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GTRI: स्टील पर सुरक्षा आयात शुल्क से ऑटो, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र होंगे प्रभावित, जीटीआरआई का दावा

Mon, 18 Aug 2025 11:22 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 18 Aug 2025 11:22 AM IST
सार

GTRI: डीजीटीआर ने कहा कि यह निर्णय इस्पात आयात में, विशेष रूप से चीन से, तीव्र वृद्धि और घरेलू उद्योग के मुनाफे में भारी गिरावट के कारण लिया गया है। लेकिन ये शुल्क ऑटो, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्रों को पंगु बना देंगे। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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Safeguard import duties on steel could cripple auto, engineering, and construction sectors: GTRI
इस्पात उत्पादन - फोटो : एजेंसी

विस्तार

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) की ओर से इस्पात आयात पर तीन साल का सुरक्षा शुल्क, इनपुट लागत बढ़ाकर और छोटे उपयोगकर्ताओं पर दबाव डालकर ऑटो, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्रों को पंगु बना सकता है। इस शुल्क की 6 अगस्त को पुष्टि की गई है। यह सुरक्षा शुल्क पहले वर्ष में 12 प्रतिशत से शुरू होगी, उसके बाद दूसरे वर्ष में 11.5 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 11 प्रतिशत होगी।

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डीजीटीआर ने कहा कि यह निर्णय इस्पात आयात में, विशेष रूप से चीन से, तीव्र वृद्धि और घरेलू उद्योग के मुनाफे में भारी गिरावट के कारण लिया गया है। लेकिन ये शुल्क ऑटो, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्रों को पंगु बना देंगे।

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घरेलू कंपनियों की शिकायत के बाद शुरू की गई थी जांच

एएमएनएस, जेएसडब्ल्यू स्टील, जिंदल स्टील एंड पावर और सेल जैसे प्रमुख उत्पादकों की शिकायतों के बाद डीजीटीआर ने दिसंबर 2024 में जांच शुरू की, जिसमें हॉट-रोल्ड और कोल्ड-रोल्ड स्टील, मेटालिक-कोटेड और कलर-कोटेड स्टील सहित उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला शामिल थी।

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21 अप्रैल, 2025 को पहले ही 12 प्रतिशत का अनंतिम शुल्क लगाया जा चुका है। अपने अंतिम आदेश में, डीजीटीआर ने कहा कि अक्तूबर 2023 से सितंबर 2024 के दौरान आयात "अचानक, तेजी से और महत्वपूर्ण रूप से" बढ़ा है।

चीन का निर्यात 110.7 मीट्रिक टन तक पहुंचा

आंकड़ों के अनुसार, अकेले चीन से निर्यात 2024 में 110.7 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जो 2023 से 25 प्रतिशत की वृद्धि है, जिसमें अधिकांश अतिरिक्त आपूर्ति भारत को भेजी जा रही है। आयातित हॉट-रोल्ड कॉइल मई 2025 में 450 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर आ गए, जो शुल्कों के बाद भी भारतीय लागत से लगभग 87 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन कम था।

टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, हुंडई, टोयोटा किर्लोस्कर, एलजी, सैमसंग, व्हर्लपूल, एबीबी, सीमेंस, क्रॉम्पटन ग्रीव्स, हैवेल्स और एलएंडटी उन कंपनियों में शामिल है, जिन्होंने बताया है कि इस कदम से इनपुट लागत बढ़ सकती है। 

कई संगठनों ने कहा- आयात जरूरी है

ACMA, EEPC और IEEMA ने भी इसी तरह की चिंताओं को दोहराया और कहा कि कई ग्रेड के स्टील का उत्पादन स्थानीय स्तर पर नहीं होता है और आयात जरूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि आयात की मात्रा केवल कोविड से पहले के स्तर पर लौट रही है। बढ़ नहीं रही है और उन्होंने DGTR के आधार वर्ष के चुनाव की आलोचना की। GTRI ने भी DGTR के निष्कर्षों का खंडन किया और कहा कि भारत एक शुद्ध स्टील आयातक बना हुआ है और वित्त वर्ष 2024-25 में मांग 137.82 मीट्रिक टन होने का अनुमान है जबकि घरेलू उत्पादन 132.89 मीट्रिक टन है।



जीटीआरआई का तर्क है कि संकटग्रस्त होने के बजाय, भारतीय इस्पात उत्पादक फल-फूल रहे हैं, और सुरक्षा शुल्क, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के साथ मिलकर, कार्टेल जैसी स्थितियाँ पैदा करने का जोखिम पैदा होता है। जीटीआरआई ने यह भी कहा कि सुरक्षा शुल्क भारत के व्यापक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की कीमत पर कुछ बड़े उत्पादकों को ही संरक्षण प्रदान करेगा।

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