ई-कॉमर्स से ठप हो रहे व्यापार: त्योहारी सीजन में ऑनलाइन बाजार की धूम तो खुदरा व्यापारियों को ग्राहकों का इंतजार
कैट जैसे व्यापारिक संगठनों का दावा है कि उसके साथ आठ करोड़ से ज्यादा खुदरा विक्रेता जुड़े हैं। जबकि पूरे देश में खुदरा व्यापार में लगभग 12 करोड़ व्यापारी काम कर रहे हैं। यदि एक दुकान पर एक व्यापारी के साथ एक भी सहायक होने का औसत पर देखें तो इस प्रकार लगभग 24-25 करोड़ लोगों को खुदरा व्यापार क्षेत्र नौकरी देता है...
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त्योहारी सीजन में बाजार तेजी पकड़ रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा तेजी ऑनलाइन बाजार में ही दिखाई पड़ रही है। मोबाइल से लेकर कपड़े और एसेसरीज के बाजार में ऑनलाइन कंपनियां अब लगभग एकाधिकार की ओर बढ़ती दिख रही हैं, जबकि कोरोना काल के इसी मंदी के सीजन में खुदरा व्यापारियों को अभी भी ग्राहकों का इंतजार है। खुदरा व्यापारियों का कहना है कि अगर सरकार ने ऑनलाइन व्यापार में चल रही अवैध व्यापारिक गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया तो इससे देश के 12 करोड़ के खुदरा व्यापार को तगड़ा झटका लग सकता है और करोड़ों व्यापारी तबाह हो सकते हैं। इससे करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
अनुमान है कि भारत में इस समय ऑनलाइन कंपनियों का बाजार 75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। जिस गति से बाजार आगे बढ़ रहा है, आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले तीन सालों में यह 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ऑनलाइन बाजार जितनी तेजी से बढ़ रहा है, इसे सीधे तौर पर खुदरा व्यापारियों के नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है।
कैट जैसे व्यापारिक संगठनों का दावा है कि उसके साथ आठ करोड़ से ज्यादा खुदरा विक्रेता जुड़े हैं। जबकि पूरे देश में खुदरा व्यापार में लगभग 12 करोड़ व्यापारी काम कर रहे हैं। यदि एक दुकान पर एक व्यापारी के साथ एक भी सहायक होने का औसत पर देखें तो इस प्रकार लगभग 24-25 करोड़ लोगों को खुदरा व्यापार क्षेत्र नौकरी देता है। बड़ी दुकानों को जोड़ने के बाद यह संख्या 30 करोड़ को भी पार कर जाती है। भारी संख्या में कामगरों वाले देश भारत में यह क्षेत्र बड़ी आबादी को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बना हुआ है।
ऑनलाइन कंपनियों पर सबसे बड़ा आरोप यही है कि वे रोजगार छीन रही हैं। ऑनलाइन बाजार बढ़ने से खुदरा व्यापारियों का बाजार घट रहा है। इससे खुदरा व्यापारियों का घाटा और बेरोजगारी बढ़ रही है। ऑनलाइन बाजार का सबसे गहरा असर मोबाइल और कपड़े बेचने वाली दुकानों पर पड़ा है। अनुमान है कि देश में बिक रहे कुल मोबाइल का 50 फीसदी से ज्यादा और कपड़ों के बाजार में एक तिहाई से ज्यादा ऑनलाइन खरीदी-बेची जा रही है। टेक्सटाइल क्षेत्र में भारी संख्या में लोगों के रोजगार प्रभावित होने की बात सामने आ रही है जो चिंताजनक स्थिति पैदा करती है।
हालांकि, ऑनलाइन कंपनियों ने बड़ी संख्या में रोजगार देने की बात कही है। अमेजन ने अगले तीन सालों में 10 लाख नई नौकरियां देने और एक करोड़ नए भारतीय व्यापारियों को ऑनलाइन मंच उपलब्ध कराने की बात कही है। रिलायंस कंपनी ने भी देसी व्यापारियों को ऑनलाइन मंच उपलब्ध कराने और उनका रोजगार आगे बढ़ाने का अवसर देने की बात कही है।
सफल नहीं रहा ये प्रयोग
व्यापारियों के संगठन कैट ने ऑनलाइन बाजार का मुकाबला करने के लिए देश के व्यापारियों को ऑनलाइन मंच पर एक साथ लाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टक्कर देने की बात कही थी। इसके लिए ईलाला.कॉम की शुरुआत की थी। लेकिन खुदरा व्यापारियों की ऑनलाइन बाजार से तालमेल न बिठा पाने के कारण यह प्रयोग सफल नहीं हुआ।
व्यापारियों के संगठन कैट के राष्ट्रीय सचिव सुमित अग्रवाल ने अमर उजाला को बताया कि उनका संगठन जल्द ही 'भारत-ई-मार्केट' की शुरूआत करने जा रहा है। इसमें खुदरा व्यापारियों को दुकानों के माध्यम से खरीदारी-बिक्री करने के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से वस्तुओं को बेचने का अवसर मिल सकेगा। इसमें देश के किसी भी हिस्से में खड़ा ग्राहक एक एप के सहारे किसी वस्तु की खरीद के लिए उस वस्तु को बेचने वाली अपने आसपास की सभी दुकानों को देख सकेगा। वह दुकान पर पहुंचकर खरीद कर सकेगा, और चाहे तो ऑनलाइन माध्यम से खरीद भी कर सकेगा। प्रयोग के तौर पर इसकी शुरूआत रायपुर से की जा सकती है।
असमानता दूर करने की मांग
खुदरा व्यापारियों का कहना है कि वे अमेजन या फ्लिपकार्ट से मुकाबला करने में नहीं घबराते। सबसे बड़ी समस्या ऑनलाइन कंपनियों द्वारा वस्तुओं की खरीद पर दी जा रही अतार्किक छूट है। शुरुआत में बहुराष्ट्रीय कंपनियां बड़ी पूंजी के बल पर भारी छूट देकर घाटे में सामान बेचती हैं। बाद में ग्राहकों से वसूली करती हैं। अगर सामानों की खरीद और बिक्री का एक न्यूनतम मूल्य निर्धारित हो तो बहुराष्ट्रीय कंपनियां उनसे सस्ता माल नहीं बेच सकतीं और उनसे मुकाबला करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
नई ई-कॉमर्स नीति लाने पर सरकार विचार कर रही है। इनमें अतार्किक तरीके का उपयोग कर अवैध तरीके से ग्राहकों को प्रभावित करने से रोकने पर कानून बनाए जाने की संभावना है। इससे देश के 12 करोड़ खुदरा व्यापारियों और 25 करोड़ से ज्यादा लोगों के रोजगार की रक्षा हो सकेगी।