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जीएसटी में न कराया माइग्रेशन तो बंद होगा कारोबार
amarujala.com- Presented by: आनंद
Updated Fri, 02 Jun 2017 12:49 PM IST
सार
0 जीएसटीएन पोर्टल पर माइग्रेशन के लिए व्यापारियों को 15 जून तक का मौका
0 प्रदेश में आठ लाख 33 हजार 290 में से मात्र 75179 ने कराया है माइग्रेशन
0 विभाग ने पांच लाख 77 हजार 386 व्यापारियों की एक्टिवेट कराई है आईडी
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विस्तार
इलाहाबाद। सरकार ने व्यापारियों को जीएसटी में माइग्रेशन के लिए अंतिम मौका दिया है। इसके लिए जीएसटी एनरोलमेंट विंडो को 15 जून तक के लिए खोला गया है। जिन व्यापारियों ने इस अवधि में माइग्रेशन न कराया, एक जुलाई से प्रस्तावित जीएसटी के तहत उनके लिए कारोबार करना मुश्किल होगा। वाणिज्य कर मुख्यालय में एडीशनल कमिश्नर जीएसटी विवेक कुमार ने इस संबंध में बृहस्पतिवार को प्रदेश के सभी जोनल एडीशनल कमिशनर को शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कराने के लिए निर्देश भी दिए हैं।
वाणिज्य कर विभाग में रजिस्टर्ड व्यापारियों के जीएसटी में माइग्रेशन कराने की प्रक्रिया पूरे प्रदेश में काफी धीमी है। अकेले इलाहाबाद जोन में तकरीबन 36 हजार व्यापारियों में से 26 फीसदी ने अब तक माइग्रेशन नहीं कराया। प्रदेश स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है। 30 मई तक प्रदेश में कुल आठ लाख 33 हजार 290 रजिस्टर्ड व्यापारियों में से सात लाख 69 हजार 827 को आईडी एवं पासवर्ड भेजे जा चुके हैं, जिसमें से पांच लाख 77 हजार 386 व्यापारियों की आईडी एक्टिव भी हो चुकी है लेकिन अब तक मात्र 75179 व्यापारियों ने ही जीएसटी में पूरी तरह माइग्रेशन कराया है।
एडीशनल कमिश्नर ने सभी जोनल एडीशनल कमिश्नर से कहा है कि वे व्यापारियों को अवगत करा दें कि एनरोलमेंट फॉर्म पूर्ण करके फाइल करने के लिए नियम 17 के तहत जीएसटी लागू होने की तिथि से तीन माह का समय उपलब्ध होगा। एनरोलमेंट फॉर्म फाइल न करने की दशा में जीएसटी पोर्टल पर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के विवरण उपलब्ध नहीं होंगे। इसके अभाव में एक जुलाई से व्यापारी जीएसटी पोर्टल पर न ही किसी प्रकार का फॉर्म फाइल कर सकेंगे न ही कारोबार कर सकेंगे। ऐसे में व्यापारियों को जीएसटी में माइग्रेशन कराना अनिवार्य है।
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जीएसटी पोर्टल धीमा चलने से दिक्कत
तिथि बढ़ाने के बाद जीएसटी में माइग्रेशन की शुरूआत एक जून से हुई लेकिन पहले ही दिन जीएसटीएन पोर्टल की रफ्तार बेहद धीमी रही। काफी व्यापारी कागजातों के साथ अपने खंड कार्यालयों में माइग्रेशन कराने पहुंचे। इस दौरान पोर्टल पर एक पेज भरने के बाद दूसरा खोलने में आधा से एक घंटे तक का समय लगा। इसकी वजह से व्यापारियों, अधिवक्ताओं के साथ अफसरों की भी परेशानी बढ़ गई है।
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वाणिज्य कर विभाग में रजिस्टर्ड व्यापारियों के जीएसटी में माइग्रेशन कराने की प्रक्रिया पूरे प्रदेश में काफी धीमी है। अकेले इलाहाबाद जोन में तकरीबन 36 हजार व्यापारियों में से 26 फीसदी ने अब तक माइग्रेशन नहीं कराया। प्रदेश स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक है। 30 मई तक प्रदेश में कुल आठ लाख 33 हजार 290 रजिस्टर्ड व्यापारियों में से सात लाख 69 हजार 827 को आईडी एवं पासवर्ड भेजे जा चुके हैं, जिसमें से पांच लाख 77 हजार 386 व्यापारियों की आईडी एक्टिव भी हो चुकी है लेकिन अब तक मात्र 75179 व्यापारियों ने ही जीएसटी में पूरी तरह माइग्रेशन कराया है।
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एडीशनल कमिश्नर ने सभी जोनल एडीशनल कमिश्नर से कहा है कि वे व्यापारियों को अवगत करा दें कि एनरोलमेंट फॉर्म पूर्ण करके फाइल करने के लिए नियम 17 के तहत जीएसटी लागू होने की तिथि से तीन माह का समय उपलब्ध होगा। एनरोलमेंट फॉर्म फाइल न करने की दशा में जीएसटी पोर्टल पर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के विवरण उपलब्ध नहीं होंगे। इसके अभाव में एक जुलाई से व्यापारी जीएसटी पोर्टल पर न ही किसी प्रकार का फॉर्म फाइल कर सकेंगे न ही कारोबार कर सकेंगे। ऐसे में व्यापारियों को जीएसटी में माइग्रेशन कराना अनिवार्य है।
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जीएसटी पोर्टल धीमा चलने से दिक्कत
तिथि बढ़ाने के बाद जीएसटी में माइग्रेशन की शुरूआत एक जून से हुई लेकिन पहले ही दिन जीएसटीएन पोर्टल की रफ्तार बेहद धीमी रही। काफी व्यापारी कागजातों के साथ अपने खंड कार्यालयों में माइग्रेशन कराने पहुंचे। इस दौरान पोर्टल पर एक पेज भरने के बाद दूसरा खोलने में आधा से एक घंटे तक का समय लगा। इसकी वजह से व्यापारियों, अधिवक्ताओं के साथ अफसरों की भी परेशानी बढ़ गई है।