आज शुरू होगा ब्याज दरों पर तीन दिवसीय मंथन, रेपो दर में कटौती की उम्मीद कम
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मुख्य ब्याज दर के पुनर्निधारण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू होगी। मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक आम तौर पर दो दिन चलती है, लेकिन पहली बार यह बैठक तीन दिनों की होगी। छह जून की दोपहर को समीक्षा की घोषणा होगी। रेपो दर अभी छह फीसदी है और रिवर्स रेपो दर 5.75 फीसदी है।
इस बैठक में बढ़ी महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पर प्रमुखता से गौर किया जाएगा। जनवरी-मार्च 2018 तिमाही में सात तिमाहियों की सर्वाधिक विकास दर 7.7 फीसदी दर्ज किए जाने और सामान्य मानसून के अनुमान से मुख्य ब्याज दर (रेपो दर) में कटौती की उम्मीद घट गई है। खुदरा महंगाई दर भी नवंबर 2017 से चार फीसदी से ऊपर चल रही है।
सरकार ने आरबीआई की जवाबदेही तय की है कि वह विकास को सहारा देते हुए खुदरा महंगाई दर को दो फीसदी की घट-बढ़ की गुंजाइश के साथ चार फीसदी पर बरकरार रखे। महंगाई का हवाला देते हुए आरबीआई ने अगस्त 2017 से रेपो दर में बदलाव नहीं किया है।
मुख्य ब्याज दर में बढ़ोतीर का संकेत देते हुए एसबीआई, पीएनबी और आईसीआईसीआई बैंक जैसे कुछ बैंकों ने एक जून से ऋण दरें बढ़ा दी हैं। कुछ बैंकों ने जमा दरें भी बढ़ा दी हैं। एसबीआई ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि दर बढ़ने की उम्मीद के बावजूद हमारा मानना है कि जमीनी स्थिति दर बदलने की नहीं बल्कि सावधानी बरतने की ओर इशारा करती है।
वित्तीय साक्षरता सप्ताह भी आज से
वित्तीय साक्षरता सप्ताह सोमवार से शुरू हो रहा है और भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहक सुरक्षा को अपना थीम चुना है। इस विषय पर सप्ताह भर चलने वाले आयोजन आठ जून को समाप्त होंगे। आरबीआई ने एक बयान में कहा कि इस दौरान बैंकों के ग्राहकों के बीच वित्तीय उत्पादों और सेवाओं, अच्छे वित्तीय परिपाटियों और डिजिटल माध्यम अपनाने को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।
ग्राहक सुरक्षा के लिए चार संदेशों का प्रमुखता से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इन संदेशों में बैनरों और पोस्टरों के जरिए ग्राहकों को बताया जाएगा कि अनधिकृत डिजिटल लेन-देन के मामले में यदि तीन दिनों के भीतर बैंक को सूचना दी जाती है, तो ग्राहक की देनदारी शून्य हो जाती है। बयान में कहा गया कि शिकायत मिलने के बाद से 90 दिनों के भीतर संबंधित बैंक शिकायत का समाधान करेंगे।