राज्य नहीं उठा रहे हैं आयात की गई 16500 टन प्याज, गोदाम में सड़ने का खतरा
कीमतों को थामने के लिए देश में आयात की गई प्याज के सरकारी गोदामों में सड़ने का खतरा पैदा हो गया है। दरअसल केंद्र सरकार द्वारा ढुलाई लागत वहन करने की पेशकश के बावजूद राज्य सरकारें आयातित प्याज में दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने मंगलवार को कहा कि केंद्र राज्यों को 55 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज की पेशकश कर रहा है और साथ ही ढुलाई लागत का वहन करने के लिए भी तैयार है। केंद्र भले ही प्याजा का आयात तो कर सकता है, लेकिन उपभोक्ताओं को खुदरा बिक्री का फैसला राज्यों पर निर्भर करता है।
170 रुपये तक पहुंची थी कीमतें
प्याज की खुदरा बिक्री सितंबर के अंत तक शुरू हो गई थी और दिसंबर में इसकी कीमत 170 रुपये प्रति किलो पहुंचने से केंद्र सरकार तुर्की और इजिप्ट जैसे देशों से प्याज के आयात को मजबूर हो गई थी। इसके बाद के हफ्तों में बाजार में खरीफ की नई फसल आने से कीमतों में नरमी आनी शुरू हो गई थी।
राज्यों ने उठाई सिर्फ 2 हजार टन प्याज
पासवान ने संवाददाताओं से कहा, ‘अभी तक हमने 36 हजार टन प्याज के आयात के लिए समझौते किए हैं। इसमें से 18,500 टन प्याज भारत आ चुकी है, लेकिन राज्यों ने काफी कोशिशों के बावजूद सिर्फ 2,000 टन प्याज उठाई है। हमें अब इसके निस्तारण को लेकर चिंता हो रही है, क्योंकि यह जल्द सड़ने वाली सब्जी है।’
उन्होंने कहा, ‘कल किसी को अदालत नही जाना चाहिए और इसके सड़ने की बात नहीं कहनी चाहिए।’ उन्होंने कहा कि केंद्र 55 रुपये प्रति किलो की औसत दर से आयातित प्याज की पेशकश कर रहा है और ढुलाई लागत का वहन भी कर रहा है। इसके बावजूद राज्य इसे खरीदने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।