभाग ने रिवाइवल और रिस्ट्रक्चरिंग पर जोर दिया है। सरकार अपनी तरफ से ऐसी कंपनियों में फिर से पैसा कमाने के नए तरीकों पर काम कर रही है।
कंपनी के चेयरमैन ने दिया था ये बयान
हाल ही में कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक अश्विनी लोहानी ने कहा है कि एयर इंडिया के बंद होने की खबरें आधारहीन हैं। उन्होंने कहा था कि एयर इंडिया पहले की ही तरह उड़ान भरती रहेगी और भविष्य में विस्तार भी करेगी। लोहानी ने भरोसा जताया कि यात्रियों, कॉर्पोरेट्स और एजेंटों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। राष्ट्रीय विमानन कंपनी अभी भी देश की सबसे बड़ी कंपनी है।