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भारती एयरटेल बन जाएगी विदेशी कंपनी, सरकार ने दी 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी
Tue, 21 Jan 2020 09:25 PM IST
paliwal पालीवाल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: paliwal पालीवाल
Updated Tue, 21 Jan 2020 09:25 PM IST
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भारती एयरटेल
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भारती एयरटेल जल्द ही विदेशी दूरसंचार कंपनी बन जाएगी। केंद्र सरकार ने टेलीकॉम कंपनी को 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) करने की मंजूरी दे दी है। इससे पहले कंपनी में 49 फीसदी हिस्सेदारी विदेशी कंपनियों के पास थी। एयरटेल ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को रिटर्न फाइलिंग में इस बात की जानकारी दी है। भारती एयरटेल को रिजर्व बैंक से भी कंपनी में विदेशी निवेशकों को 74 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखने की अनुमति है।
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शेयर बाजार को दी गयी सूचना के अनुसार, ‘‘भारती एयरटेल लिमिटेड को दूरसंचार विभाग से 20 जनवरी 2020 को विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर कंपनी की चुकता पूंजी के 100 प्रतिशत तक करने की मंजूरी मिल गयी है।’’
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कुछ दिन पहले ही कंपनी ने वैधनिक बकाये के रूप में करीब 35,586 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसमें 21,682 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क और 13,904.01 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम बकाया है। इसमें टेलीनॉर और टाटा टेली के बकाये शामिल नहीं हैं।
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मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों वोडाफोन-आइडिया और भारती-एयरटेल ने अपने पर बकाया करीब 92 हजार करोड़ रुपये समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का भुगतान करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मोहलत मांगी है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कंपनियों ने बताया कि भुगतान का समय तय करने को लेकर उनकी सरकार से वार्ता जारी है। इस पर कोर्ट ने एक हफ्ते बाद सुनवाई का आदेश दिया है।
इन कंपनियों पर एजीआर और ब्याज को मिलाकर बकाया रकम बढ़कर करीब 1.47 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। पिछले वर्ष 24 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इन कंपनियों को तीन महीने के भीतर एजीआर की रकम जमा करने का आदेश दिया था। वहीं बीती 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं को भी खारिज कर दिया था।
मौजूदा याचिका में कंपनियों की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, एनके कौल और सीए सुंदरम ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष 24 अक्तूबर के आदेश में बदलाव करने की गुहार लगाई है। साथ्थही जल्द सुनवाई की मांग की है।
उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने एजीआर जमा करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया था। यह अवधि आगामी बृहस्पतिवार को खत्म हो रही है। दूसरी ओर भुगतान के समय को लेकर केंद्र सरकार से उनकी बातचीत भी चल रही है। वे मूल मसले को चुनौती नहीं दे रहे हैं।
वोडाफोन ने अपनी याचिका में कहा है कि पिछले कुछ वर्षों से उसे भारी घाटे हुआ है। वह एक मुश्त में इतनी बकाया रकम चुकाता है तो उसकेहजारों कर्मचारियों व लाखों उपभोक्तओं पर बुरा असर हो सकता है। 24 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने इन कंपनियों को 90 दिन में बकाया 92,000 करोड़ रुपये बतौर एजीआर जमा करने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने कहा था कि एजीआर की गणना करने में नॉन-कोर आइटम को भी शामिल किया जाना चाहिए।