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Startup: दो साल के निचले स्तर पर पहुंची स्टार्टअप की फंडिंग, निवेशक-संस्थापक बरत रहे सावधानी
Fri, 14 Oct 2022 02:47 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 14 Oct 2022 02:47 AM IST
सार
वैश्विक स्तर पर जुलाई-सितंबर तिमाही में 20 यूनिकॉर्न बने हैं। इसमें से 45 फीसदी सास सेगमेंट के हैं। जबकि कोई भी कंपनी डेकाकॉर्न नहीं बन पाई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
वैश्विक अर्थव्यवस्था में धीमापन के कारण भारतीय स्टार्टअप कंपनियों को मदद नहीं मिल रही है। इस साल की तीसरी तिमाही में इन कंपनियों ने 205 सौदों से केवल 2.7 अरब डॉलर जुटाई है जो दो साल का निचला स्तर है। पीडब्ल्यूसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर के दौरान केवल दो ही स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन पाए हैं। यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितने लंबे समय तक यह मंदी का दौर चलेगा। लेकिन यह सीधे दिख रहा है कि निवेशक और संस्थापक दोनों सावधानी बरत रहे हैं। हर सौदे की औसत फंडिंग 4.5 करोड़ डॉलर रही है।
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दूसरी तिमाही में 20 यूनिकॉर्न बने
वैश्विक स्तर पर जुलाई-सितंबर तिमाही में 20 यूनिकॉर्न बने हैं। इसमें से 45 फीसदी सास सेगमेंट के हैं। जबकि कोई भी कंपनी डेकाकॉर्न नहीं बन पाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश के सभी चरणों में गिरावट देखी गई है जिसमें शुरुआती, विकास और देर से सभी शामिल हैं। सामान्य तौर पर शुरुआती चरण के स्टार्टअप अधिक आसानी से पूंजी जुटाने में सक्षम होंगे क्योंकि वे आम तौर पर सार्वजनिक बाजारों में उतार-चढ़ाव से देर से होने वाले सौदों से प्रभावित नहीं होते हैं।
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इन्फोसिस का फायदा 11 फीसदी बढ़ा, 9300 करोड़ के शेयर खरीदेगी
नई दिल्ली। इन्फोसिस को दूसरी तिमाही में 6,021 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है जो एक साल पहले समान तिमाही की तुलना में 11 फीसदी ज्यादा है। कंपनी ने बृहस्पतिवार को बताया कि 9,300 करोड़ रुपये के शेयर को वह वापस खरीदेगी। इसी के साथ 6,940 करोड़ रुपये वह लाभांश देने पर खर्च करेगी। इसका राजस्व 23.4 फीसदी बढ़कर 36,538 करोड़ रुपये रहा है।
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