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इंटरनेट के विस्तार में आ रही हैं परेशानियां, इक्का-दुक्का राज्य ही मान रहे हैं कंपनियों की बात

Fri, 21 Sep 2018 08:45 PM IST
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Sep 2018 08:45 PM IST
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telecom companies facing hurdles from states in providing internet connectivity

वित्तीय संकट झेल रहीं दूरसंचार कंपनियों को राज्य सरकारों की अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि केंद्र सरकार का जोर इंटरनेट विस्तार को लेकर है। सेल्युलर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने कहा कि देश के कई राज्यों से सेवाएं देने के लिए ढांचागत व्यवस्था पर चर्चा की गई है। लेकिन अब तक इक्का-दुक्का राज्य ही कंपनियों को भूमि समेत अन्य व्यवस्था देने को तैयार हुए हैं।

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सीओएआई का आरोप है कि एक तरफ नगर निगम और विकास प्राधिकरणों द्वारा दूरसंचार सेवा मुहैया कराने के लिए लगाए जाने वाले टावरों के एवज में भारी किराया वसूला जाता है। दूसरी तरफ कंपनियां जब इंटरनेट विस्तार में अपना योगदान देने का प्रयास करती हैं, तब भी उनसे छोटे से छोटे स्थान की कीमतों या लागत को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है।
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सीओएआई के प्रबंध निदेशक राजन मैथ्यूज के मुताबिक लगातार दूरसंचार कंपनियों का खर्च बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में नई कंपनियां इसी वजह से नहीं आ रही हैं, जबकि कई पुरानी कंपनियां बंद हो गई और सिर्फ बड़ी कंपनियां ही काम कर रही हैं। उन पर प्रतिस्पर्धा का भारी दबाव है।
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उन्होंने बताया कि दूरसंचार कंपनियों के वित्तीय संकट को लेकर सीओएआई ने संचार मंत्रालय से भी चर्चा की है। कुछ हल जरूर निकलेंगे, लेकिन नई सेवाओं की व्यवस्था करने में राज्यों की भूमिका कंपनियों के लिए बड़ी असहनीय है।

धन्नासेठ नहीं समझा जाए कंपनियों को

मैथ्यूज ने बताया कि एक पोल पर हॉट-स्पॉट वाई-फाई (ई-बैंड) देकर आधा दर्जन घरों को सस्ता इंटरनेट मुहैया कराने के मद्देनजर कंपनियों ने हाल ही में कई राज्यों से संपर्क किया। इनमें उत्तर भारत के प्रमुख राज्य भी शामिल हैं, जिन्होंने इसके लिए जरा सी भूमि देने पर भी विचार नहीं किया।

उन्होंने कहा कि कंपनियां भूमि की खरीद या किराया देने को तैयार हैं। इसके बावजूद एक-दो राज्यों को छोड़कर किसी ने भी इसमें रुचि नहीं दिखायी। मैथ्यूज ने राज्यों के नाम स्पष्ट करने से इंकार करते हुए कहा कि सीओएआई इस पर विभिन्न स्तरों पर केंद्र से भी चर्चा कर रहा है। हमारा बस इतना कहना है कि दूरसंचार कंपनियों को धन्नासेठ नहीं समझा जाए। मौजूदा समय में एक कंपनी को छोड़कर सभी वित्तीय परेशानियों से जूझ रही हैं।

बढ़ गए हैं कई प्रकार के खर्च

सीओएआई के प्रबंध निदेशक ने कहा कि कंपनियों के खर्चों में जल्द अनचाही कॉल्स को रोकने की व्यवस्था का व्यय भी शामिल हो जाएगा। इसके अलावा डीजल के दाम बढ़ने से पहले ही टावर प्रबंधन का खर्च बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि तमाम ऐसे खर्च हैं जो नियामक के निर्देशों को लागू करने के मद्देनजर कंपनियां वहन कर रही हैं।


ऐसे में राज्यों, नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों को विभिन्न ढांचागत व्यवस्थाओं में अन्य की तर्ज पर हमें साधन मुहैया कराने चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं हैं, जबकि दूरसंचार आज सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसके बढ़ने से अर्थव्यवस्था में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। साथ ही ग्राहकों को अच्छी और सस्ती सेवाएं मिलेंगी।

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