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DHFL के लिए सर्वाधिक रही अडाणी की बोली, अमेरिकी कंपनी को भी छोड़ा पीछे

Sat, 28 Nov 2020 04:01 PM IST
‌डिंपल अलवधी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sat, 28 Nov 2020 04:01 PM IST
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Adani Bid For housing lender DHFL is highest with 33000 crore rupees offer
आवास वित्त कंपनी डीएचएफएल - फोटो : Amar ujala

उद्योगपति गौतम अडाणी की अगुवाई वाले विभिन्न कारोबार से जुड़े समूह ने संकट में फंसी आवास वित्त कंपनी डीएचएफएल के लिए 33,000 करोड़ रुपये की बोली लगाकर अमेरिकी की ओकट्री को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि प्रतिद्वंद्वी बोलीदाताओं का कहना है कि समूह ने कथित रूप से समयसीमा का पालन नहीं किया, अत: वह बोली से हटे। 

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चार कंपनियों ने अक्तूबर में लगाई थी बोलियां 
अडाणी समूह ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि उसने पूरी प्रक्रिया अपनाई और अन्य बोलीदाता साठगांठ कर अधिकतम मूल्य वाली बोली को रोकना चाहते हैं। डीएचएफएल को कर्ज देने वाले संस्थानों और उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि चार इकाइयों अडाणी समूह, पीरामल समूह, अमेरिकी संपत्ति प्रबंधन कंपनी ओकट्री कैपिटल मैनेजमेंट तथा हांगकांग की एससी लोवी ने अक्तूबर में डीएचएफएल के लिए बोलियां लगाई थी। 
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हालांकि बकाया कर्ज की वसूली के लिए डीएचएफएल की नीलामी कर रहे कर्जदाता चाहते थे कि संभावित खरीदार अपनी बोलियों को संशोधित करें क्योंकि मूल पेशकश काफी कम थी। एक सूत्र के अनुसार अडाणी समूह ने शुरू में डीएएफएल के थोक तथा स्लम रिहैबिलिटेशन ऑथोरिटी (एसआरए) पोर्टफोलियो के लिए ही बोली लगाई थी। लेकिन 17 नवंबर को संशोधित पेशकश में पूरी संपत्ति के लिए बोली लगाई। उसने इसके तहत 30,000 करोड़ रुपये के साथ 3,000 ब्याज की पेशकश की। 
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अन्य कंपनियों ने इतनी लगाई कीमत
यह ओकट्री की 28,300 करोड़ रुपये की पेशकश से अधिक थी। अमेरिकी कंपनी की बोली इस शर्त पर थी कि वह बीमा दावों को लेकर 1,000 करोड़ रुपये अपने पास रखेगी। सूत्रों के अनुसार पीरामल ने डीएचएफएल के खुदरा संपत्ति के लिए 23,500 करोड़ रुपये जबकि एस सी लोवी ने 2,350 करोड़ रुपये की बोली एसआरए के लिए लगाई थी। 

अडाणी ने किया आरोपों को खारिज
सूत्र के अनुसार अन्य बोलीदाताओं ने कहा कि अडाणी की बोली समयसीमा समाप्त होने के बाद आई और उसे अपात्र घोषित किए जाने की मांग की है। हालांकि अडाणी ने इस आरोप को खारिज करते हुए बिक्री को देख रहे डीएचएफएल प्रशासक को विस्तृत पत्र लिखा है। इसमें समूह ने कहा कि उसने मूल रूप से पूरे कारोबार तथा थोक एवं एसआरए पोर्टफोलियो के लिए रुचि पत्र जमा किया था। 


सूत्रों का कहना है कि 22 नवंबर के पत्र में कहा गया है कि अक्तूबर में लगाई बोली केवल थोक और एसआरए संपत्ति के लिए थी क्योंकि उसे उम्मीद थी कि वह पीरामल समूह के साथ सौदा हासिल कर लेगा। पीरामल समूह ने केवल खुदरा संपत्ति के लिए बोली लगाई थी। लेकिन नौ नवंबर को जब बोलियां खोली गई, अडाणी ने पाया कि प्रतिद्वंद्वी बोलीदाताओं की बोलियां कंपनी के मूल्य को प्रतिबिंबित नहीं करती और उसने पूरी संपत्ति के लिए बोली लगाने का निर्णय किया। पत्र में अडाणी समूह ने कहा कि उसकी बोली 17 नवंबर को सुबह 10 बजे से पहले जमा हुई और यह बोली दस्तावेज के अनुरूप है।

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