आईपीओ लांच पर हुआ उबर को नुकसान, 7.6 फीसदी गिरा शेयर
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ऐप बेस्ड कैब सेवा देने वाली कंपनी उबर को आईपीओ लांच वाले दिन ही शेयर बाजार में नुकसान उठाना पड़ा है। कंपनी ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर अपना आईपीओ लांच किया था। इसके लिए उसने 45 डॉलर कीमत रखी थी। हालांकि यह देर शाम (अमेरिकी समयनुसार) को 41.57 डॉलर पर बंद हुआ। इस तरह से लांच वाले दिन ही कंपनी के शेयर को 7.6 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ा था।
कंपनी ने जुटाए 8.1 अरब
हालांकि कंपनी ने पहले दिन ही शेयर बाजार से 8.1 अरब डॉलर जुटा लिए थे। शुरुआत में ही कंपनी को 3.7 अरब डॉलर यानी करीब 258 अरब 57 करोड़ रुपये का निवेश हासिल हुआ। लेकिन यह पिछले साल के आकलन के मुकाबले काफी कम है। निवेशकों ने तब अनुमान लगाया था कि आईपीओ से ही 120 अरब डॉलर जुटा लेगी।
इस वजह से हुआ नुकसान
इस आईपीओ के आने से पहले ही कंपनी और कैबचालकों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। कम आय और अनिश्चित वर्किंग कंडीशंस को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन में कई बड़े शहरों के कैबचालकों ने 8 मई को हड़ताल करने का आह्वान किया था।
इन कैबचालकों ने अपना ऐप बंद कर दिया और कोई बुकिंग नहीं स्वीकार की थी। कैबचालकों का कहना है कि वे लोगों से इस ऐप का बहिष्कार करने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश करेंगे। सैनफ्रांसिस्को में स्थित कंपनी के मुख्यालय पर भी विरोध प्रदर्शन भी जारी है।
फेसबुक के बाद सबसे बड़ा आईपीओ
यह फेसबुक के बाद अमेरिका की किसी कंपनी का सबसे बड़ा आईपीओ है। हालांकि विश्व में अभी तक का सबसे बड़ा आईपीओ अलीबाबा लेकर आई थी, जिसने 2014 में 1.74 लाख करोड़ रुपये (2500 करोड़ डॉलर) जुटाए थे।
उबर का आईपीओ अमेरिका में अब तक के टॉप 10 बड़े आईपीओ में शुमार हो सकता है। उबर के संस्थापक गैरेट कैंप ने कमाई की यह रकम पुराने कर्मचारियों और निवेशकों के हिस्से में डाली है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक उबर के एक और सह संस्थापक और पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव त्राविस के पास 6 अरब डॉलर की संपत्ति है।
एक कार्यक्रम में कैंप ने कहा था कि 2008 में उन्हें ऐसा ऐप बनाने का विचार आया था। आज 63 देशों में उबर कारोबार कर रही है और साल में इससे 11 अरब डॉलर की कमाई होती है। उन्होंने कहा, 'मेरा सपना है कि मैं कुछ ऐसा कर पाऊं जो मेरे बाद भी रहे।'
कैंप के अलावा बहुत सारे कर्मचारी मानते हैं कि उबर को यहां तक पहुंचाने में कालानिक का बहुत बड़ा हाथ था लेकिन उन्हें भी कानूनी वजहों और नैतिक कारणों से कंपनी से अलग होना पड़ा था।