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7 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा नौकरी मिलने का अवसर, सर्विस सेक्टर में हुई बढ़ोतरी

Thu, 05 Apr 2018 04:27 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 05 Apr 2018 04:27 PM IST
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service sector pmi on growth track, job creation on a seven year high
employees
देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधियां मार्च महीने में तेजी की तरफ लौटने की राह पर दिखीं। सेवा क्षेत्र में यह तेजी नए कार्यों के प्रवाह में तेजी आने की वजह से दर्ज की गई है, जिसकी वजह से कंपनियों ने सात वर्षों में सबसे तेज गति से अपने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी की। एक मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई।
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सर्विस सेक्टर में 3 अंकों की तेजी
निक्केई इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स फरवरी के 47.8 की तुलना में मार्च में सुधरकर 50.3 रहा, जो आलोच्य महीने में कारोबारी गतिविधियों में तेजी दर्शाता है। सूचकांक 50 से नीचे रहने पर क्षेत्र में संकुचन, जबकि 50 से ऊपर रहने पर विस्तार का सूचक है। फरवरी माह में सेवा क्षेत्र दबाव में रहा था।
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आईएचएस मार्किट में अर्थशास्त्री तथा रिपोर्ट की लेखिका आशना डोढिया ने बताया कि नए कार्यों के नवीनीकरण में वृद्धि से तिमाही के अंत में देश के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में तेजी रही।
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इस बीच, उत्पादन व सेवा क्षेत्र दोनों में वृद्धि की वजह से निक्केई इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स फरवरी के 49.7 से बढ़कर मार्च में 50.8 रहा। 

डोढिया ने बताया कि कुल मिलाकर फरवरी माह में गतिविधियों में गिरावट अस्थायी रहा, क्योंकि देश की समग्र अर्थव्यवस्था मार्च में तेजी की राह पर लौट आई। उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि एक बार फिर सेवा क्षेत्र से अधिक रही। 

2011 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ा रोजगार

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मांग स्थितियों में सुधार तथा मौजूदा संसाधनों पर दबाव के मद्देनजर, सेवा प्रदाताओं ने जून 2011 के बाद सबसे तेज गति से अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर अपनी क्षमता का विस्तार किया। डोढिया ने कहा कि अर्थव्यवस्था को औपचारीकरण के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के प्रतिक्रियास्वरूप ज्यादा से ज्यादा लोगों का झुकाव रोजगार की तरफ हो रहा है, जो पीएमआई के नवीनतम आंकड़ों से जाहिर होता है। वास्तव में, रोजगारों का सृजन जून 2011 के बाद सबसे तेज गति से हुआ। 

उच्च लागत का दबाव कायम
सर्वेक्षण के मुताबिक, कीमत के मोर्चे पर, देश के सेवा क्षेत्र की कंपनियों को मार्च महीने के दौरान भी उच्च लागत के बोझ को वहन करना पड़ा। इस बीच, घटती खुदरा महंगाई तथा विकास दर को रफ्तार देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पर नीतिगत दरों में कटौती का दबाव बढ़ रहा है। 

आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बृहस्पतिवार को वित्त वर्ष 2018-19 की पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति का एलान किया। आरबीआई ने हालांकि नीतिगत दरों पर यथास्थिति कायम रखा।

आरबीआई ने अपनी पहली तीन बैठकों में नीतिगत दरों पर यथास्थिति को कायम रखा था। समिति ने बीते साल अगस्त में नीतिगत दर में 0.25 फीसदी की कटौती कर उसे छह फीसदी पर ला दिया था, जिसके साथ ही वह छह साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई। 

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