{"_id":"68b88054eb8e6a24cf077d4e","slug":"reduction-in-gst-rates-will-neutralize-trump-s-tariffs-market-will-be-buzzing-with-bumper-offers-on-diwali-2025-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"GST: ट्रंप के टैरिफ को बेअसर कर देगी जीएसटी दरों में कमी, दिवाली पर बंपर ऑफर से गुलजार होगा बाजार","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
GST: ट्रंप के टैरिफ को बेअसर कर देगी जीएसटी दरों में कमी, दिवाली पर बंपर ऑफर से गुलजार होगा बाजार
सार
दिवाली, दशहरा और नवरात्र जैसे त्योहारी सीजन के पहले जीएसटी दरों में कमी से बाजार में मांग बढ़ने और व्यापारियों को बड़ा लाभ होने का अनुमान है। देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के लगभग दर के साथ आगे बढ़ रही है। जीएसटी दरों में कमी आर्थिक तरक्की की इस रफ्तार को और तेज करने का काम करेगी।
विज्ञापन
निर्मला सीतारमण
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद बताया कि महत्त्वपूर्ण वस्तुओं पर जीएसटी दरों को घटाने का निर्णय लिया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में काम आने वाली अनेक वस्तुओं, कृषि क्षेत्र में खाद बनाने वाले प्रमुख रसायनों, हाथ से बनाए जाने वाली वस्तुओं, निजी इंश्योरेंस, आंखों के लिए नंबर वाले चश्मे सहित रोजमर्रा के उपभोग की अनेक वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी की गई है। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि जीएसटी दरों में कमी से पूरे देश में मांग को बढ़ाने में मदद मिलेगी। जीएसटी दरों में कमी के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले टैरिफ से होने वाले नुकसान को भी कम करने में मदद मिलेगी। जीएसटी दरों में कमी 22 सितंबर यानी नवरात्रों के पहले दिन से प्रभावी होगी।
दिवाली, दशहरा और नवरात्र जैसे त्योहारी सीजन के पहले जीएसटी दरों में इस कमी से बाजार में मांग बढ़ने और व्यापारियों को बड़ा लाभ होने का अनुमान है। देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के लगभग दर के साथ आगे बढ़ रही है। जीएसटी दरों में कमी आर्थिक तरक्की की इस रफ्तार को और तेज करने का काम करेगी।
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी दरों के लागू होने के समय ही इस बात का अनुमान जताया था कि समय आने के साथ जीएसटी दरों को केवल दो कैटेगरी में समेटा जा सकता है। लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्यों को पर्याप्त समय देना चाहिए। कहा जा सकता है कि सरकार पूर्व वित्त मंत्री की बातों को पूरा करती हुई दिखाई दे रही है।
विज्ञापन
गरीबी को कम करने में मिलेगी मदद
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 में भारत में गरीबी दर 27.1 प्रतिशत के करीब थी, लेकिन 2022-23 में यह दर 5.3 प्रतिशत के करीब रह गई है। ये आंकड़े यह बताते हैं कि केंद्र सरकार के विभिन्न उपायों, सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली के अंतर्गत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराने से गरीबी को कम करने में मदद मिली है। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आने के कारण इससे गरीबी के आंकड़े को और कम करने में मदद मिलेगी।
घरेलू मांग में बढ़ोतरी, छोटे व्यापारियों को लाभ
जीएसटी काउंसिल ने घरेलू उपभोग की आवश्यक वस्तुओं को शून्य या पांच फीसदी की जीएसटी दरों के अंदर लाने का निर्णय कर दिया है। इससे इन उत्पादों की खपत में बढ़ोतरी होगी। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में इन वस्तुओं के खपत में बढ़ोतरी होगी और इसका सीधा लाभ इन वस्तुओं के उत्पादन में लगे छोटी-छोटी व्यापारिक इकाइयों और खुदरा दुकानदारों को होगा।
अमेरिकी टैरिफ के नुकसान को कम करने में मिलेगी मदद
अमेरिकन टैरिफ के कारण निर्यात में कमी होने से सबसे ज्यादा नुकसान निम्न और मध्यम वर्ग के उद्योगों और छोटे व्यापारियों को ही होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसमें हैंडीक्राफ्ट, कपड़े जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। जीएसटी दरों में कमी होने से ऐसे छोटे उद्योगों और छोटे व्यापारियों को लाभ मिल सकता है। घरेलू मांग बढ़ने से इस सेक्टर को उस कमी की भरपाई हो सकती है जो अमेरिकन टैरिफ के कारण पैदा होने की संभावना है। ऐसे में आर्थिक जानकार टैरिफ दरों की कमी को सीधे अमेरिकन टैरिफ से मुकाबला करने की एक बेहतर रणनीति मान रहे हैं।
बचत में बढ़ोतरी
निम्न और मध्यम वर्ग के निचले उपवर्ग के उपभोक्ताओं की कमाई का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा खाद्य वस्तुओं की खरीद में चला जाता है। यदि जीएसटी की दरों में कमी के कारण इन वस्तुओं की कीमतों में कमी होती है तो इससे यह वर्ग आसानी से आवश्यक वस्तुओं की खरीद कर पाएगा। उसके बचत में भी बढ़ोतरी हो सकती है जो उसका जीवन स्तर ऊंचा करने में मददगार साबित होगी।
'लचीला रुख अपनाए केंद्र सरकार'
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार और जीएसटी काउंसिल का जीएसटी दरों में कमी करने पर विचार करना एक सोचा समझा और रणनीतिक कदम है। जीएसटी दरों के अत्यधिक होने से वस्तुओं की कीमतों में अकारण वृद्धि होती है जिसका नुकसान उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को होता है। इससे अर्थव्यवस्था की गति पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार जीएसटी दरों को दो फ्लैट दरों पर समेटने में सहमत हो गई है। इससे सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, गरीबी को कम करने, लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाने और रोजगार निर्माण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल उन्हीं वस्तुओं को 40 फीसदी के टैक्स दर में रखना चाहिए जिस सेक्टर को हतोत्साहित करना देश-समाज के हित में हो। शराब, पान-मसाला, जर्दा जैसे उत्पाद और महंगे कोल्ड ड्रिंक्स ऐसे ही सेक्टर हैं जिन पर सरकार 40 दर पर टैक्स लगा रही है। इन वस्तुओं के उपभोग में कमी लाना जनहित में है, इसलिए ऐसे कदमों का स्वागत किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
दिवाली, दशहरा और नवरात्र जैसे त्योहारी सीजन के पहले जीएसटी दरों में इस कमी से बाजार में मांग बढ़ने और व्यापारियों को बड़ा लाभ होने का अनुमान है। देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के लगभग दर के साथ आगे बढ़ रही है। जीएसटी दरों में कमी आर्थिक तरक्की की इस रफ्तार को और तेज करने का काम करेगी।
विज्ञापन
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी दरों के लागू होने के समय ही इस बात का अनुमान जताया था कि समय आने के साथ जीएसटी दरों को केवल दो कैटेगरी में समेटा जा सकता है। लेकिन इसके लिए केंद्र और राज्यों को पर्याप्त समय देना चाहिए। कहा जा सकता है कि सरकार पूर्व वित्त मंत्री की बातों को पूरा करती हुई दिखाई दे रही है।
विज्ञापन
गरीबी को कम करने में मिलेगी मदद
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2011-12 में भारत में गरीबी दर 27.1 प्रतिशत के करीब थी, लेकिन 2022-23 में यह दर 5.3 प्रतिशत के करीब रह गई है। ये आंकड़े यह बताते हैं कि केंद्र सरकार के विभिन्न उपायों, सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली के अंतर्गत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराने से गरीबी को कम करने में मदद मिली है। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आने के कारण इससे गरीबी के आंकड़े को और कम करने में मदद मिलेगी।
घरेलू मांग में बढ़ोतरी, छोटे व्यापारियों को लाभ
जीएसटी काउंसिल ने घरेलू उपभोग की आवश्यक वस्तुओं को शून्य या पांच फीसदी की जीएसटी दरों के अंदर लाने का निर्णय कर दिया है। इससे इन उत्पादों की खपत में बढ़ोतरी होगी। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में इन वस्तुओं के खपत में बढ़ोतरी होगी और इसका सीधा लाभ इन वस्तुओं के उत्पादन में लगे छोटी-छोटी व्यापारिक इकाइयों और खुदरा दुकानदारों को होगा।
अमेरिकी टैरिफ के नुकसान को कम करने में मिलेगी मदद
अमेरिकन टैरिफ के कारण निर्यात में कमी होने से सबसे ज्यादा नुकसान निम्न और मध्यम वर्ग के उद्योगों और छोटे व्यापारियों को ही होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसमें हैंडीक्राफ्ट, कपड़े जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। जीएसटी दरों में कमी होने से ऐसे छोटे उद्योगों और छोटे व्यापारियों को लाभ मिल सकता है। घरेलू मांग बढ़ने से इस सेक्टर को उस कमी की भरपाई हो सकती है जो अमेरिकन टैरिफ के कारण पैदा होने की संभावना है। ऐसे में आर्थिक जानकार टैरिफ दरों की कमी को सीधे अमेरिकन टैरिफ से मुकाबला करने की एक बेहतर रणनीति मान रहे हैं।
बचत में बढ़ोतरी
निम्न और मध्यम वर्ग के निचले उपवर्ग के उपभोक्ताओं की कमाई का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा खाद्य वस्तुओं की खरीद में चला जाता है। यदि जीएसटी की दरों में कमी के कारण इन वस्तुओं की कीमतों में कमी होती है तो इससे यह वर्ग आसानी से आवश्यक वस्तुओं की खरीद कर पाएगा। उसके बचत में भी बढ़ोतरी हो सकती है जो उसका जीवन स्तर ऊंचा करने में मददगार साबित होगी।
'लचीला रुख अपनाए केंद्र सरकार'
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार और जीएसटी काउंसिल का जीएसटी दरों में कमी करने पर विचार करना एक सोचा समझा और रणनीतिक कदम है। जीएसटी दरों के अत्यधिक होने से वस्तुओं की कीमतों में अकारण वृद्धि होती है जिसका नुकसान उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को होता है। इससे अर्थव्यवस्था की गति पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सरकार जीएसटी दरों को दो फ्लैट दरों पर समेटने में सहमत हो गई है। इससे सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, गरीबी को कम करने, लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठाने और रोजगार निर्माण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल उन्हीं वस्तुओं को 40 फीसदी के टैक्स दर में रखना चाहिए जिस सेक्टर को हतोत्साहित करना देश-समाज के हित में हो। शराब, पान-मसाला, जर्दा जैसे उत्पाद और महंगे कोल्ड ड्रिंक्स ऐसे ही सेक्टर हैं जिन पर सरकार 40 दर पर टैक्स लगा रही है। इन वस्तुओं के उपभोग में कमी लाना जनहित में है, इसलिए ऐसे कदमों का स्वागत किया जाना चाहिए।