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इस बार मांग कम होने से गर्मी में बिजली कटौती से राहत की उम्मीद

Thu, 11 Apr 2019 06:07 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Thu, 11 Apr 2019 06:07 PM IST
सार

  • औद्योगिक जगत में सुस्ती होने से उत्तर भारत में घटेगी बिजली की मांग 
  • 2,530 करोड़ यूनिट रही बिजली की मांग उत्तरी क्षेत्र में इस फरवरी
  • 2,568 करोड़ यूनिट थी फरवरी 2018 में बिजली मांग

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there will be no cut in electricity in summer season as demand will remain subdued
electricity demo pic

विस्तार

गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ लोक सभा चुनाव में भी उत्तर और पूर्वी भारत में बिजली की मांग घट रही है। औद्योगिक जगत की ओर से बिजली की मांग में गिरावट आने और बिजली वितरण कंपनियों (डिस्काम) की आर्थिक हालत खस्ता होने से मांग घटी है। हालांकि, अभी बिजली निर्माता थर्मल पावर कंपनियों के पास मांग भले ही कम हो, लेकिन कोयले की कोई कमी नहीं है।

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केंद्रीय बिजली मंत्रालय द्वारा जारी फरवरी 2019 में बिजली की मांग और आपूर्ति के अद्यतन आंकड़े के अनुसार, उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र में बिजली की मांग घटी है। इस साल फरवरी में उत्तरी क्षेत्र में 2,530 करोड़ यूनिट बिजली की मांग रही, जबकि पिछले साल बिजली की मांग 2,568 करोड़ यूनिट थी।
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इसी तरह पूर्वी क्षेत्र में भी इस साल फरवरी में 9,77 करोड़ यूनिट की ही मांग रही, जो पिछले साल की समान अवधि में 1,004 करोड़ यूनिट थी। हालांकि, फरवरी में दक्षिणी, पश्चिमी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में बिजली की मांग बढ़ी है। 

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यूपी एवं हरियाणा में घटी है मांग

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बीते फरवरी के दौरान उत्तर प्रदेश में 725 करोड़ यूनिट की बिजली मांग रही, जबकि 717 करोड़ यूनिट की आपूर्ति हुई। इससे एक साल पहले फरवरी में यूपी ने 817 करोड़ यूनिट बिजली की मांग की थी और उसे 809 यूनिट बिजली मिली थी।


उधर, हरियाणा ने इस साल फरवरी में 331 करोड़ यूनिट बिजली की मांग की और उसे इतनी ही बिजली मिली। फरवरी, 2018 में हरियाणा ने 337 करोड़ यूनिट बिजली की मांग की थी और इतनी ही मिली थी।

there will be no cut in electricity in summer season as demand will remain subdued

औद्योगिक मांग और आर्थिक स्थिति है वजह

फिच समूह के इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च के प्रिंसिपल इकॉनमिस्ट सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि डिस्काम की करीब 60 फीसदी बिजली औद्योगिक ग्राहक ही खरीदते हैं और इनसे ही उन्हें असल में फायदा होता है।

घरेलू और कृषि कनेक्शन को तो रियायती दर पर बिजली मिलती है। बीते दिसंबर में समाप्त हुई तिमाही में देखें, तो औद्योगिक उत्पादन में वृद्घि दर गिरकर 6.6 फीसदी पर आ गई है, जो बीते छह तिमाही का न्यूनतम स्तर है। डिस्काम की आर्थिक हालत पहले से ही खस्ता है, इसलिए वह इन हालात में ज्यादा बिजली खरीद नहीं सकते।

कोयला का स्टॉक बढ़ा

आम तौर पर कोयले का स्टॉक नहीं होने की वजह से बिजली कंपनियां कम बिजली बना पाती हैं। लेकिन इस समय न सिर्फ कोल इंडिया लिमिटेड की तरफ से कोयले की सामान्य आपूर्ति हो रही है, बल्कि रेलवे की तरफ से भी कोयले की ढुलाई के लिए पर्याप्त संख्या में मालगाड़ी के रैक उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

स्थिति यह है कि एनटीपीसी के दादरी थर्मल पावर प्लांट में 36 दिन का कोयला है, जबकि रोपड़ के थर्मल पावर प्लांट में तो 75 दिन तक के कोयले का स्टॉक है। बिजली की मांग नहीं होने से थर्मल पावर स्टेशन में कम बिजली बनाई जा रही है। बीते मार्च में उत्तरी क्षेत्र की थर्मल पावर कंपनियों का प्लांट लोड फैक्टर महज 52.43 फीसदी था जबकि इससे एक साल पहले इसी महीने यह 60.96 फीसदी था।  

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