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डॉलर की बादशाहत को मिल रही चुनौती: वैश्विक लेनदेन में युआन का हिस्सा बढ़ा, अमेरिकी कर्ज संकट ने बढ़ाई मुश्किल

Fri, 26 May 2023 04:54 AM IST
गुलाम अहमद वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: गुलाम अहमद Updated Fri, 26 May 2023 04:54 AM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, 2022 की चौथी तिमाही में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा 20 साल के निचले स्तर 58 फीसदी पर आ गया। अब यह और घटकर 1995 के समान स्तर पर आ गया है।

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us dollar facing challenge from chinese yuan due to debt crisis ukraine war
yuan vs dollar - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिकी डॉलर की बादशाहत को अन्य प्रमुख मुद्राओं से चुनौती मिलने लगी है। इसकी वजह खुद अमेरिकी नीतियां हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के साथ प्रतिद्वंद्विता, यूक्रेन युद्ध के झटके और अमेरिकी कर्ज संकट ने दुनिया की प्रमुख मुद्रा के रूप में डॉलर की स्थिति पर फिर से विचार करने पर मजबूर किया है।

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कुछ बड़ी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर का विकल्प तलाश रही हैं। रूस, चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश इनमें शामिल हैं। बांग्लादेश जैसे दर्जन भर छोटे एशियाई देश भी स्थानीय मुद्रा में आपसी व्यापार कर रहे हैं।
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भारत दिरहम और रूबल में खरीद रहा रूसी तेल
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक व्यापार में उथल-पुथल जारी है। भारत यूएई दिरहम व रूबल में रूसी तेल खरीद रहा है। चीन ने युआन से 88 अरब डॉलर का रूसी तेल, कोयला और धातु खरीदा। वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में युआन की हिस्सेदारी बढ़कर 7 फीसदी पर पहुंच गई है।
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फॉरेक्स में डॉलर की हिस्सेदारी 20 साल के निचले स्तर पर
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुताबिक, 2022 की चौथी तिमाही में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा 20 साल के निचले स्तर 58 फीसदी पर आ गया। अब यह और घटकर 1995 के समान स्तर पर आ गया है।

इसलिए भी विकल्प ढूंढ रहे देश
यूरिजोन एसएलजे कैपिटल के सीईओ स्टीफन जेन ने कहा, यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसने सऊदी अरब, भारत, चीन और तुर्किये जैसे देशों को अन्य मुद्राओं में कारोबार करने पर विचार करने को मजबूर किया।

महंगाई बढ़ाने में भी भूमिका
अगर कोई मुद्रा डॉलर के मुकाबले बहुत अधिक कमजोर हो जाती है तो डॉलर में कारोबार किए जाने वाले तेल एवं अन्य वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे आयात करने वाले देशों में महंगाई बढ़ जाती है। 


विकल्प तलाशना इतना आसान भी नहीं...
सबको साथ लाना बहुत जटिल : डॉलर की बादशाहत को चुनौती देने के लिए निर्यातकों, आयातकों, मुद्रा व्यापारियों और कर्जदाताओं को साथ लाना जरूरी है। लेकिन, यह एक विशाल और जटिल प्रक्रिया है। वैश्विक लेनदेन में 90 फीसदी हिस्सेदारी बीआईएस के आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में डॉलर की हिस्सेदारी 90 फीसदी है। 2022 में 6.6 लाख करोड़ डॉलर का कारोबार अमेरिकी मुद्रा में हुआ। सभी ऑफशोर कर्ज का लगभग आधा हिस्सा डॉलर में है। बर्कले अर्थशास्त्र के प्रोफेसर बैरी आइचेंग्रीन ने कहा, बैंकों, कंपनियों और सरकारों के लिए अचानक डॉलर में कारोबार बंद करना आसान नहीं होगा।

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