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नौ तिमाही के बाद टेलीकॉम इंडस्ट्री के राजस्व में हुई बढ़ोतरी

Thu, 03 Oct 2019 01:15 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Thu, 03 Oct 2019 01:15 PM IST
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Telecom AGR jumps 9 percent in June quarter

नौ तिमाही में राजस्व गिरने के बाद टेलीकॉम इंडस्ट्री के राजस्व में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अप्रैल-जून 2019 तिमाही में टेलिकॉम कंपनियों के ग्रॉस रेवेन्यू और एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू ( AGR ) में वृद्धि हुई है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ( TRAI ) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान, रेवेन्यू 61,535 करोड़ रुपये रहा है। इसमें 5.37 फीसदी की तेजी आई है। साल 2018 की समान अवधि में यह 58,401 करोड़ रुपये था।

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एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू में भी इजाफा हुआ है। पहले यह 36,552 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 39,124 करोड़ रुपये हो गया है। खास बात ये है कि नौ तिमाही बाद राजस्व में इतनी बढ़ोतरी आई है। इससे पहले साल 2016 में इसमें वृद्धि हुई थी। सितंबर 2016 में मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने कॉमर्शियल सेवाएं शुरू की थीं, जिसके बाद टेलिकॉम इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई थी।

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बीएसएनएल के राजस्व में बढ़ोतरी

अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत संचार निगम लिमिटेड ( BSNL ) का राजस्व 27.94 फीसदी बढ़ा है। मार्च 2019 में यह 2,031.07 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 2,598.61 करोड़ रुपये हो गया है। बीएसएनएल के एजीआर में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली है।

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रिवाइवल पैकेज के प्रस्ताव पर रोक

हाल ही में वित्त मंत्रालय ने बीएसएनएल और महानगर टेलिफोन निगम लिमिटेड ( MTNL ) के 74 हजार करोड़ रुपये के रिवाइवल पैकेज के प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगा दी थी। दोनों कंपनियों के लिए रिवाइवल प्लान को प्रधानमंत्री कार्यालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। प्लान के मुताबिक दोनों कंपनियों को पूरे देश में 4जी सेवाओं को शुरू करने के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। इससे दोनों कंपनियों की खराब वित्तीय हालत को सुधारने का मौका मिलेगा। 

सुरक्षा पर है ट्राई का ध्यान

ट्राई ओटीटी के लिए नियमों को अंतिम रूप देने में एक महीने का और समय लेगा। बता दें कि ओटीटी इंटरनेट के सहारे विविध सेवाएं देने वाली कंपनियां हैं। ट्राई का ध्यान सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर है। साल 2018 में ट्राई ने ओटीटी कंपनियों को नियामकीय ढांचे के दायरे में लाने के लिए एक परिचर्चा पत्र पेश किया था।

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