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Budget 2024: देश में तेजी से बढ़ती स्पेस इंडस्ट्री को चाहिए उदार एफडीआई पॉलिसी, बजट से जताई ये उम्मीद
Wed, 24 Jan 2024 06:42 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 24 Jan 2024 06:42 PM IST
सार
Space Industry Budget Expectations: उद्योग निकाय इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) ने सरकार से उपग्रहों, लॉन्च वाहनों और जमीनी उपकरण विनिर्माण के लिए जीएसटी छूट, बाहरी वाणिज्यिक उधार के लिए कम कर दरों और कम लाभ मार्जिन को देखते हुए उपग्रह क्षेत्र विदहोल्डिंग टैक्स को 10 फीसदी से घटाकर दो फीसदी करने की भी मांग की है।
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स्पेस इंडस्ट्री बजट एक्पेक्टेशन
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
भारत में तेजी से बढ़ती स्पेस इंडस्ट्री ने अगले सप्ताह पेश होने वाले अंतरिम बजट में रक्षा उद्योग और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन की तर्ज पर उदार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति अपनाने की मांग की है।
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उद्योग निकाय इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) ने सरकार से उपग्रहों, लॉन्च वाहनों और जमीनी उपकरण विनिर्माण के लिए जीएसटी छूट, बाहरी वाणिज्यिक उधार के लिए कम कर दरों और कम लाभ मार्जिन को देखते हुए उपग्रह क्षेत्र विदहोल्डिंग टैक्स को 10 फीसदी से घटाकर दो फीसदी करने की भी मांग की है।
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बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी पिक्सल के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवैस अहमद ने कहा, 'हम स्पेस इंडस्ट्री के लिए अधिक उदार एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) नीति बनाने की उम्मीद करते हैं। अभी तक एक प्रतिशत एफडीआई भी सरकार की मंजूरी के जरिये हासिल होता है और इसमें महीनों लगते हैं।"
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अहमद ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग के माध्यम से 74 प्रतिशत एफडीआई है। उसके ऊपर आपको सरकारी मार्ग के जरिए जाना होता है। कम से कम रक्षा पक्ष के लिए जो कुछ भी प्रावधान हैं वे अगर भारतीय अंतरिक्ष कंपनियों पर भी लागू हों तो यह पूंजी के प्रवाह को खोलने में वास्तव में मददगार साबित होगा।
उन्होंने अंतरिक्ष से जुड़ने निर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की भी मांग की। आईएसपीए ने ड्रोन जारी योजना की तर्ज पर स्पेस इंडस्ट्री में काम कर रही कंपनियों के लिए भी पीएलआई योजना की भी मांग की। उद्योग निकाय यह भी चाहता है कि सरकार कृषि, आपदा प्रबंधन जैसे डोमेन में अंतरिक्ष से जुड़े तकनीक समाधान खरीदने और अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हो।
आईएसपीए के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एके भट्ट ने कहा, "उद्योग को बढ़ावा देने और नवोन्मेष को आगे बढ़ाने के लिए सरकार के लिए व्यापक नियामकीय ढांचा विकसित करना और मौजूदा राजकोषीय और कराधान संबंधी चुनौतियों से निपटना महत्वपूर्ण है।"
एसोसिएशन ने नए दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत गैर-नीलामी वाले स्पेक्ट्रम आवंटित उपग्रह सेवाओं के लिए समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के प्रतिशत के रूप में उचित स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) की भी मांग की है। अंतरिक्ष क्षेत्र के नियामक इनस्पेस (IN-SPACe) ने 2033 तक देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के बढ़कर 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान लगाया है।