रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मालविंदर सिंह और शिविंदर सिंह धोखाधड़ी और ठगी के आरोप में गिरफ्तार
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फार्मा कंपनी रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मालविंदर सिंह को भी पुलिस ने देर रात गिरफ्तार कर लिया। मलविंदर सिंह को आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने गुरुवार देर रात पंजाब से पकड़ा है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शिविंदर सिंह को पहले ही धोखाधड़ी और ठगी के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है।
बता दें कि मालविंदर की गिरफ्तारी से पहले फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह समेत चार लोगों को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया।
दिल्ली पुलिस ने रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा मिली शिकायत के आधार पर इनको गिरफ्तार किया। रेलिगेयर का आरोप है कि इन तीनों लोगों ने कंपनी से मिले फंड में हेराफेरी करते हुए उसे बिना जानकारी के डायवर्ट भी किया।
शिविंदर देश की प्रमुख दवा कंपनी रैनबैक्सी के भी प्रमोटर रह चुके हैं।
Economic Offences Wing of the Delhi Police has arrested Ranbaxy's former promoter Shivinder Singh and three others arrested on a complaint given by Religare Enterprises Limited. Religare has accused them of diverting funds and misappropriation. pic.twitter.com/3rZLLOeHwk
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) October 10, 2019
रेलिगेयर के पूर्व सीईओ भी गिरफ्तार
पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें रेलिगेयर के पूर्व सीईओ और प्रबंध निदेशक सुनील गोधवानी, कवि अरोड़ा और अनिल सक्सेना शामिल हैं। इन सभी लोगों पर 740 करोड़ रुपये की हेराफेरी करने का आरोप लगाया था।ईडी ने मारा था छापा
इससे पहले अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय ने सिंह बधुओं, रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सुनिल गोधवानी, आरईएल के कार्यकारी अधिकारी एन के घोषाल, हेमंत ढींगरा से जुड़े सात ठिकानों पर छापेमारी की गई।एजेंसी की ओर से प्रवर्तन मामला जांच रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करने के बाद यह कार्रवाई की गई है। ईसीआईआर पुलिस प्राथमिकी के समान होती है। पिछले साल दिसंबर में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं में ईसीआईआर दर्ज की गई थी।
आरईएल की अनुषंगी कंपनी रेलिगेयर फिनवेस्ट (आरएफएल) ने आर्थिक अपराध शाखा में 740 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी के आरोपों में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में सिंह बंधुओं समेत अन्य लोगों का नाम था।
सिंह बंधुओं ने समूह की दिक्कतों के लिए गोधवानी को जिम्मेदार ठहराया था।