आरबीआई के फैसले से उद्योग जगत में उत्साह, उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
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रिजर्व बैंक के लगातार तीसरी बार रेपो घटाने से उद्योग जगत में उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि अब ब्याज दरों में और कमी की गुंजाइश बनेगी जिससे सस्ते दर पर कोष उपलब्ध हो सकेगा। ब्याज दर सस्ता होने से बाजार में मांग बढ़ेगी जो उत्पादन को भी बढ़ावा देगा।
नरेडको के अध्यक्ष एवं उद्योग संगठन एसोचैम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी का कहना है कि रिजर्व बैंक के इस फैसले से बाजार में नई जान आएगी। लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कटौती से रियल एस्टेट की निर्माणाधीन परियोजनाओं और सस्ते मकानों की योजनाओं को बूस्टर डोज मिलेगा।
आरबीआई को बाजार में तरलता की समस्या को हल करने की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। यह समय की मांग है, क्योंकि बाजार में तरलता कम होने से उद्योग जगत की कोष जुटाने की लागत काफी ज्यादा हो गई है।
कटौती जरूरी थी
उच्च बेरोजगारी दर और सुस्त विकास दर के साथ ही मोटर वाहनों की घटती बिक्री को रोकने के लिए रेपो दर में कटौती जरूरी थी। इसका लाभ नए घर खरीदारों के साथ रियलिटी उद्योग से जुड़े लोगों को भी मिलेगा।
पार्थ मेहता, प्रबंध निदेशक, पैराडिज्म रियलिटी
अब बैंकों पर नजर
रिजर्व बैंक के इस निर्णय से कुंद पड़ी विकास दर को गति मिलेगी, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैंक इस पर कितना अमल करेंगे। पहले भी लगातार दो बार ब्याज दर में कमी हो चुकी है, लेकिन बैंकों ने पूरा लाभ नहीं दिया।
-आनंद राठी, मुख्य अर्थशास्त्री, शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स
पुराने, नए ग्राहकों को मिलेगा फायदा
25 बेसिस प्वाइंट की कमी के बाद रेपो रेट अब 5.75 फीसदी हो गया है और इसका सीधा असर होम लोन पर होगा। आरबीआई से नए रेपो रेट पर उपलब्ध कर्ज बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओ द्वारा जारी कर्ज के ब्याज को प्रभावित करेगा। उम्मीद है कि बैंक इसका फायदा अपने नए और पुराने ग्राहकों के जल्द ही देंगे। कम ब्याज पर कर्ज मिलने से घर खरीदारों को ही फायदा होगा जहा ईएमआई कम हो जायेगी।
2019 के बजट के बाद जिसमे टैक्स सीमा बढ़ाने के अलावा, दूसरे घर को टैक्स मुक्त करना, रेंटल इनकम पर टीडीएस की सीमा 2.50 लाख करने, पुराना घर बेचकर दो करोड़ तक के दो नए घर को टैक्स मुक्त करने के बाद अब रेपो रेट में कटौती से घरो की डिमांड बढ़ना तय है।
अवनीश सूद, डायरेक्टर, एरोस ग्रुप
बढ़ेगी रेडी टू मूव घरों की डिमांड
यह लगातार तीसरी बार आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है जिससे रेपो रेट अब छह फीसदी से घटकर 5.75 फीसदी हो गया है। रियल एस्टेट में फंड की उपलब्धता बहुत जरुरी है और ऐसे प्रयासों से लोन ले कर घर लेने वालों को सहूलियत मिलेगी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में रेडी टू मूव यूनिट्स की कोई कमी नहीं है और तो और मार्केट के मौजूदा परिवेश में खरीदारों को मन मुताबिक घर मिलना आसान है। अब बैंक को इस कटौती का फायदा घर खरीदारों तक पहुँचाना चाहिए।
लेकिन रेपो रेट कम करने इस केवल एक पक्ष, घर खरीदार, को फायदा मिलता है। सरकर को चाहिए कि वो रियल एस्टेट सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा दे जिससे प्रोजेक्ट के लिए फंड आसानी से कम रेट पर मिल सके।
दिनेश जैन, एमडी, एक्सोटिका हाउसिंग
आगे भी हो सकती है कटौती
आज के रेट कट के बाद अब बैंक भविष्य में अपने रेपो रेट में और कटौती कर सकता है। हालांकि अब आगे का फैसला आरबीआई महंगाई दर के बाद लेगा। अब अगले दो महीनों में मानसून की चाल और बजट के बाद ही केंद्रीय बैंक आगे कुछ फैसला लेगा।
अभीक बरूआ, चीफ इकोनॉमिस्ट, एचडीएफसी बैंक