फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   SEBI changed rules Investors will not lose money in IPO Mutual funds

सेबी ने बदले नियम: आईपीओ, म्यूचुअल फंड में निवेशकों का नहीं डूबेगा पैसा, निकासी सीमा और समय तय 

Wed, 29 Dec 2021 05:45 AM IST
देव कश्यप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: देव कश्यप Updated Wed, 29 Dec 2021 05:45 AM IST
सार

आईपीओ से फंड जुटाने वाली कंपनियां अब सिर्फ 25 फीसदी इस्तेमाल इन-ऑर्गेनिक कार्यों में कर सकेंगी, जबकि 75 फीसदी राशि उन्हें कारोबार विस्तार में लगानी पड़ेगी। आईपीओ में 20 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले प्रवर्तकों की लॉक इन अवधि तीन साल से घटाकर 18 महीने कर दी है, जबकि 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी पर लॉक इन अवधि एक साल से घटाकर छह महीने हो गई है। ये नियम एक अप्रैल, 2022 के बाद आने वाले आईपीओ पर लागू होंगे। 

विज्ञापन
SEBI changed rules Investors will not lose money in IPO Mutual funds
सेबी - फोटो : PTI

विस्तार

खुदरा निवेशकों की सुरक्षा के लिए बाजार नियामक सेबी ने मंगलवार को कई नियमों में बदलाव किया है। खासकर आईपीओ और म्यूचुअल फंड में पैसे लगाने वालों पर जोखिम घटेगा। सेबी ने आईपीओ के एंकर निवेशकों की निकासी सीमा और समय तय करने के साथ जुटाए फंड के सही इस्तेमाल का भी नियम बनाया है। 

विज्ञापन


भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय (सेबी) के चेयरमैन अजय त्यागी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा आरंभिक सार्वजनिक निर्गम को लेकर रही। आईपीओ के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले  एंकर निवेशकों की लॉक इन अवधि 30 दिन से बढ़ाकर 90 दिन कर दिया गया है, जबकि उनकी निकासी सीमा भी 50 फीसदी तक तय कर दी है।
विज्ञापन


आईपीओ से फंड जुटाने वाली कंपनियां अब सिर्फ 25 फीसदी इस्तेमाल इन-ऑर्गेनिक कार्यों में कर सकेंगी, जबकि 75 फीसदी राशि उन्हें कारोबार विस्तार में लगानी पड़ेगी। आईपीओ में 20 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले प्रवर्तकों की लॉक इन अवधि तीन साल से घटाकर 18 महीने कर दी है, जबकि 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी पर लॉक इन अवधि एक साल से घटाकर छह महीने हो गई है। इसी तरह, म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने से पहले फंड हाउस को यूनिट धारकों की अनुमति लेनी होगी। ये नियम एक अप्रैल, 2022 के बाद आने वाले आईपीओ पर लागू होंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


नियमों में बदलाव से निवेशकों पर चार बड़े असर

  1. किसी आईपीओ में 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले शेयर होल्डर या एंकर निवेशक अब सूचीबद्ध वाले दिन अपना पूरा हिस्सा नहीं बेच सकेंगे। ऐसे शेयर होल्डर सूचीबद्ध के दिन कुल हिस्सेदारी का 50 फीसदी ही बेच पाएंगे। इस फैसले से स्टॉक के मूल्य में भारी उतार-चढ़ाव को रोका जा सकेगा और निवेशकों पर आने वाले जोखिम को घटा सकेंगे। दरअसल, जोमैटो के शेयर एक महीने की लॉक इन अवधि पूरी करने के साथ ही एंकर निवेशकों के निकल जाने से 8.8 फीसदी टूट गया था। पेटीएम के शेयर भी 13 फीसदी टूटे थे, जबकि नायका में भी इसी वजह से गिरावट आई थी। अब यह लॉक इन अवधि 90 दिन होगी, तब तक आईपीओ मजबूत स्थिति में आ जाएगा।
  2. आईपीओ से मिले पैसों के इस्तेमाल से जुड़े खुलासा नियमों का भी निवेशकों को लाभ मिलेगा। कंपनियां अभी तक आईपीओ के मसौदे में पैसे जुटाने का उद्देश्य इन-ऑर्गेनिक वृद्धि के लिए फंडिंग बताती हैं। इससे फंड के इस्तेमाल पर अनिश्चितता रहती है और निवेशकों मे आईपीओ को लेकर भरोसा नहीं जम पाता। कंपनियां अब सिर्फ 25 फीसदी राशि का इस्तेमाल इन-ऑर्गेनिक फंडिंग में कर सकेंगी, जबकि 75 फीसदी राशि उन्हें कारोबार विस्तार में लगानी होगी। इन-ऑर्गेनिक फंडिंग से मतलब है कि यह राशि अन्य कंपनी खरीदने या कर्ज चुकाने में इस्तेमाल की जा रही है। इन पैसों की निगरानी भी अब रेटिंग एजेंसियां करेंगी। 
  3. आईपीओ के मूल्य बैंड के नियमों में बदलाव करते हुए इसका दायरा बढ़ा दिया है। अब किसी आईपीओ का फ्लोर प्राइज (आधार मूल्य) और अपर प्राइज के बीच का अंतर कम से 105 फीसदी रहेगा। आईपीओ का मानना है कि कंपनियों की ओर से हाल में पेश किए गए आईपीओ के प्राइज बैंड का दायरा काफी छोटा था। प्राइज बैंड वह दायरा होता है, जिसके आधार पर निवेशक किसी आईपीओ की बोली लगाता है।
  4. फंड हाउस अब किसी म्यूचुअल फंड योजना को बंद करना चाहते हैं, तो उन्हें पहले यूनिट धारकों से इजाजत लेनी होगी। फंड हाउस को 2023-24 से भारतीय अकाउंटिंग मानक का पालन करना होगा, जिसमें किसी योजना को बंद करने के लिए निवेशकों से वोटिंग कराई जाएगी। एक यूनिट पर एक वोट होगा जिसका खुलासा 45 दिनों के भीतर करना होगा। अगर निवेशकों ने योजना बंद करने के खिलाफ वोट किया, तो उसे दोबारा शुरू करना होगा और निवेशक उस योजना अपना पैसा निकाल सकेंगे। दरअसल, फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने 2020 में अपनी छह डेट योजनाओं को अचानक बंद कर दिया था जिसमें निवेशकों के 26 हजार करोड़ रुपये फंस गए थे। 


सेटलमेंट 60 दिनों के भीतर जरूरी
सेबी ने कहा कि अब कंपनियों को सेटलमेंट के लिए आवेदन कारण बताओ या अनुपूरक नोटिस मिलने के 60 दिनों के भीतर देना होगा। सेबी ने जनवरी 2019 में सेटलमेंट नियम लागू किया था। इसके मुताबिक, कोई गलती होने पर कंपनियां फीस भरकर सेबी के साथ उस मामले का निपटारा कर सकती हैं। इसमें कोई संशोधित सेटलमेंट है, तो उसे 15 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। इसके तहत सभी भुगतान सिर्फ पेमेंट गेटवे से लिए जाएंगे। 

विदेशी निवेशकों को मिलेगी पंजीकरण संख्या
सेबी ने विदेशी निवेशकों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब एफपीओ का पंजीकरण करते समय सामान्य जानकारियों के साथ विशेष पंजीकरण संख्या दी जाएगी। इससे निवेशक की ओर से डुप्लीकेट शेयर की मांग करने पर डीमैट के रूप में प्रतिभूतियों को जारी किया जा सकेगा। इस कदम से निवेशकों के लिए लेनदेन आसान हो जाएगा और उनकी सुरक्षा भी बढ़ेगी। 

सेबी बनाएगा विशेष स्थिति फंड 
जोखिम वाली संपत्तियों में पैसे लगाने के इच्छुक निवेशकों के लिए सेबी विशेष स्थिति फंड (एसएसएफ) लाएगा। इसका न्यूनतम कॉर्पस 100 करोड़ रुपये होगा, जबकि न्यूनतम निवेश 5 करोड़ और 10 करोड़ रुपये होगा। एसएसएफ को वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) की ही एक कैटेगरी के रूप में उतारा जाएगा। ये फंड जोखिम वाली संपत्तियों में ही निवेश करेंगे।


आईपीओ में विदेशी निवेशकों ने लगाए 80 हजार करोड़
भारतीय आईपीओ बाजार को रफ्तार देने में इस साल विदेशी निवेशकों की बड़ी भूमिका रही। 2021 में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में कुल विदेशी निवेश 79,851 करोड़ रुपये रहा। विदेशी निवेशकों ने पिछले साल करीब 72 हजार करोड़ का निवेश भारतीय पूंजी बाजार मेें किया था। 

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विस लिमिटेड (सीडीएसल) के अनुसार, कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ने पर विदेशी निवेशक पोर्टफोलियो (एफपीआई) ने निकासी शुरू कर दी है। बावजूद इसके पिछले 10 साल से एफपीआई पूंजी बाजार में शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। 2021 में भी एफपीआई 6.8 अरब डॉलर की निकासी के बावजूद 3.9 अरब डॉलर के शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। इस साल बाजार में आए कुल आईपीओ में एफपीआई का निवेश 10.8 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल पूंजी बाजार का कुल निवेश 9.7 अरब डॉलर था। 65 कंपनियों ने आईपीओ से कुल 1.31 लाख करोड़ जुटाए हैं, जो 2017 के पिछले रिकॉर्ड से 74.6 फीसदी ज्यादा है। 



बैंकों ने आईपीओ से रिकॉर्ड 2,600 करोड़ शुल्क लिया
शेयर बाजार में इस साल रिकॉर्ड आईपीओ का लाभ न सिर्फ कंपनियों और निवेशकों को मिला, बल्कि बैंकों ने भी शुल्क के रूप में मोटा धन कमाया। ब्लूमबर्ग के अनुसार, 2021 में आईपीओ से शुल्क के रूप में भारतीय बैंकों ने रिकॉर्ड 2,600 करोड़ रुपये कमाए हैं। यह 2017 के पिछले आईपीओ रिकॉर्ड से हुई कमाई का चार गुना है। बैंकर का कहना है कि यह अब तक का सबसे ज्यादा शुल्क है। कोटक महिंद्रा कैपिटल के इक्विटी कैपिटल प्रमुख जयशंकर वेंकटरमन ने कहा, मेरे 30 साल के कॅरिअर में 2021 सबसे व्यस्त साल रहा। 2022 में इससे भी ज्यादा शुल्क मिलने की संभावना है, लेकिन ओमिक्रॉन के रूप में नया खतरा आने और महंगाई व ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से बाजार प्रभावित हो सकता है।  

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed