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मानसून पर टिकी सरकार की नजरें, जानिए क्यों अच्छी अर्थव्यवस्था के लिए है जरूरी

Wed, 19 Jun 2019 04:30 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 19 Jun 2019 04:30 PM IST
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why a good monsoon is necessary for a sound indian economy

अच्छे मानसून से ही देश की अर्थव्यवस्था सही गति में चलती है। हालांकि इस बार इसकी उम्मीद काफी कम है, क्योंकि मानसून की चाल फिलहाल काफी धीमी है। अभी तक देश में 44 फीसदी कम बारिश हुई है। इससे सूखा पड़ने की आशंका गहराती जा रही है। वहीं इसका असर खेती पर भी देखने को मिलेगा, क्योंकि अभी तक धान और अन्य पैदा होने वाली फसलों की बुवाई भी शुरू नहीं हो पाई है। 

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मानसून की धीमी चाल ने देश के कई हिस्सों में बारिश के इंतजार को और बढ़ा दिया है। आमतौर पर अभी तक देश के दो तिहाई हिस्सों में मानसून पहुंच जाता है लेकिन इस बार मानसून केवल 12 से 15 फीसदी हिस्से में ही पहुंच पाया है। 
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अभी तक मानसून केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और उत्तर पूर्व के कुछ राज्यों तक ही पहुंच पाया है। इस कारण सूखे की समस्या का सामना कर रहे लोगों की चिंताए भी बढ़ गई है। पानी की कमी से जूझ रहे महाराष्ट्र में मानसून अपने तय समय से 15 दिन की देरी से 25 जून तक राज्य के अधिकतर हिस्सों में पहुंच जाएगा।

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गांवों में मांग हुई कम

मानसून के देर होने से उपभोक्ता कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। बारिश न होने से किसान गांवों में उपभोक्ता वस्तुओं को कम खरीद रहे हैं। किसानों का मानना है सूखा पड़ने की स्थिति में उनको आगे मार्च तक का खर्चा इन्हीं पैसों से चलाना पड़ेगा, जो उन्होंने सर्दियों में फसल की पैदावार बेचने के बाद कमाए थे। 

सरकार के जरूरी है बारिश

केंद्र सरकार के इस बार अच्छी बारिश होना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों से वादा किया था, कि अगले पांच सालों में उनकी आमदनी दोगुनी हो जाएगी। इसी वजह से किसानों के लिए सम्मान निधि और पेंशन योजना को शुरू किया गया था। लेकिन मानसून के कमजोर होने से इस पर सरकार की योजना पर असर पड़ सकता है। 

मानसून की देरी से किसानों के माथे पर बल पड़ता दिखाई दे रहा है। मौजूदा समय में जायद की फसल व जल्द शुरू होने वाली खरीफ की फसल पूरी तरह से प्रभावित होने के आसार हैं। किसानों का मानना है कि प्री-मानसून बरसात न होने से दलहनी फसल बुरी तरह से प्रभावित रही है। धान की फसल पर मानसून से देर से आने का प्रभाव दिखाई देगा। 

बढ़ सकती है महंगाई

कमजोर मानसून से महंगाई बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि पैदावार कम होने से अनाज और सब्जियों की कीमतों पर इसका असर देखने को मिलेगा। इससे भारतीय रिजर्व बैंक भी रेपो रेट में बढ़ोतरी कर सकता है। बैंकों को किसानों का कर्ज माफ करना होगा, जिससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। 

शहरों में पानी की किल्लत

तमिलनाडु के कॉर्पोरेट जगत में भी जल संकट का असर दिखने लगा है। इस बीच, पानी की किल्लत से निपटने के लिए आईटी कंपनियों ने अनोखा तरीका खोज निकाला है। कई कंपनियों ने अपने कर्मियों से घर से ही काम करने को कहा है ताकि दफ्तर में पानी की खपत को कम किया जा सके। कंपनियों में केवल उन कर्मचारियों को बुलाया जा रहा है जिनके बिना काम किसी हालत में नहीं हो सकता।

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