भारत में दौलतमंदों की संख्या बढ़कर हुई 3.43 लाख, सूची में 7,300 नए लोग जुड़े
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असमानता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत में पिछले एक साल के भीतर दौलतमंदों की सूची में 7,300 नए लोग जुड़ गए हैं। इससे देसी धनकुबेरों की संख्या बढ़कर 3.43 लाख हो गई है। क्रेडिट सुइस ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट-2018 के मुताबिक, नए जुड़े दौलतमंदों में 18.6 फीसदी महिलाएं हैं, जो किसी भी बड़े देश के मुकाबले ज्यादा हैं।
क्रेडिट सुइस के मुताबिक, 2018 के मध्य तक के एक साल के भीतर भारत में जुड़े 3,400 नए दौलतमंदों में हर व्यक्ति की पूंजी पांच करोड़ डॉलर, जबकि नए 1,500 में हर व्यक्ति की पूंजी 10 करोड़ डॉलर है। इस दौरान डॉलर के आधार पर देश की पूंजी 2.6 फीसदी की वृद्धि के साथ 60 खरब डॉलर पहुंच गई। वहीं, रुपया में गिरावट के कारण प्रति बालिग पूंजी 7,020 डॉलर पर अपरिवर्तित रही।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में व्यक्ति पूंजी में संपत्ति और दूसरी रीयल एस्टेट संपत्ति का बड़ा योगदान है। पिछले 12 महीने में देश की समृद्धि में इजाफे के आधार पर गैर-वित्तीय संपत्ति में 4.3 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालिया शोध में संकेत मिले हैं कि वैश्विक समृद्धि में भारतीय महिलाओं की हिस्सेदारी अन्य देशों के योगदान 40 फीसदी के मुकाबले 20 से 30 फीसदी ही रहा।
क्रेडिट सुईस के मुताबिक, भारत में समृद्धि बढ़ी जरूर है, लेकिन इसमें हर व्यक्ति हिस्सेदार नहीं है। भारत में अब भी गरीबी बड़ी समस्या है। देश के 91 फीसदी युवाओं की कुल संपत्ति 20 हजार डॉलर से भी कम है।
अमेरिका लगातार 10वें साल शीर्ष पर कायम
वैश्विक स्तर पर अमेरिका लगातार 10वें साल दौलतमंदों की सूची में शीर्ष पर है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान अमेरिका ने वैश्विक समृद्धि में 63 खरब डॉलर का योगदान किया है। इससे वैश्विक पूंजी 980 खरब पहुंच गई है। इस दौरान चीन की पूंजी 23 खरब डॉलर बढ़ी है।
बढ़ेगी अमीरों-गरीबों के बीच की खाई
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गरीबों-अमीरों के बीच की खाई 2023 तक बढ़कर 53 फीसदी हो जाएगी। तब तक देश में दौलतमंदों की संख्या 8.9 फीसदी सालाना की वृद्धि के साथ 5.26 लाख हो जाएगी। इनकी कुल पूंजी भी 88 खरब डॉलर हो जाएगी।
‘भारत में धन दौलत तेजी से बढ़ रही है। साथ ही अमीरों और मध्यम वर्ग की संख्या भी बढ़ती जा रही है, लेकिन इस विकास में हर कोई हिस्सेदार नहीं है। भारत में अब भी गरीबी बड़ी समस्या है।’ - क्रेडिट सुईस