कोरोना संकट: आर्थिक सुस्ती से भारतीय कंपनियों और बैंकिंग तंत्र पर बढ़ेगा जोखिम
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कोरोना वायरस से ठप पड़ी औद्योगिक गतिविधियों का भारतीय कंपनियों और बैंकिंग तंत्र पर गहरा असर पड़ेगा। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने बृहस्पतिवार को बताया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 20% गैर वित्तीय कंपनियां बंद हो सकती हैं। मूडीज ने भारतीय बैंकों का परिदृश्य घटाकर निगेटिव कर दिया है।
मूडीज इन्वेस्टर सर्विसेज ने रिपोर्ट में कहा, महामारी से गैर वित्तीय क्षेत्र की 20% कंपनियों को ऊंचे जोखिम का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि ये उपभोक्ता मांग में आ रहे बदलाव और वैश्विक यात्रा पर लगे अंकुश को सहन नहीं कर सकेंगे।
इनकी ऋण गुणवत्ता कमजोर पड़ सकती है। इसके अलावा, 27% कंपनियों को वित्त पोषण की परेशानियों से जूझना पड़ेगा, सिर्फ 36% कंपनियां ही मौजूदा संकट से उबरने में कामयाब होंगी। एयरलाइन, ऑटो, वाहन कलपुर्जे, तेल एवं गैस, गेमिंग, पोत परिवहन, खुदरा और होटल क्षेत्र पर सबसे असर होगा। मूडीज ने कहा, कॉरपोरेट, छोटे एवं मझोले उद्योगों और खुदरा क्षेत्र में गिरावट से बैंकों की पूंजी और मुनाफे पर भी असर होगा।
इससे बैंकों की संपत्तियों की गुणवत्ता घटेगी। लिहाजा भारतीय बैंकों के परिदृश्य को स्थिर से घटाकर नकारात्मक किया जा रहा है। आर्थिक गतिविधियों में तेज गिरावट और बेरोजगारी बढ़ने से कंपनियों के साथ नागरिकों की माली हालत खराब होगी जिससे बैंकों पर दबाव बढ़ेगा।
भारतीय कंपनियों का ऋण अनुपात तीन साल में सबसे कम
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि भारतीय कंपनियों का ऋण अनुपात चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। ऋण अनुपात का मतलब किसी कंपनी की आय के सापेक्ष उसके कर्ज दायित्व से है।
सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक क्रेडिट रेशियो 0.77% हो गया, जो पहले छह महीने 1.21% था। इसी अवधि में आय के मुकाबले कर्ज की खपत 0.25% से 1.24% हो गई। देश में 35 औद्योगिक क्षेत्रों पर 23 लाख करोड़ का कर्ज है।
लॉकडाउन से रोजाना 35.38 हजार करोड़ का नुकसान
कोरोना संकट से जारी लॉकडाउन से रोजाना 35.38 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। एक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च लिमिटेड ने बताया कि कारोबार ठप होने और यातायात व हवाई सेवा बंद होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को 21 दिन के लॉकडाउन में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
रेटिंग एजेंसी के अनुसार, 2020-21 में विकास दर 2 से 3 फीसदी तक रह सकती है, जिसमें थोड़ा बहुत सुधार दूसरी छमाही में ही आने की उम्मीद है।