अदालत ने जेट एयरवेज को भेजा नोटिस, यात्रियों को झेलना पड़ रहा है आर्थिक नुकसान
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेट एयरवेज की ओर से अस्थायी रूप से निलंबित की गई उड़ानों से प्रभावित हुए विमान यात्रियों को किराया वापस करने या यात्रा का कोई वैकल्पिक माध्यम सुनिश्चित करने के संबंध में दायर याचिका पर एयरलाइंस को बुधवार को नोटिस जारी किया। याचिका में नागर विमानन मंत्रालय एवं डीजीसीए को निर्देश देने की मांग की गई है।
Delhi High Court issues notice to Jet Airways in a plea seeking full refund of airfare to passengers affected by the suspension of Jet Airways services. Court has also sought reply from DGCA and Ministry of Civil Aviation. Next date of hearing is 16th July. pic.twitter.com/VYx2qR4Cpb
— ANI (@ANI) May 1, 2019
जेट एयरवेज से मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायमूर्ति एजे भंभानी की पीठ ने मामले पर जेट एयरवेज से जवाब मांगने के साथ ही नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से हलफनामा दायर करने को भी कहा है। उच्च न्यायालय ने मामले पर अगली सुनवाई 16 जुलाई को तय की है।
अदालत के ये निर्देश कार्यक्रता बेजन कुमार मिश्रा की ओर से दायर याचिका पर आए हैं। इसमें कहा गया कि जेट एयरवेज की तरफ से विमान सेवाओं के अचानक निलंबन से यात्रियों के लिए बड़ी संकट पैदा हो गई जिन्हें पूर्व में इसकी सूचना नहीं दी गई थी।
डीजीसीए को दिया ये निर्देश
मंत्रालय एवं डीजीसीए को सभी प्रभावित यात्रियों के हवाई टिकटों के लिए चुकाए गए पूरे किराये की वापसी के साथ ही उचित मुआवजे या गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रा के किसी वैकल्पिक माध्यम को उपलब्ध कराने के लिए शीघ्र निपटान प्रणाली अपनाने का निर्देश देने की मांग की गई है।
यात्रियों को झेलना पड़ रहा है आर्थिक नुकसान
अधिवक्ता शशांक देव सुधी एवं शशि भूषण की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि, 'यह सबको मालूम है कि सभी प्रतिद्वंद्वी एयरलाइंस ने हवाई किराए बहुत ज्यादा बढ़ा दिए हैं और असहाय यात्रियों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है बल्कि बहुत ज्यादा मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।'
मीडिया की खबर के हवाले से इसमें कहा गया है कि टिकट के पैसे वापस नहीं होने की वजह से यात्रियों की 360 करोड़ रुपये से अधिक राशि फंस गई है।