{"_id":"682f2754a16b944c070949c2","slug":"uk-to-give-non-discriminatory-treatment-to-indian-firms-in-public-procurement-under-fta-2025-05-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"India-UK FTA: सरकारी खरीद में पहली बार भारतीय कंपनियों को समान अवसर देगा ब्रिटेन, अगले साल लागू होगा समझौता","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
India-UK FTA: सरकारी खरीद में पहली बार भारतीय कंपनियों को समान अवसर देगा ब्रिटेन, अगले साल लागू होगा समझौता
Thu, 22 May 2025 07:02 PM IST
निर्मल कांत
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 22 May 2025 07:02 PM IST
सार
India-UK FTA: एफटीए के तहत ब्रिटेन पहली बार भारतीय कंपनियों को अपनी सरकारी खरीद प्रणाली में बिना भेदभाव के भाग लेने की अनुमति देगा। इस समझौते के तहत, ब्रिटेन की कंपनियों को भी भारत की सरकारी खरीद में अवसर मिलेगा, लेकिन भारत ने उन्हें केवल गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में ही टेंडरों में भाग लेने की अनुमति दी है।
विज्ञापन
भारत ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (प्रतीकात्मक)
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो चुका है। इसके तहत ब्रिटेन पहली बार भारतीय कंपनियों को सरकारी खरीद प्रणाली में बिना किसी भेदभाव के हिस्सा लेने की अनुमति देगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
विज्ञापन
दोनों देशों ने छह मई को एफटीए पर वार्ता खत्म की है। इस समझौते को अगले साल लागू किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, 'पहली बार ब्रिटेन ने 'सामाजिक मूल्य' कानून (सोशल वैल्यू) के तहत हमारे आपूर्तिकर्ताओं (भारतीय कंपनियों) के लिए अपनी सरकारी खरीद प्रणाली में समान अवसर सुनिश्चित करने का वादा किया है।' ब्रिटेन के सामाजिक मूल्य कानून के तहत सरकारी विभागों को सरकारी अनुबंधों में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहलुओं का ध्यान रखना होता है और इस बार भारतीय कंपनियों को भी इस प्रणाली में समान रूप से शामिल किया जाएगा।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Morgan Stanley: रिजर्व बैंक इस साल ब्याज दर में कर सकता है बड़ी कटौती, मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में दावा
विज्ञापन
ब्रिटेन सरकार के मुताबिक, यह व्यापार समझौता ब्रिटेन की कंपनियों को भारत के सरकारी खरीद बाजार में अद्वितीय और अभूतपूर्व पहुंच प्रदान करेगा, जिसमें करीब 40,000 टेंडर होंगे, जिनकी कुल कीमत हर साल 38 बिलियन पाउंड (लगभग 4 लाख करोड़ रुपये) होगी। दूसरी ओर, भारत ने ब्रिटिश कंपनियों को केवल गैर-संवेदनशील क्षेत्रों में सरकारी खरीद में हिस्सा लेने की अनुमति दी है। हालांकि, ब्रिटेन की कंपनियों को राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के टेंडरों में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि ब्रिटेन की कंपनियों को केवल 200 करोड़ रुपये से ऊपर के टेंडरों में भाग लेने की अनुमति होगी और उन्हें भारतीय खरीद प्रणाली में द्वितीय श्रणी का स्थानीय आपूर्तिकर्ता माना जाएगा। इसका मतलब है कि उन्हें भारतीय कंपनियों के बराबर दर्जा मिलेगा, लेकिन कुछ विशेष नियमों के तहत। साथ ही, भारत की मेक इन इंडिया नीति और छोटे और मंझोले उद्योगों को समर्थन देने के लिए कुछ विशेष छूट दी गई है।
ये भी पढ़ें: 'इंडसइंड बैंक के अधिकारियों की ओर से किए गए "गंभीर गलतियों" की जांच हो रही है', बोले सेबी प्रमुख
पहले, भारत ने यूएई के साथ हुए एफटीए में सरकारी खरीद क्षेत्र को खोला था। उस समझौते के तहत, यूएई की कंपनियों को 200 करोड़ रूपये से ऊपर के टेंडरों में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। 2020 में, सरकार ने सार्वजनिक खरीद के नियमों में बदलाव किया, ताकि उन कंपनियों को अधिक प्राथमिकता दी जा सके, जिनके उत्पादों और सेवाओं में 50 फीसदी या उससे अधिक स्थानीय सामग्री हो, ताकि 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा मिल सके।
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन