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सोने की चमक फीकी, खाद्य तेल पस्त: पीएम मोदी की 'बचत' अपील से क्यों सदमे में हैं कारोबारी? जानिए उनकी राय

Mon, 11 May 2026 09:12 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Mon, 11 May 2026 09:12 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस आह्वान के बाद सोमावार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध ज्वेलरी कंपनियों के शेयर में गिरावट देखी गई साथ ही ज्वेलर्स संगठन और मुंबई सरार्फा बाजार से काफी मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। वहीं खाद्य तेल की कीमतें अधिक होने की वजह से पहले से ही मांग में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी जा रही है।

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The Prime Ministers appeal to avoid buying gold and reduce the use of edible oil has upset businesses
बाजार। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पश्चिम एशिया संकट के प्रतिकूल प्रभावों से अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पेट्रोल/डीजल का कम इस्तेमाल, सोना की एक साल तक खरीदारी नहीं करने, रासायनिक उर्वरक में रसानिक खाद्य के साथ जैविक खाद्य अपनाने और खाद्य तेल की खपत कम करने और अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने की अपील की है। उनका बयान ऐसे समय में आया है, जब कच्चे तेल और सोने का भारत के आयात खर्चों में सबसे बड़ा हिस्सा है और इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस आह्वान के बाद सोमावार को शेयर बाजार में सूचीबद्ध ज्वेलरी कंपनियों के शेयर में गिरावट देखी साथ ही ज्वेलर्स संगठन और मुंबई सरार्फा बाजार से काफी मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। वहीं खाद्य तेल की कीमतें अधिक होने की वजह से पहले से ही मांग में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी जा रही है। इस अपील के बाद कारोबार पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
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इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने अमर उजाला डॉटकॉम को बताया कि प्रधानमंत्री की इस अपील का असर कारोबार पर पड़ेगा और 5 प्रतिशत तक मांग में कमी आएगी। ऐसा नहीं है कि सोने की खरीदारी पूरी तरह बंद हो जाएगी लेकिन इसका असर मांग पर पड़ेगा। वे कहते पहले से ही सोने और चांदी कीमतें अधिक होने की वजह से सोने की मांग कम है।

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कारोबार में फंडिंग की समस्या बढ़ेगी

मेहता कहते, इससे कारोबार पर असर पड़ेगा, लेकिन सबसे अधिक असर कारोबार में फंडिंग पर होगा। क्योंकि सोने की कीमतें अधिक होने की वजह से मांग पहले से ही कम है और अब जब प्रधानमंत्री स्वंय सोने की खरीदारी को कम करने के लिए कह रहे हैं, ऐसे में कारोबारी बैंक में अपनी लोन की लिमिट बढ़ाने के लिए जाएगा, तो बैंक उसकी लिमिट बढ़ाने के लिए हिचकिचा सकते हैं। उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती मुझे लगता है, फडिंग की समस्या है, जो बढ़ सकती है।

बुलियन इकोसिस्टम से जुड़े 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा कहते हैं, प्रधानमंत्री की इस अपील से ज्वेलरी और बुलियन इकोसिस्टम से जुड़े 3.5 करोड़ लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। जिसमें 6 लाख ज्वेलरी दुकानों में जिसमें 2 लाख हॉलमार्क रजिस्ट्रर है और बाकी 4 लाख छोटे दुकानदार, सुनार हैं। इसके अलावा कारीगर, मैन्युफैक्चर्स, होलसेलर्स, रिफाइनर सहित डिजाइनर और दैनिक मजदूर इससे जुड़े हुए हैं। वे कहते हैं, अमेरिका द्वारा लगाए भारत पर टैरिफ शुल्क, पश्चिम एशिया में तनाव जिसकी वजह से सोने की तेज कीमतों की वजह से सरार्फा बाजार में पिछले एक साल में कारोबार 80 प्रतिशत तक प्रभावित है। 30 प्रतिशत का जो कारोबार बचा हुआ है, वह प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद 10 प्रतिशत तक कारोबार और प्रभावित होने की आशंका है। संगठन  ने सरकार से तत्काल अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श शुरू करने का आग्रह किया है, ताकि विदेशी मुद्रा की रक्षा, छोटे ज्वेलर्स को सहारा, कारीगरों की आजीविका और भारत को वैश्विक बुलियन-ज्वेलरी हब बनाने के लक्ष्य एक साथ पूरे हो सके। 

सोने की रिसाइकलिंग करने का अनुरोध उद्योग के लिए सही है

मुंबई होलसेल गोल्ड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश बाफना कहते हैं, सोने की कीमतें उच्च स्तर पर होने की वजह से आभूषणों की मांग पहले से ही कम है। पिछले एक साल से 50 प्रतिशत कारोबार प्रभावित है और प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद कारोबार पर पड़ेगा। यदि प्रधानमंत्री लोगों से आह्वान करते कि घर में पड़े पुराने सोने को बदलकर नए सोने की खरीदारी करें, यानी रिसाइकिल को अपनाए, तो उद्योग के लिए राहत होती। मुंबई शहर में अकेल 5 लाख से कारोबारी हैं, जो इससे प्रभावित होंगे।

छोटे ज्वेलर्स दुकानदार होंगे प्रभावित

बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार जैन कहते हैं, प्रधानमंत्री के सोना नहीं खरीदने के आह्वान का हम विरोध नहीं कर रहे हैं। यह एक मायने में देश हित में है। लेकिन कारोबार पर इसका असर जरूर पड़ेगा। पिछले एक साल में आभूषणों की बिक्री पर दबाव बना हुआ है, अब इस तरह की अपील इसको और प्रभावित करेगी। यदि मांग और कम हुई तो इसका सबसे अधिक असर छोटे ज्वेलर्स दुकानदारों पर पड़ेगा, जबकि बड़े ब्रांडेड ज्वैलर्स कंपनियां इस तरह के घटनक्रमों को झेल सकती हैं। वे कहते हैं,  प्रति वर्ष भारत में 800 से 900 टन सोने का आयात होता है और इसकी खपत भी होती है। जिसकी वजह से सरकार के खाते पर असर पड़ रहा है।  

खाद्य तेल की कीमतें बढ़ने और गर्मी की वजह से पहले से मांग में 10 से 12 प्रतिशत गिरावट

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री एवं अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर कहते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी तीन बार खाने में तेल को कम करने के लिए अपील कर चुके हैं। वहीं कोरोना के बाद लोगों ने स्वस्थ्य जीवन शैली को अपनाया है, इसकी वजह से कोरोना के बाद से 3 से 4 प्रतिशत खाद्य तेल की मांग में कमी देखने को मिली। वहीं दूसरी ओर अमेरिका द्वारा टैरिफ शुक्ल लगाने और पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में 25 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। युद्ध से पहले जो पॉमोलिन ऑयल 120 रुपये प्रति लिटर था, वो युद्ध शुरू होने के बाद 140 से 150 रुपये प्रति लिटर हो गया। कीमतें अधिक होने और अत्यधिक गर्मी पड़ने की वजह से भी खाद्य तेल मांग पहले से ही 10 से 12 प्रतिशत कमी देखी जा रही है। कारोबारी पहले से परेशान थे और अब प्रधानमंत्री की अपील के बाद उनकी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

खाद्य तेल की आयात में अप्रैल में 18 प्रतिशत की गिरावट 

फिलहाल भारत में 60 से 65 प्रतिशत खाद्य तेल आयात किया जाता है। जिसमें पामोलिन की खपत 50 प्रतिशत दूसरे स्थान पर सरसों के तेल और तीसरे स्थान पर सोयाबीन के तेल की खपत देश में सबसे अधिक होती है। वहीं गत वर्ष की तुलना में मार्च में खाद्य तेल के आयात में 29 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अप्रैल में यह गिरावट 18 प्रतिशत रही। 

जानकारों की राय

कमोडिटी विशेषज्ञों का कहना है, कि कीमतें अधिक होने की वजह से पहले से ही खाद्य तेल से लेकर ज्वेलर्स कारोबार परेशान थे। अब राष्ट्रहित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील लोगों पर असर तो करेंगी, यह तो नहीं कह सकते की पूरी तरह से लोग इसको मानेगे, लेकिन असर जरूर देखने को मिलेगा। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पेट्रोल/डीजल, सोना, रासायनिक उर्वरक और खाद्य तेल की खपत कम करने और अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने की अपील कच्चे तेल की उच्च कीमतों के एकारण उत्पन्न चालू खाता घाटे की समस्या के लिए संकट प्रबंधन की एक प्रतिक्रिया है। मितव्ययिता के इस आह्वान का वित्त वर्ष 2027 में आर्थिक विकास पर थोड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

क्या कहते हैं आंकड़े?

यह कोई रहस्य नहीं है कि भारतीयों को सोने से गहरा लगाव है। हम दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक हैं, जो आमतौर पर अपनी घरेलू मांग के 90  प्रतिशत से अधिक की पूर्ति के लिए सालाना 700-800 टन सोना आयात करते हैं। सोने का यह भारी आयात हमारे आयात बिल का एक बड़ा हिस्सा है, खासकर अब जब बढ़ती कीमतों के कारण आयात लागत भी बढ़ रही है। 2025-26 में सोने का आयात 24 प्रतिशत बढ़कर सर्वकालिक उच्च स्तर 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। 2024-25 में सोने का आयात 58 अरब डॉलर था। 2023-24 में यह 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में 35 अरब डॉलर था। इन बहुमूल्य धातुओं के आयात में वृद्धि के कारण देश का व्यापार घाटा 2025-26 के दौरान बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया है।

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