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S400 Deal: ड्रैगन के सिस्टम फेल, भारत का सुदर्शन पास, वायु सेना खरीदेगी पांच नए एस-400 स्क्वाड्रन
Mon, 02 Mar 2026 10:16 PM IST
Kumar Vivek
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kumar Vivek
Updated Mon, 02 Mar 2026 10:16 PM IST
सार
भारत अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए रूस से पांच नए S-400 स्क्वाड्रन खरीदेगा। जानें ऑपरेशन सिंदूर में कैसे फेल हुए चीनी रडार और क्या है प्रोजेक्ट कुशा।
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भारत की रक्षा करने के लिए तैनात एयर डिफेंस ग्रिड।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वैश्विक स्तर पर चीनी वायु रक्षा प्रणालियों के बुरी तरह विफल साबित होने के बीच, भारत अपनी हवाई सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने जा रहा है। भारतीय वायु सेना जल्द ही रूस से 'एस-400 सुदर्शन' वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के पांच नए स्क्वाड्रन खरीदेगी। आइए इस बड़े रक्षा सौदे, इसके पीछे के रणनीतिक कारणों और 'प्रोजेक्ट कुशा' को आसान सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं।
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भारत रूस से पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन क्यों खरीद रहा है?
भारत ने यह बड़ा फैसला पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ मिली शानदार सफलता के बाद लिया है। चार दिनों तक चले इस संघर्ष में भारतीय वायु सेना की एस-400 प्रणाली ने पाकिस्तान के अंदर 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर पांच से छह पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को मार गिराया था। एक उच्च-मूल्य वाले जासूसी विमान को मार गिराकर भारत ने अब तक की सबसे लंबी हवाई मारक क्षमता का रिकॉर्ड भी स्थापित किया है। इसके अलावा, इस प्रणाली ने पाकिस्तान की ओर से दागी गई क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को भी सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था।
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क्या चीनी वायु रक्षा प्रणालियां युद्ध में नाकाम साबित हुई हैं?
हां, चीनी मूल की रक्षा प्रणालियां हालिया वैश्विक संघर्षों में पूरी तरह बेबस नजर आई हैं। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने चीनी 'एचक्यू9' वायु रक्षा प्रणालियां तैनात की थीं, जो आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने वाले भारतीय विमानों और मिसाइलों को रोकने में विफल रहीं। इसके अलावा, पिछले महीने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान और ईरान के खिलाफ अमेरिकी व इस्राइली वायु सेना के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में भी चीनी 'एचक्यू9' प्रणालियां बेकार साबित हुई हैं।
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भारत और रूस के बीच S-400 डील की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत और रूस ने साल 2018 में एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली के पांच स्क्वाड्रन खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इनमें से तीन स्क्वाड्रन पहले ही भारतीय बेड़े में शामिल किए जा चुके हैं और वर्तमान में परिचालन में हैं। भारत अब रूस से शेष दो स्क्वाड्रन की जल्द आपूर्ति करने का अनुरोध कर रहा है। इसके साथ ही, वायु सेना अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में अतिरिक्त मिसाइलें खरीदने की योजना बना रही है, जिसके लिए रूस से बातचीत चल रही है और जल्द ही निविदा जारी की जाएगी।
रक्षा मंत्रालय की नई योजना क्या है और इन प्रणालियों को कहां तैनात किया जाएगा?
जवाब: रक्षा मंत्रालय जल्द ही पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रनों की खरीद के लिए भारतीय वायु सेना के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी देने के लिए आगे की कार्रवाई करेगा। सुरक्षा के लिहाज से इन अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों को देश के पूर्वी और पश्चिमी, दोनों मोर्चों पर तैनात किया जाएगा।
क्या भारत भविष्य के लिए अपनी खुद की कोई लंबी दूरी की रक्षा प्रणाली बना रहा है?
बिल्कुल। विदेशी प्रणालियों की खरीद के साथ-साथ, भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) भी 'परियोजना कुशा' के तहत अपनी खुद की लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने पर तेजी से काम कर रहा है।
अब आगे क्या?
चीनी रक्षा उपकरणों की शृंखलाबद्ध वैश्विक विफलता के बीच रूस की एस-400 प्रणाली का अचूक प्रदर्शन भारतीय सुरक्षा ढांचे के लिए एक रणनीतिक बढ़त है। सीमाओं के दोनों मोर्चों पर अतिरिक्त तैनाती तथा 'प्रोजेक्ट कुशा' के जरिए स्वदेशीकरण की ओर बढ़ाया गया कदम, भारत की दीर्घकालिक रक्षा और भू-राजनीतिक स्थिति को बेहद मजबूत करेगा।