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रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स: जल्द मामला निपटाना चाहती है केयर्न एनर्जी, मुआवजा और ब्याज भी छोड़ सकती है कंपनी

Wed, 11 Aug 2021 04:16 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Wed, 11 Aug 2021 04:16 PM IST
सार

केयर्न एनर्जी के शीर्ष कार्यकारी प्रतिनिधि इस सप्ताह वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं। कंपनी जल्द रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के मामले को निपटाना चाहती है।

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Cairn energy Want To Settle Retrospective Tax Issue Soon  executives may meet government officials
टैक्स - फोटो : pixabay

विस्तार

ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी के शीर्ष कार्यकारी प्रतिनिधि टैक्स मामले के सेटलमेंट को लेकर इस सप्ताह वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं। पूर्ववर्ती कर (रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स) वसूली खत्म करने के लिए कर कानून में हुए संशोधन लागू होने के कुछ दिन बाद केयर्न के प्रतिनिधियों की वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की बात सामने आई है। हाल ही में लोकसभा में 'कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2021' पेश किया गया था।

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अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने केयर्न के पक्ष में सुनाया था फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के मामले के निपटारे के लिए यह मीटिंग हो सकती है। इससे पहले केयर्न एनर्जी ने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स के तौर पर वसूली गई रकम वापस पाने के लिए कई विदेशी मध्यस्थता अदालतों का दरवाजा भी खटखटाया था। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत ने 1.2 अरब डॉलर के पूर्व प्रभावी कर मामले में ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी के पक्ष में फैसला सुनाया और भारत सरकार को ब्याज और अदालती खर्च सहित रकम लौटाने का आदेश दिया था। 
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सरकार से केवल प्रिंसिपल अमाउंट मांग सकती है कंपनी
सूत्रों के अनुसार, ब्रिटिश कंपनी जल्द से जल्द मामले को निपटाना चाहती है। इसके लिए वह सरकार से केवल प्रिंसिपल अमाउंट यानी वह रकम मांग सकती है जो उससे रेट्रोस्पेक्टिव कर के तौर पर वसूल की गई थी। एक अन्य सूत्र के मुताबिक, केयर्न पहले भी सरकार के सामने यह प्रस्ताव रख चुकी है।
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क्या है पूरा मामला?
केयर्न एनर्जी ने 2007 में भारतीय इकाई केयर्न इंडिया को सूचीबद्ध कराया। केयर्न एनर्जी ने 2011 में कंपनी की 10 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखकर शेष हिस्सा वेदांता लिमिटेड को बेच दिया था। आयकर विभाग ने 2012 में नियमों में बदलाव कर पूर्व प्रभावी कर लगाते हुए मार्च, 2015 में कंपनी से 10,247 करोड़ का पूंजीगत लाभ कर मांगा। इसकी वसूली के लिए सरकार ने वेदांता में केयर्न की पांच फीसदी हिस्सेदारी बेच दी और 1,140 करोड़ का लाभांश व 1,590 करोड़ का टैक्स रिफंड भी जब्त कर लिया। इसके बाद कंपनी ने 2015 में भारत सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में अपील की थी।

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