महंगी होती चीनी से उपभोक्ताओं की जेबें ढीली, 40 रुपये के पार पहुंची कीमत
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चीनी की कीमत में सवा महीने में 1 हजार रुपये क्विंटल का उछाल आया है। पहले गन्ने का भुगतान नहीं होने से सिर्फ किसान ही परेशान थे, लेकिन अब चीनी प्रति किलो 40 रुपये तक पहुंचने से आम उपभोक्ताओं की जेबें भी ढीली होने लगी हैं।
सीजन की शुरुआत में भी चीनी का फुटकर रेट 40 रुपये किलो तक पहुंच गया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी का रेट नीचे आने के कारण भारत से चीनी का निर्यात लगभग बंद हो गया। परिणामस्वरूप, यहां भी चीनी के रेट लगातार गिरते चले गए।
ऐसे बढ़ने लगे रेट
हालांकि, जैसे ही चीनी मिलें बंद होनी शुरू हुईं, चीनी के रेट न्यूनतम स्तर से बढ़ने शुरू हो गए। बीते शनिवार को चीनी के रेट फुटकर में 40 रुपये किलो तथा थोक में 3,800 रुपये क्विंटल तक पहुंच गए, जिससे अब आम उपभोक्ताओं की जेबें ढीली होनी शुरू हो गई हैं। सिंभावली चीनी मिल के एक अधिकारी की मानें, तो सरकार ने चीनी के आयात पर ड्यूटी बढ़ाने के साथ मिलों की चीनी बिक्री पर भी शिकंजा कस दिया है। जबकि मई तक मिलें बाजार की मांग पर चीनी आपूर्ति कर रही थीं।
किसानों को भुगतान होने में होगी देरी
अब केंद्र सरकार द्वारा 30 लाख टन चीनी का बंपर स्टाक बनाने की घोषणा के साथ ही तत्काल प्रभाव से यह शर्त भी लगा दी है कि कोई भी चीनी मिल एक माह में 45,000 क्विंटल से अधिक चीनी बाजार में नहीं बेच सकेगा। हालांकि, इससे गन्ने के भुगतान में और देरी होगी, क्योंकि जब मिलों को चीनी बेचनी की छूट नहीं होगी, तब किसानों का भुगतान कैसे होगा।
गन्ना बकाया चुकाने को सरकार के फैसले ने दिखाया असर
गन्ना किसानों के भारी-भरकम बकाये को चुकाने के लिए सरकार द्वारा एक्स मिल न्यूनतम मूल्य 29 रुपये प्रति किलो तय करने का फैसला कारगर साबित हो रहा है। देशभर में चीनी के थोक भाव में प्रति क्विंटल 150 से 450 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि खुदरा बाजार में चीनी का भाव देश में 34 से 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
सरकार ने एक्स मिल मूल्य तय करने के साथ ही चीनी का बफर स्टॉक बनाने की घोषणा की थी। दोनों घोषणाओं का मकसद चीनी के गिरते दाम को स्थिरता प्रदान करना था, ताकि मिलें निर्धारित 29 रुपये प्रति किलो पर चीनी बेचें और उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत मिल सके। जिससे वह गन्ना किसानों के 22,000 करोड़ के भारी बकाये के ज्यादा से ज्यादा हिस्से का भुगतान कर सके। सरकार के कदमों का खामियाजा हालांकि आम ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है। मिलों से खुदरा बाजार तक पहुंचने में देश के अलग-अलग हिस्सों में चीनी के दाम 5 से 9 रुपये तक बढ़ गए हैं।
अभी और बढ़ेंगी खुदरा कीमतें
विशेषज्ञों की मानें, तो गन्ना किसानों को सरकार के कदम से सिर्फ इतना फायदा है कि उनका बकाया शायद उन्हें जल्द हासिल हो जाए। इससे इतर, एक्स मिल दाम 29 रुपये होने के बावजूद मिलें गन्ना पहले के भाव से खरीद रही हैं, जो देशभर के राज्यों में अलग-अलग दाम पर मिलों द्वारा किसानों से खरीदा जाता है। देश में औसतन एक्स मिल के बाद सोमवार को थोक बाजार में चीनी के दाम 3,350 रुपये तक गए हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश में यह भाव 3,200 रुपये तक चल रहा है।
महाराष्ट्र में भी भाव 3,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। दिल्ली में चीनी की कीमतें बढ़कर 3,600 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई है, जबकि अभी चीनी की खुदरा कीमतों में 1 से 1.5 रुपये की बढ़ोतरी और हो सकती है।
अधिक उत्पादन से भाव नीचे
अखिल भारतीय गन्ना व्यापार संघ (एआईएसटीए) के मुताबिक, यह कहना गलत होगा कि चीनी के भाव बढ़ रहे हैं या बढ़ गए हैं। असल में चीनी की वाजिब फुटकर कीमत प्रति किलो 40 से 42 रुपये के बीच होनी चाहिए। लेकिन ज्यादा उत्पादन के कारण अभी खुदरा भाव औसतन 35 रुपये के आसपास है। अब दाम में जो बढ़ोतरी हो रही है, तो वह एक तरह से सुधार है, जब चीनी की लागत ही औसतन 35 रुपये प्रति किलो है तो उसका 32-34 रुपये में बाजार में बिकना ठीक नहीं।
चीनी के न्यूनतम मूल्य बढ़ने का असर
उपभोक्ता - जेबें होंगी ढीली
किसान - गन्ना बकाया मिलने की उम्मीद बढ़ी
मिल - आय में होगी बढ़ोतरी
चीनी के खुदरा भाव (दिल्ली में)
10 जून 2018 - 32 रुपये प्रति किलो
10 जून 2017 - 42 रुपये प्रति किलो