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आप भी हैं वर्किंग वुमेन, आने वाले साल में मिलेंगे ये फायदे

Sun, 06 Mar 2016 03:37 AM IST
Updated Sun, 06 Mar 2016 03:37 AM IST
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कामकाजी महिलाओं के मां बनने के बाद की नौकरी आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार 50 से अधिक कर्मचारी वाले सभी कंपनियों के लिए क्रेच की व्यवस्था अनिवार्य बनाएगी।

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रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं को प्रोत्साहित करने और कामकाजी माताओं की सुविधा के लिए कंपनियों को दफ्तर से अधिकतम एक किलोमीटर के दायरे में क्रेच की व्यवस्था करनी होगी।
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वहीं एक से अधिक कंपनियां मिलकर 500 मीटर के दायरे में क्रेच पूल की व्यवस्था भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं कामकाजी माताओं के लिए साढे छह महीने की पेड लीव के साथ करीब दो साल तक घर से काम करने की सुविधा का भी प्रस्ताव किया गया है। श्रम व रोजगार मंत्रालय ने इस बावत कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है।

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बढ़ने वाला है मातृत्व अवकाश

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श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि क्रेच की अनिवार्यता 50 कर्मचारी वाले सभी कंपनी या कारखाने पर लागू होगी। फिर चाहे इनमें महिलाओं की संख्या एक अंकों में ही सिमटी हुई क्यों न हो। यही वजह है कि कंपनियों को क्रेच पूल करने का सुझाव भी दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि श्रम मंत्रालय की ओर से मेटरनिटी बेनिफिट एक्ट में संशोधन से संबंधित तैयार किये गए कैबिनेट नोट के मुताबिक सरकार न केवल मातृत्व अवकाश के महीनों को बढ़ाने जा रही है बल्कि महिलाओं को साढ़े छह माह तक वेतन के साथ अनिवार्य मातृत्व अवकाश के बाद करीब दो वर्ष तक घर से काम करने की छूट देने का प्रस्ताव भी किया गया है।

हालांकि इस सुविधा के लिए नियोक्ता और कर्मचारी के बीच आम सहमति होना जरूरी है। अगर कर्मचारी के कांट्रेक्ट में घर से काम करने की सुविधा पहले से शामिल है तो महिला कर्मचारी इसका बेझिझक इस्तेमाल कर सकती हैं।

वैज्ञानिक कारणों का हवाला

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महत्वपूर्ण यह है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से सात महीनों के मातृत्व अवकाश के प्रस्ताव को श्रम मंत्रालय ने खारिज करने के पीछे वैज्ञानिक कारणों का हवाला भी दिया है।

श्रम मंत्रालय की दलील है कि जन्म से छह माह तक बच्चों का स्तनपान जरूरी होता है। इसलिए छुट्टी की सीमा छह माह तक ही होनी चाहिए। इसके बाद के 15 दिनों को महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रुप से तैयार होने के लिए दिया जा रहा है।

इस संदर्भ में हाल के दिनों में मंत्रालय ने नियोक्ता संगठन और कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक की थी। बैठक में गर्भवती महिलाओं को स्तनपान के अनिवार्य महीनों तक ही छुट्टी देने पर सहमति जताई गई। इसलिए साढ़े छह माह के बाद घर से काम या फिर कामकाज स्थल पर क्रिच की व्यवस्था को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है।

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