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World Bank: विश्व बैंक ने नए वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी का अनुमान घटाकर 6.3% किया, ADB ने कही ये बात

Tue, 04 Apr 2023 06:12 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 04 Apr 2023 06:12 PM IST
सार

World Bank: रिपोर्ट में कहा गया है, ''कर्ज महंगा होने और आय में धीमी वृद्धि से निजी उपभोग की वृद्धि पर असर पड़ेगा और महामारी से संबंधित राजकोषीय समर्थन उपायों को वापस लेने के कारण सरकारी खपत में भी धीमी वृद्धि का अनुमान है।"

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World Bank cuts India's growth forecast to 6.3 per cent in FY24 said this on inflation
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विस्तार

विश्व बैंक ने मंगलवार को अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2024 में खपत में नरमी के कारण भारत की जीडीपी कम होकर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बता दें कि पहले देश की जीडीपी 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। विश्व बैंक ने अपने इंडिया डेवलपमेंट अपडेट में कहा है कि खपत में धीमी वृद्धि और चुनौतीपूर्ण बाहरी परिस्थितियों के कारण विकास दर के बाधित होने की आशंका है।

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कर्ज महंगा होने और आय में धीमी वृद्धि से प्रभावित हो सकती है जीडीपी

रिपोर्ट में कहा गया है, "कर्ज महंगा होने और आय में धीमी वृद्धि से निजी उपभोग की वृद्धि पर असर पड़ेगा। वहीं, महामारी से संबंधित राजकोषीय समर्थन उपायों को वापस लेने के कारण सरकारी खपत में भी धीमी वृद्धि का अनुमान है।" रिपोर्ट में चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 24 में कम होकर 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है, जो बीते वित्त वर्ष में तीन प्रतिशत था। मुद्रास्फीति पर विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह घटकर 5.2 प्रतिशत रह जाएगी, जो हाल ही में खत्म हुए बीते वित्त वर्ष में 6.6 प्रतिशत थी।
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अमेरिका और यूरोप के बाजार में जारी उथल-पुथल ने भारतीय बाजार के लिए जोखिम पैदा किया

विश्व बैंक के अर्थशास्त्री ध्रुव शर्मा के अनुसार अमेरिका और यूरोप के वित्तीय बाजारों में हालिया उथल-पुथल ने भारत सहित उभरते बाजारों में अल्पकालिक निवेश के प्रवाह के लिए जोखिम पैदा किया है। विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत का सेवा निर्यात अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था इससे अर्थव्यवस्था को बाहरी जोखिमों से बचने में मदद मिलेगी क्योंकि धीमी वैश्विक अर्थव्यवस्था के कारण देश के व्यापारिक निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेवा क्षेत्र का निर्यात अब केवल आईटी सेवाओं से संचालित नहीं किया जा रहा है, बल्कि परामर्श और अनुसंधान और विकास जैसे अधिक आकर्षक प्रस्तावों से भी ये सचालित हो रहे हैं।
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एडीबी ने भी विकास दर का अनुमान घटाया
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने मंगलवार को कहा कि कड़ी मौद्रिक स्थिति और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि मार्च 2023 को समाप्त वित्त वर्ष में इसमें  6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, एडीबी को उम्मीद है कि परिवहन के बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार के लिए सरकारी नीतियों के कारण निजी खपत और निजी निवेश से वित्त वर्ष 25 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रह सकती है।

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