{"_id":"5bce4d7bbdec226939027e8e","slug":"cgsi-demanded-to-make-laws-for-e-commerce-like-rera-act-from-central-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीजीएसआई ने केंद्र सरकार से की रेरा की तरह ई-कॉमर्स के लिए कानून बनाने की मांग","category":{"title":"Business","title_hn":"कारोबार","slug":"business"}}
सीजीएसआई ने केंद्र सरकार से की रेरा की तरह ई-कॉमर्स के लिए कानून बनाने की मांग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 23 Oct 2018 03:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रियल एस्टेट क्षेत्र के रेरा अधिनियम की तर्ज पर भारतीय ई-कॉमर्स बाजार के लिए भी कानून बनाए जाने की मांग केंद्र सरकार से की गई है। उपभोक्ता एवं खाद्य मंत्रालय से भारतीय उपभोक्ता मार्गदर्शन सोसाइटी (सीजीएसआई) ने यह कानून बनाने की सिफारिश की है। इसमें ऑनलाइन बाजार के लुभावने विज्ञापनों की निगरानी किए जाने के लिए भी कहा गया है। ताकि कैशबैक, छूट और खरीदे गए सामान के साथ तोहफा देने वाले फर्जी ऑफर पर लगाम कसी जा सके।
विज्ञापन
प्रति वर्ष 30 फीसदी बढ़ रहा है ई-कॉमर्स बाजार
उपभोक्ता मंत्रालय से सीजीएसआई ने कहा है कि ई-कॉमर्स कंपनियों के नियमन के लिए रेरा की ही तरह एक ऑनलाइन वाणिज्य नियामक प्राधिकरण (ओसीआरए) का गठन कर नए कानून बनाए जाएं। ऑनलाइन विक्रेताओं के पंजीकरण, उनकी बिक्री का उचित लेखांकन तथा सख्त गुणवत्ता नियंत्रण के कुछ फायदे हैं, जो स्वचालित रूप से ओसीआरए से होंगे। ई-कॉमर्स बाजार प्रति वर्ष 30 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा है, जो 2026 तक 20 हजार करोड़ रुपये का होने की उम्मीद है। ऐसे में ऑनलाइन उपभोक्ताओं को धोखे से बचाने, कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने और समय के साथ जरूरी बदलाव करने से इस क्षेत्र का बाजार बेहतर होगा।
विज्ञापन
2017 में लगी शिकायतों की झड़ी
सीजीएसआई ने कहा है कि उनके विज्ञापनों में अक्सर जो पेशकश होती है, वह हकीकत से कोसों दूर होती है। सीजीसीआई को 2017 में ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ काफी शिकायतें मिलीं। इनमें अमेजन के खिलाफ 13.86 फीसदी, फ्लिपकार्ट के खिलाफ 12.87 फीसदी, पेटीएम के खिलाफ 11.55 फीसदी, स्नैपडील के खिलाफ 7.59 फीसदी और ई-बे के खिलाफ 7.26 फीसदी शिकायतें रही।
विज्ञापन
विज्ञापनों समेत कई पहलुओं पर होगी नजर
सीजीएसआई के मुताबिक ओसीआरए ई-कॉमर्स नीति से पूरी तरह अलग है। केंद्र द्वारा प्रस्तावित नीति के तहत स्वतंत्र नियामक शिकायतों के निपटारे के लिए काम करेगा। साथ ही वह एफडीआई निर्धारण के अनुपालन से भी निपटेगा, जबकि सीजीसीआई ने सभी ई-कॉमर्स खुदरा विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के पंजीकरण से निपटने के लिए ओसीआरए का प्रस्ताव दिया है। साथ ही विज्ञापनों के नियंत्रण की सिफारिशें भी की गई है। उसका कहना है कि ओसीआरए के तहत तय प्रक्रिया लाकर उपभोक्ताओं शिकायतों में ई-कॉमर्स कंपनियों के भाग लेने और विभिन्न स्तरों पर धोखाधड़ी से बचने के लिए उत्तरदायी बनाएगा।
गौरतलब है कि प्रस्तावित कानून में समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करना, पारदर्शी रिफंड प्रणाली, बिक्री के बाद की सेवाएं, पोस्ट बिक्री वारंटी लागू करना, उपभोक्ता संरक्षण कोष की स्थापना और ऑनलाइन अदालतों के गठन के लिए भी प्रावधान होगा।